शहरी क्षेत्र में कृषि भूमि की सीमा 1000 वर्गमीटर से बढ़ाकर 2000 वर्गमीटर करने और स्टाम्प ड्यूटी के लिए आवासीय भूमि के बराबर मान लेने को बताया संविधान के खिलाफ
जयपुर। राजस्थान में शहरी क्षेत्रों में स्थित छोटी कृषि भूमि पर आवासीय दरों से स्टाम्प ड्यूटी वसूलने के राज्य सरकार के फैसले को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने कोटा निवासी दुर्गा शंकर की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य के प्रमुख सचिव वित्त, संयुक्त सचिव वित्त, आईजी स्टांप जयपुर और उप-पंजीयक कोटा को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने सरकार को जवाब देने के लिए 8 सप्ताह का समय दिया है।
याचिका में वित्त विभाग द्वारा जारी 24 फरवरी 2021 की अधिसूचना के क्लॉज-17 और 1 अक्टूबर 2025 की संशोधित अधिसूचना को निरस्त करने की मांग की गई है।
इन अधिसूचनाओं के तहत शहरी क्षेत्र या शहरी परिधि में स्थित 2000 वर्गमीटर तक की कृषि भूमि को स्टाम्प ड्यूटी के लिए आवासीय भूमि के बराबर मान लिया गया है।
क्या है पूरा मामला
याचिकाकर्ता दुर्गा शंकर के पास कोटा जिले के ग्राम नायखेड़ा में स्थित कृषि भूमि में 1/16 अविभाजित हिस्सा है, जो लगभग 1500 वर्गमीटर क्षेत्रफल का है।
यह भूमि राजस्व रिकॉर्ड में स्पष्ट रूप से कृषि भूमि के रूप में दर्ज है और राज्य सरकार द्वारा इस पर कृषि दर से ही राजस्व वसूला जाता रहा है।
1 सितंबर 2025 को याचिकाकर्ता ने उक्त भूमि को बेचने के लिए एक इकरारनामा (एग्रीमेंट टू सेल) किया।
समझौते के तहत भूमि को कृषि भूमि मानकर कीमत तय की गई और 5 लाख रुपये अग्रिम लिए गए। शेष राशि 1 नवंबर 2025 तक अदा कर रजिस्ट्री होनी थी।
नई अधिसूचना से बढ़ी दर
हालांकि, 1 अक्टूबर 2025 को राज्य सरकार ने नई अधिसूचना जारी कर कृषि भूमि की सीमा 1000 वर्गमीटर से बढ़ाकर 2000 वर्गमीटर कर दी और इसे स्टाम्प ड्यूटी के लिए आवासीय भूमि के बराबर मान लिया।
इसके चलते याचिकाकर्ता की 1500 वर्गमीटर कृषि भूमि पर अब आवासीय दर से स्टाम्प ड्यूटी मांगी जा रही है।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ बापना, राहुल कुमार और तनुष्का सक्सेना ने दलीलें पेश करते हुए कहा कि सरकार का यह फैसला न केवल मनमाना है, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 19 (व्यवसाय की स्वतंत्रता), 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) और 300-A (संपत्ति का अधिकार) का उल्लंघन करता है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि भूमि आज भी कृषि है, न तो उसका रूपांतरण हुआ है और न ही उसका उपयोग बदला गया है, फिर भी उसे आवासीय मानकर अतिरिक्त स्टाम्प ड्यूटी वसूलना कानूनन गलत है।
बिना परामर्श जारी की गई
याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि नई अधिसूचना बिना किसी सार्वजनिक परामर्श या सुनवाई के जारी की गई, जिससे पहले से किए गए वैध समझौते प्रभावित हो रहे हैं।
यदि याचिकाकर्ता समझौता रद्द करता है तो उसे अग्रिम राशि का दोगुना लौटाना पड़ेगा और यदि बिक्री करता है तो भारी अतिरिक्त स्टाम्प ड्यूटी का बोझ उठाना पड़ेगा।
याचिका में अनुरोध
याचिकाकर्ता ने 24 फरवरी 2021 की अधिसूचना के क्लॉज-17 और 1 अक्टूबर 2025 की संशोधित अधिसूचना को असंवैधानिक घोषित करने का अनुरोध किया है।
साथ ही, रजिस्ट्री को पुरानी दरों के अनुसार स्टाम्प दरें लागू करने की मांग की है।
याचिकाकर्ता ने अंतरिम राहत के तौर पर इन अधिसूचनाओं के प्रभाव और संचालन पर रोक लगाने की भी मांग की है, ताकि अंतिम निर्णय तक उसे आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।