जयपुर, जोधपुर, 27 नवंबर
76वें संविधान दिवस पर प्रदेशभर में कई कार्यक्रम आयोजित हुए। राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ और जयपुर पीठ में भी इस मौके पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए।
राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ में संविधान दिवस पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के मुख्य आतिथ्य में विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

हाईकोर्ट परिसर स्थित सतीशचंद्र सभागार में बुधवार शाम को आयोजित इस विशेष परिचर्चा का विषय “संवैधानिक मूल्यों का संरक्षण एवं अधिवक्ताओं की भूमिका” रखा गया था।
इस कार्यक्रम में अधिवक्ताओं के लिए संविधान निर्माण प्रक्रिया, उसकी प्रमुख चुनौतियों और समय के साथ हुए परिवर्तनों पर विस्तृत चर्चा की गई।

राजस्थान हाईकोर्ट के इतिहास में पहली बार संविधान दिवस पर आयोजित हुए इस तरह के कार्यक्रम में
हाईकोर्ट की 24 महिला अधिवक्ताओं ने संविधान पर अपने विचार व्यक्त किए।
संगोष्ठी को राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने संबोधित करते हुए कहा कि संविधान में निहित मूल्यों को समझना और उन्हें व्यवहार में उतारना हर विधिक पेशेवर का दायित्व है। उन्होंने कहा कि संविधान हमारे अधिकारों का संरक्षक है और अधिवक्ता समाज में न्याय एवं संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

संगोष्ठी में कार्यक्रम के निर्णायक जज की भूमिका में जस्टिस अनुप कुमार ढंड ने संचालन किया.
संगोष्ठी में 24 महिला अधिवक्ताओं ने संविधान से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे।
जोधपुर मुख्यपीठ में “हमारा संविधान, हमारा गौरव” थीम पर विशेष आयोजन

राजस्थान हाईकोर्ट की मुख्यपीठ जोधपुर में भी 76वें संविधान दिवस पर शानदार समारोह का आयोजन किया गया।
“हमारा संविधान, हमारा लोकोत्सव” थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी रहे।
समारोह का आगाज़ दीप प्रज्वलन और संविधान की प्रस्तावना के सामूहिक वाचन से हुआ।

राजस्थान हाईकोर्ट के सभी जजों के साथ ही राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पदाधिकारी, वरिष्ठ अधिवक्ता, विधि महाविद्यालयों के छात्र और बड़ी संख्या में मौजूद न्यायिक अधिकारियों ने संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन किया।
सामूहिक वाचन के बाद जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने संविधान के महत्व, नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला।
जस्टिस भाटी ने कहा कि संविधान सिर्फ कानून की पुस्तक नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की आत्मा है, जो प्रत्येक नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और न्याय का अधिकार देता है।
अपने संबोधन में जस्टिस भाटी ने कहा कि संविधान दिवस हमें यह याद दिलाता है कि इसकी आत्मा को जीवित रखना हम सभी की ज़िम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि “कानून के विद्यार्थी और न्याय की व्यवस्था से जुड़े हर व्यक्ति का दायित्व है कि वे संवैधानिक नैतिकता का पालन करें और अधिकारों के साथ कर्तव्यों के प्रति भी सजग रहें।”
समारोह को संबोधित करते हुए जस्टिस इन्द्रजीत सिंह ने कहा कि भारत का संविधान विश्व के सबसे मजबूत और जीवंत संविधानों में से एक है, जिसने देश को स्थिरता, न्याय और विकास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ाया है। उन्होंने विभिन्न देशों के उदाहरण देते हुए बताया कि जहाँ राजनीतिक अस्थिरता व्यवस्था को कमजोर करती है, वहीं भारत में संविधान की मजबूती ने लोकतंत्र को निरंतर सशक्त किया है।
समारोह में न्यायाधीशों व अधिकारियों ने संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने की शपथ ली। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
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