Fraud and Deception’ के नाम पर अकाउंट सस्पेंड करने को चुनौती, याचिका में AI आधारित कार्रवाई, बिना पूर्व नोटिस और मानवीय समीक्षा के अभाव पर उठे गंभीर सवाल; हाईकोर्ट ने 3 सप्ताह में जवाब तलब किया
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने फेसबुक यानी कि सोशल टेक्नोलॉजी कंपनी Meta Platforms, Inc.को एक अधिवक्ता का बिना नोटिस Facebook-Instagram अकाउंट बंद करने पर नोटिस जारी कर 3 सप्ताह में जवाब तलब किया हैं.
अधिवक्ता की ओर से दायर याचिका में फेसबुक यानी मेटा पर AI आधारित कार्रवाई, बिना नोटिस और मानवीय समीक्षा के अभाव की कार्रवाई करते हुए ‘Fraud and Deception’ के नाम पर अकाउंट सस्पेंड करने का आरोप लगाया हैं.
जस्टिस अनूप कुमार धंड की एकलपीठ ने यह आदेश अधिवक्ता यश जांगिड़ की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया हैं.
हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार के साथ ही मेटा कंपनी को 3 सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया हैं.

क्या है पूरा मामला?
सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता यश जांगिड़ ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कि उनका Facebook अकाउंट वर्ष 2021 से और Instagram अकाउंट भी लंबे समय से व्यक्तिगत एवं पेशेवर उद्देश्यों के लिए संचालित हो रहा था। दोनों अकाउंट आपस में लिंक थे।
याचिका के अनुसार 21 जनवरी 2026 को जांगिड़ ने लंदन में रवींद्रनाथ टैगोर के स्मारक बस्ट से जुड़ी एक शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक पोस्ट Facebook और Instagram पर प्रकाशित की।
उन्होंने Instagram पर इसी पोस्ट को पेड विज्ञापन के जरिए प्रमोट भी किया।
याचिका में दावा किया गया है कि Meta के विज्ञापन सिस्टम ने इस सामग्री को पेड प्रमोशन के लिए स्क्रीन कर मंजूरी दी और उसके बाद उसी दिन Facebook अकाउंट को ‘Fraud and Deception’ संबंधी Community Standards के कथित उल्लंघन के आधार पर सस्पेंड कर दिया गया।
याचिकाकर्ता का कहना है कि Meta ने यह स्पष्ट नहीं किया कि आखिर कौन-सा कंटेंट या गतिविधि कथित उल्लंघन का कारण बनी।
याचिका में यह भी स्पष्ट किया गया है कि याचिकाकर्ता स्वयं निश्चित रूप से यह नहीं कह रहे कि टैगोर वाला पोस्ट ही अकाउंट सस्पेंशन का कारण था।
उनका कहना है कि वह कार्रवाई से ठीक पहले की प्रमुख गतिविधि थी और Meta के विज्ञापन सिस्टम द्वारा उसी सामग्री को पहले मंजूरी दिए जाने के कारण यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है।
1:28 बजे सस्पेंशन, दो मिनट बाद विज्ञापन अकाउंट पर कार्रवाई
याचिका में Meta की ओर से भेजे गए ई-मेल शामिल करते हुए दावा किया गया हैं कि 21 जनवरी 2026 को दोपहर 1:28 बजे Facebook की ओर से ई-मेल भेजकर बताया गया कि अकाउंट सस्पेंड कर दिया गया है और कारण के तौर पर “fraud and deception” संबंधी Community Standards का हवाला दिया गया।
ई-मेल में याचिकाकर्ता को 180 दिनों के भीतर अपील करने का विकल्प दिया गया था और चेतावनी दी गई थी कि निर्धारित अवधि में अपील नहीं करने पर अकाउंट स्थायी रूप से बंद हो सकता है।
इसके लगभग दो मिनट बाद, 1:30 बजे, Facebook के विज्ञापन अकाउंट से संबंधित दूसरा ई-मेल आया।
इसमें विज्ञापन सुविधाओं पर प्रतिबंध को कथित “inauthentic behaviour” या Advertising Policies के उल्लंघन से जोड़ा गया। ई-मेल में कहा गया कि उल्लंघन का पता लगाने के लिए technology का इस्तेमाल किया गया।
चूंकि Facebook और Instagram अकाउंट आपस में लिंक थे, याचिका के अनुसार Instagram अकाउंट भी उसी समय निष्क्रिय हो गया।
क्या AI अकेले कर सकता हैं डिजिटल पहचान बंद
याचिका में अधिवक्ता यश जांगिड़ ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता में एआई के हस्तक्षेप को लेकर सवाल खड़ा किया गया हैं.
