जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ ने लेखा विभाग में लेखाधिकारी पद पर की गई विवादित पदोन्नतियों के मामले में अंतरिम आदेश पारित किया है।
जस्टिस अशोक कुमार जैन ने 19 सितंबर 2025 को जारी पदोन्नति आदेश के तहत पदोन्नत किए गए अधिकारियों के संबंध में यथा-स्थिति बनाए रखने के निर्देश देते हुए स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय तक किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा।
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 12 जनवरी 2026 को निर्धारित की है।
यह आदेश प्रेम प्रकाश आर्य सहित 11 वरिष्ठ कर्मचारियों द्वारा दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिया गया है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता तनवीर अहमद ने अदालत को बताया कि सभी याचिकाकर्ता वर्ष 1989 बैच के कर्मचारी हैं, जिन्हें वर्ष 1991 में कनिष्ठ लेखाकार के पद पर नियुक्त किया गया था।
सेवा के दौरान वे 2008–09 में लेखाकार/सहायक लेखाधिकारी-II तथा 2014–15 में सहायक लेखाधिकारी-I के पद पर पदोन्नत हुए।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि इसके बावजूद विभाग ने 19 सितंबर 2025 के आदेश से उनसे 4–5 वर्ष कनिष्ठ कर्मचारियों को लेखाधिकारी पद पर पदोन्नति दे दी, जबकि उस समय वे कैडर में शामिल ही नहीं थे।
याचिका में कहा गया कि संबंधित वरिष्ठता सूची वर्षों से अप्रतिवादित और अंतिम रूप से लागू है, जिसमें याचिकाकर्ता पदोन्नत किए गए अधिकारियों से स्पष्ट रूप से वरिष्ठ हैं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता तनवीर अहमद ने अदालत को यह भी बताया कि जब याचिकाकर्ता वर्ष 2008–09 में ही कैडर में पदोन्नत हो चुके थे, उस समय कई निजी प्रतिवादी कैडर में भी सम्मिलित नहीं थे।
इसके बावजूद वरिष्ठों को दरकिनार कर कनिष्ठों को पदोन्नति देना सेवा नियमों, विभागीय पदोन्नति नीति और संविधान के अनुच्छेद 14 व 16 के विपरीत है।
मूल सिद्धांतों के खिलाफ
अधिवक्ता ने यह भी तर्क दिया कि यह विवाद वेतन या वित्तीय लाभ से संबंधित नहीं है, क्योंकि याचिकाकर्ताओं को चयन वेतनमान और लेखाधिकारी ग्रेड पहले ही प्राप्त है।
अधिवक्ता ने कहा कि मामला सम्मान, पद और वैधानिक वरिष्ठता अधिकार से जुड़ा है। यदि कनिष्ठों की पदोन्नति बनी रहती है, तो वरिष्ठ कर्मचारियों को उन्हीं के अधीन कार्य करना पड़ेगा, जो सेवा न्यायशास्त्र के मूल सिद्धांतों के प्रतिकूल है।
बहस सुनने के बाद एकलपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय तक न तो पदोन्नति आदेश का प्रभाव बदला जाएगा और न ही कोई नई प्रशासनिक स्थिति उत्पन्न की जा सकेगी।
अब सभी की निगाहें 12 जनवरी 2026 को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस संवेदनशील सेवा विवाद पर विस्तृत बहस होने की संभावना है।