जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE Act) को लेकर एक बेहद अहम फैसला सुनाया है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया हैं कि जिन निजी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं (PP1, PP2, PP3) संचालित की जा रही हैं, वहां आरटीई के तहत 25 प्रतिशत आरक्षण एंट्री लेवल से ही देना अनिवार्य होगा।
निजी स्कूल अब यह कहकर आरटीई से बच नहीं सकेंगे कि उन्हें केवल कक्षा-1 से ही मान्यता प्राप्त है।
राज्य सरकार की अपीलें खारिज
जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार द्वारा दायर 7 विशेष अपीलों का निस्तारण करते हुए यह व्यवस्था दी।
हाईकोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा पहले ही हाईकोर्ट की एक अन्य डिवीजन बेंच द्वारा तय किया जा चुका है, इसलिए राज्य सरकार की अपीलों में कोई दम नहीं है।
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यदि कोई स्कूल प्री-प्राइमरी स्तर पर बच्चों को प्रवेश दे रहा है, तो वहीं से आरटीई के तहत 25% सीटें कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित करनी होंगी।
केवल कक्षा-1 से आरटीई लागू होने का तर्क कानूनन स्वीकार्य नहीं है।
RTE कानून की भावना पर जोर
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम का उद्देश्य केवल औपचारिक शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक समानता और समावेशी शिक्षा सुनिश्चित करना है।
हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि आज के समय में बच्चों के बौद्धिक और मानसिक विकास में प्री-प्राइमरी शिक्षा की भूमिका बेहद अहम है।
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को केवल कक्षा-1 से शिक्षा दी जाएगी, जबकि अन्य बच्चे पहले ही नर्सरी और केजी स्तर की पढ़ाई कर चुके होंगे, तो यह असमानता RTE अधिनियम के मूल उद्देश्य को ही विफल कर देगी।
स्कूलों की दलील खारिज
सुनवाई के दौरान कई निजी स्कूलों ने यह तर्क दिया कि उन्हें सरकार से केवल कक्षा-1 से ही मान्यता मिली हुई है और प्री-प्राइमरी कक्षाएं औपचारिक रूप से मान्यता प्राप्त नहीं हैं, इसलिए वहां आरटीई लागू नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मान्यता का सवाल स्कूल की स्थापना से जुड़ा है, न कि बच्चों के शिक्षा के अधिकार से। यदि स्कूल प्री-प्राइमरी कक्षाएं चला रहे हैं और वहां बच्चों को प्रवेश दे रहे हैं, तो वे आरटीई अधिनियम से खुद को अलग नहीं कर सकते।
एंट्री लेवल पर ही 25% जरूरी
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी स्कूल में प्रवेश PP1, PP2 या PP3 से शुरू होता है, तो वही “एंट्री लेवल” माना जाएगा।
ऐसे में उसी स्तर पर 25% आरटीई प्रवेश देना अनिवार्य होगा।
हाईकोर्ट ने साथ ही यह भी व्यवस्था दी कि यदि प्री-प्राइमरी स्तर पर ही 25% आरटीई प्रवेश दे दिया गया है, तो वही बच्चे आगे चलकर कक्षा-1 में आते हैं, तो स्कूल को दोबारा 25% सीटें भरने की जरूरत नहीं होगी।
लेकिन यदि कक्षा-1 में आरटीई छात्रों का अनुपात 25% से कम पाया जाता है, तो स्कूल को अतिरिक्त प्रवेश देकर यह अनुपात पूरा करना होगा।
सर्कुलर जारी करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह इस फैसले के अनुरूप आवश्यक दिशा-निर्देश और परिपत्र (सर्कुलर) जारी करे, ताकि पूरे प्रदेश में आरटीई कानून का समान और प्रभावी क्रियान्वयन हो सके।