याचिका में फेसबुक की स्वचालित तकनीक और AI आधारित निर्णय प्रक्रिया को संवैधानिक चुनौती दी है।
याचिका में आरोप है कि बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म यदि बिना पर्याप्त मानवीय निगरानी, बिना स्पष्ट कारण और बिना प्रभावी सुनवाई के किसी व्यक्ति की डिजिटल पहचान, संपर्कों और पेशेवर नेटवर्क तक पहुंच समाप्त कर दें, तो इससे प्राकृतिक न्याय और मौलिक अधिकारों से जुड़े गंभीर सवाल पैदा होते हैं।
याचिका में विशेष रूप से संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 तथा IT Rules, 2021 के प्रावधानों का सहारा लिया गया है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म को नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।
बिना नोटिस और कारण बताए कार्रवाई का आरोप
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि अकाउंट बंद करने से पहले उन्हें कोई प्रभावी पूर्व नोटिस, चेतावनी या सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया।
इसके अलावा, उन्हें यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि किस पोस्ट या किस गतिविधि को Meta ने ‘fraud and deception’ माना।
यही कारण है कि याचिका में कार्रवाई को मनमाना, अनुपातहीन और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध बताया गया है।
GAC में दायर अपील में भी याचिकाकर्ता ने कहा कि यदि Meta अकाउंट बहाल नहीं करता है तो कम से कम उसे ऐसा विस्तृत और कारणयुक्त आदेश देना चाहिए जिसमें कथित उल्लंघन के सटीक आधार, साक्ष्य और लागू नीति का उल्लेख हो, ताकि उस कार्रवाई को उचित कानूनी मंच के सामने चुनौती दी जा सके।
Meta Verified लेने के बावजूद नहीं मिली राहत
याचिका में बताया गया है कि 12 जनवरी 2026 को याचिकाकर्ता ने Instagram पर Meta Verified की प्रीमियम सदस्यता ली थी।
याचिका के अनुसार इस सेवा के माध्यम से उन्हें अकाउंट सुरक्षा और प्राथमिकता वाली मानव सहायता मिलने की अपेक्षा थी।
अकाउंट बंद होने के बाद उन्होंने एक अन्य कॉर्पोरेट हैंडल @officeofyashjangid पर भी Meta Verified सेवा ली और मानव सपोर्ट तक पहुंच बनाने का प्रयास किया।
याचिका के अनुसार इसके जरिए करीब छह अलग-अलग review tickets बनाए गए, लेकिन वे प्रभावी समाधान तक नहीं पहुंच सके।
उसी दिन अपील की, लेकिन महीनों तक नहीं हुआ फैसला
अकाउंट सस्पेंड होने के बाद याचिकाकर्ता ने 21 जनवरी 2026 को ही Meta के आंतरिक अपील सिस्टम के माध्यम से अपील दायर कर दी थी।
याचिका के अनुसार सिस्टम पर बताया गया था कि समीक्षा सामान्य तौर पर लगभग एक दिन में पूरी हो सकती है, लेकिन अपील का कोई प्रभावी निर्णय लंबे समय तक नहीं आया।
बाद में उन्होंने Meta के Grievance Officer से भी संपर्क किया।
25 मार्च 2026 को उन्होंने Grievance Appellate Committee (GAC) में Appeal No. 7903/2026 दाखिल की, जो दस्तावेज के अनुसार उस समय “Under Process” थी।
GAC में याचिकाकर्ता ने Facebook और Instagram अकाउंट की बहाली अथवा Meta से कथित उल्लंघन के सटीक आधार और साक्ष्य वाला विस्तृत, कारणयुक्त आदेश देने की मांग की थी।
MeitY और उपभोक्ता मंच तक पहुंचा मामला
याचिकाकर्ता ने मामले को केंद्र सरकार के Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) के समक्ष भी उठाया।
CPGRAMS पर दर्ज शिकायत के दस्तावेज में Instagram से संबंधित सोशल मीडिया शिकायत का उल्लेख है।
दस्तावेज के अनुसार, 4 मई 2026 को MeitY की ओर से शिकायत बंद करते हुए टिप्पणी की गई कि GAC सदस्यों की onboarding प्रक्रिया चल रही है और शिकायत का समाधान जल्द किया जाएगा।
