जोधपुर/जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने न्यायिक कामकाज को और अधिक प्रभावी, व्यवस्थित और शोध-आधारित बनाने के लिए “राजस्थान हाईकोर्ट में लीगल रिसर्चर नियुक्ति योजना (संशोधन–2021)” को लागू किया है।
50 हजार रूपये प्रतिमाह में कानूनी स्नातकों को लीगल रिसर्चर नियुक्त किया जायेगा.
इस योजना का मुख्य उद्देश्य हाईकोर्ट जजों को कानूनी शोध, फैसलों के अध्ययन और प्रशासनिक कार्यों में सहयोग देना है, ताकि मामलों का निस्तारण समय पर और बेहतर ढंग से हो सके।
आज के समय में अदालतों में मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
हर मामले में नए-नए कानूनी सवाल सामने आते हैं। ऐसे में जजों को कई फैसलों, कानूनों और कानूनी लेखों का अध्ययन करना पड़ता है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने लीगल रिसर्चर की योजना के लिए गाइडलाइन जारी की हैं.
क्या है लीगल रिसर्चर की भूमिका
लीगल रिसर्चर ऐसे कानून स्नातक होते हैं, जो हाईकोर्ट जजों के साथ काम करते हुए उन्हें मामलों की कानूनी पृष्ठभूमि समझने में मदद करते हैं।
वे केस से जुड़े तथ्यों का सार तैयार करते हैं, जरूरी फैसलों और कानूनों को खोजते हैं और बहस के दौरान उठने वाले कानूनी बिंदुओं पर नोट्स बनाते हैं। इससे जजों को निर्णय लेने में आसानी होती है।
कितने लीगल रिसर्चर होंगे नियुक्त
योजना के तहत राजस्थान हाईकोर्ट में कुल 102 लीगल रिसर्चर नियुक्त किए जाएंगे। ये नियुक्तियां राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर और जयपुर दोनों पीठों में की जाएंगी।
वर्तमान में राजस्थान हाईकोर्ट में स्वीकृत जजों की संख्या मुख्य न्यायाधीश सहित 50 हैं, योजना के अनुसार प्रत्येक जज के लिए 2 लीगल रिसर्चर नियुक्त किए जायेंगे. केवल मुख्य न्यायाधीश के लिए चार लीगल रिसर्चर नियुक्त किए जायेंगे.
नियुक्ति की अवधि और प्रकृति
लीगल रिसर्चर की नियुक्ति अस्थायी और संविदा आधार पर होगी।
शुरुआत में इनकी नियुक्ति एक वर्ष के लिए की जाएगी। यदि कार्य संतोषजनक रहता है, तो इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।
अधिकतम अवधि चार वर्ष या संबंधित जज के रिटायर होने तक हो सकेगी. इस नियुक्ति के आधार पर कोई भी अभ्यर्थी स्थायी नौकरी का दावा नहीं कर सकेगा।
चयन प्रक्रिया कैसे होगी
लीगल रिसर्चर बनने के लिए आवेदन ऑनलाइन माध्यम से करना होगा।
रिक्तियों की सूचना राजस्थान हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी। आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों में से योग्य उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा।
चयन में शैक्षणिक योग्यता, ज्ञान और समझ को प्राथमिकता दी जाएगी। अंतिम चयन मुख्य न्यायाधीश द्वारा किया जाएगा।
कौन कर सकता है आवेदन
इस योजना के तहत आवेदन करने के लिए कुछ जरूरी शर्तें रखी गई हैं—
अभ्यर्थी की आयु आवेदन वर्ष की 1 जनवरी को 33 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।
अभ्यर्थी भारत में कानून द्वारा स्थापित किसी विश्वविद्यालय या संस्थान से एलएलबी या एलएलएम होना चाहिए।
कंप्यूटर का सामान्य ज्ञान होना जरूरी है और अभ्यर्थी का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है।
किन्हें नहीं मिलेगा मौका
जो अभ्यर्थी वकालत कर रहे हों या किसी अन्य नौकरी/मानदेय पर कार्यरत हों, वे इस पद के लिए योग्य नहीं होंगे।
जिन पर आपराधिक मामला लंबित हो या जो किसी अपराध में दोषी ठहराए गए हों।
जिनका आचरण या नैतिक चरित्र संदिग्ध पाया जाए।
कितना मिलेगा मानदेय
चयनित लीगल रिसर्चर को ₹50,000 प्रति माह मानदेय दिया जाएगा। यह एक निश्चित राशि होगी, जिसमें किसी प्रकार का महंगाई भत्ता या अन्य सुविधाएं शामिल नहीं होंगी। बिना अनुमति अनुपस्थित रहने पर मानदेय में कटौती की जा सकती है।
अवकाश की सुविधा
लीगल रिसर्चर को प्रत्येक माह एक आकस्मिक अवकाश मिलेगा। यदि किसी माह अवकाश नहीं लिया जाता है, तो वह आगे के लिए जुड़ सकता है। अवकाश की स्वीकृति संबंधित जज द्वारा दी जाएगी।
लीगल रिसर्चर के मुख्य काम
लीगल रिसर्चर को न्यायाधीशों के निर्देशन में कई अहम जिम्मेदारियां निभानी होंगी, जैसे—
केस फाइल पढ़कर पूरे मामले का सरल सार तैयार करना।
मामले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य और कानूनी सवालों को चिन्हित करना।
संबंधित कानूनों और पुराने फैसलों (केस लॉ) की खोज करना।
बहस के दौरान वकीलों की दलीलों के नोट्स बनाना।
फैसलों के कानूनी बिंदुओं का रिकॉर्ड रखना।
प्रशासनिक फाइलों और पत्राचार में सहयोग देना।
न्यायाधीशों के भाषण या लेख तैयार करने में सहायता करना।
कार्य समय और अनुशासन
लीगल रिसर्चर का यह काम पूर्णकालिक होगा। जरूरत पड़ने पर उन्हें कार्यालय समय के अलावा भी काम करना पड़ सकता है। उन्हें उच्च स्तर का अनुशासन और गोपनीयता बनाए रखनी होगी।
गोपनीयता और आचरण से जुड़े नियम
लीगल रिसर्चर को अपने कार्यकाल के दौरान मिली किसी भी गोपनीय जानकारी को बाहर साझा करने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा, कार्यकाल पूरा होने के बाद भी वे तीन साल तक उस न्यायाधीश के सामने वकालत नहीं कर सकेंगे, जिनके साथ उन्होंने काम किया हो।
प्रमाण-पत्र का प्रावधान
जो लीगल रिसर्चर अपना कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा करेंगे, उन्हें राजस्थान हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से प्रमाण-पत्र दिया जाएगा। यह प्रमाण-पत्र उनके भविष्य के करियर के लिए काफी उपयोगी माना जाएगा। हालांकि, यदि कोई लीगल रिसर्चर बीच में ही पद छोड़ देता है, तो उसे यह प्रमाण-पत्र नहीं मिलेगा।
युवाओं के लिए बड़ा अवसर
कुल मिलाकर, राजस्थान हाईकोर्ट की यह योजना युवा कानून स्नातकों के लिए एक बड़ा अवसर है। इससे उन्हें उच्च न्यायालय के कामकाज को नजदीक से देखने और सीखने का मौका मिलेगा। साथ ही, न्यायाधीशों को भी बेहतर शोध और सहयोग मिलेगा, जिससे न्याय व्यवस्था और मजबूत होगी।