याचिका में यह भी दर्ज है कि याचिकाकर्ता ने District Consumer Commission, Jodhpur से संबंधित प्रक्रिया भी शुरू की थी।
दस्तावेजों में National Consumer Helpline से जुड़े Docket No. 9143647 का भी उल्लेख है।
डेटा हमेशा के लिए डिलीट होने का भी खतरा बताया
याचिका में एक और महत्वपूर्ण मुद्दा अकाउंट डेटा के संरक्षण का है। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि IT Rules, 2021 के Rule 3(1)(g) और Meta की आंतरिक नीतियों के अनुसार suspended account से जुड़े डेटा के संरक्षण की एक सीमित अवधि है।
याचिका में 20 जुलाई 2026 को महत्वपूर्ण डेटा संरक्षण की समयसीमा बताया गया था।
याचिकाकर्ता ने आशंका जताई कि यदि अदालत से अंतरिम संरक्षण नहीं मिला तो अकाउंट से जुड़े पोस्ट, कनेक्शन, रिकॉर्ड, इतिहास और अन्य डिजिटल डेटा स्थायी रूप से डिलीट हो सकता है।
इससे उनके अनुसार वर्षों से बनाए गए पेशेवर संपर्क, अंतरराष्ट्रीय कानूनी नेटवर्क और व्यक्तिगत डिजिटल यादें भी नष्ट हो सकती हैं।
सोशल मीडिया अकाउंट को बताया पेशेवर डिजिटल नेटवर्क का हिस्सा
याचिका के अनुसार, यश जांगिड़ ने 2021 से इन सोशल मीडिया अकाउंट्स का इस्तेमाल केवल व्यक्तिगत पोस्ट के लिए नहीं बल्कि अपने पेशेवर और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के निर्माण के लिए भी किया था।
याचिका में बताया गया है कि उन्होंने लंदन में रहकर LL.M. किया, अंतरराष्ट्रीय कानूनी क्षेत्र में काम किया और विभिन्न देशों में पेशेवर संपर्क विकसित किए।
इन संपर्कों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स से जुड़ा था।
इसी आधार पर याचिकाकर्ता का कहना है कि अकाउंट बंद होने से सिर्फ सोशल मीडिया प्रोफाइल नहीं, बल्कि उनकी डिजिटल पहचान, पेशेवर संपर्क और वर्षों की डिजिटल सामग्री प्रभावित हुई है।
IT Rules और Meta की जवाबदेही का मुद्दा
याचिका में IT Rules, 2021 के कई प्रावधानों का हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ता ने विशेष रूप से Rule 3(1)(n) का उल्लेख करते हुए कहा है कि इंटरमीडियरी को संविधान द्वारा नागरिकों को दिए गए अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।
याचिका में Rule 7 और IT Act की Section 79 के तहत safe harbour से जुड़े कानूनी परिणामों का भी उल्लेख किया गया है।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि यदि किसी इंटरमीडियरी द्वारा निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया जाता है तो safe harbour से जुड़े कानूनी परिणाम सामने आ सकते हैं। यह फिलहाल याचिकाकर्ता की कानूनी दलील है, जिस पर प्रतिवादियों का जवाब आना बाकी है।
याचिका में मांग
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के समक्ष मुख्य रूप से अपने Facebook और Instagram अकाउंट बहाल करने, अकाउंट से संबंधित डेटा सुरक्षित रखने और Meta द्वारा लंबित आंतरिक समीक्षा को मानव स्तर पर पूरा करने की मांग रखी है।
अंतरिम राहत के तौर पर उन्होंने Meta और उसके संबंधित अधिकारियों को अकाउंट से जुड़े डेटा, पोस्ट, कनेक्शन, रिकॉर्ड और अन्य जानकारी को डिलीट या irrecoverable करने से रोकने तथा लंबित आंतरिक समीक्षा का कारणयुक्त परिणाम निर्धारित समय में बताने का अनुरोध किया था।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
फिलहाल हाईकोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय नहीं दी है।
जस्टिस अनूप कुमार धंड की एकलपीठ ने मेटा सहित केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह में जवाब तलब किया हैं।
इसके साथ ही मामले को पुन: सुनवाई के लिए 15 सितंबर के लिए सूचीबद्ध किया हैं।