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उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट सख्त, राज्य की जमीनों पर मांगा जवाब; दैनिक भास्कर को भी नोटिस

Rajasthan HC Orders Verification of Waqf Properties Listed on UMEED Portal, Seeks Reports from Civic Body and Waqf Board

19,044 संपत्तियां जांच के दायरे में आईं, प्रक्रिया के बाद 17,500 संपत्तियां पोर्टल पर अपलोड; गीता भवन, स्कूल-कॉलेज, मंदिर और सरकारी जमीनों को लेकर कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट

जोधपुर। उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों के रूप में दर्ज जमीनों और दूसरी संपत्तियों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।

जस्टिस पुष्पेन्द्रसिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने इस मामले में दैनिक भास्कर अखबार में प्रकाशित समाचार और अन्य द्वारा उठाए गए मुद्दो को लेकर स्वप्रेणा प्रसंज्ञान से जनहित याचिका दायर की थी.

हाईकोर्ट ने अब इस मामले में जोधपुर नगर निगम, वक्फ बोर्ड और राज्य सरकार से पोर्टल पर दर्ज संपत्तियों की स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।

खास तौर पर उन सरकारी और निजी संपत्तियों को लेकर रिपोर्ट मांगी गई है, जिनके वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज होने पर राज्य सरकार या किसी निजी व्यक्ति ने आपत्ति की है अथवा भविष्य में आपत्ति की जा सकती है।

स्वप्रेणा प्रंसज्ञान से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायमित्र सहित अलग अलग विभागों अपने जवाब पेश किए.

वक्फ बोर्ड सीईओ अबू सुफियान ने भी कोर्ट में पेश होकर अपना पक्ष रखा

19,044 संपत्तियां जांच के दायरे में, 17,500 ही पोर्टल पर अपलोड

सुनवाई के दौरान वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं अल्पसंख्यक मामलों के अतिरिक्त निदेशक अबू सुफियान चौहान कोर्ट में पेश हुए.

अधिकारी ने कोर्ट को बताया ​कि कुल 19,044 संपत्तियां विचार के दायरे में आई थीं। निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच के बाद इनमें से 17,500 संपत्तियां ही उम्मीद पोर्टल पर अपलोड की गई हैं।

उन्होंने बताया कि संपत्तियों को पोर्टल पर दर्ज करने के लिए ‘मेकर, चेकर और अप्रूवर’ की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। बोर्ड के अनुसार 1962 का रजिस्टर और उसके आधार पर किया गया सर्वे इस प्रक्रिया का आधार है।

तीन स्तर की जांच के बाद पोर्टल पर दर्ज होती है संपत्ति

वक्फ बोर्ड ने कोर्ट को बताया कि पहले चरण में मेकर उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर संपत्ति का विवरण तैयार करता है। इसके बाद चेकर संपत्ति के स्वामित्व, भौतिक कब्जे और अन्य जरूरी पहलुओं की जांच करता है।

तीसरे चरण में अप्रूवर पूरी जानकारी, संबंधित रिकॉर्ड और संपत्ति के वक्फ को समर्पित किए जाने से जुड़े पहलुओं की समीक्षा करता है।

सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद ही संपत्ति का विवरण उम्मीद पोर्टल पर अपलोड किया जाता है।

नगर निगम के सर्वे में सामने आईं विसंगतियां

नगर निगम की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार ने कोर्ट को बताया कि जिला प्रशासन ने संबंधित खसरा नंबरों का विस्तृत सर्वे कराया है।

सर्वे के दौरान वक्फ संपत्तियों से जुड़े दावों में कई विसंगतियां और विवाद सामने आए हैं। कुछ मामलों में संपत्तियों के भौतिक अस्तित्व को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

नगर निगम ने इस संबंध में विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने की बात कही है। अब कोर्ट रिकॉर्ड और मौके की स्थिति के बीच किसी भी अंतर को लेकर विस्तृत रिपोर्ट देखेगा।

गीता भवन, स्कूल-कॉलेज और मंदिरों का भी मामला उठा

सुनवाई के दौरान गीता भवन, स्कूल, कॉलेज, कुछ मंदिरों तथा सरकारी और निजी जमीनों के उम्मीद पोर्टल पर वक्फ बोर्ड के नाम दर्ज होने से जुड़ी दैनिक भास्कर अखबार की खबर का मुद्दा भी सामने आया।

विशेष रूप से खसरा नंबर 490 का उल्लेख किया गया।

इस पर वक्फ बोर्ड के सीईओ अबू सुफियान चौहान ने स्पष्ट किया कि जिन संपत्तियों का उल्लेख किया गया है, वे वक्फ संपत्तियां नहीं हैं और न ही उन्हें वक्फ बोर्ड की ओर से पोर्टल पर अपलोड किया गया है।

उन्होंने कहा कि ऐसी संपत्तियों को वक्फ संपत्ति मानने का बोर्ड की ओर से कोई प्रस्ताव या इरादा नहीं है।

अबू सुफियान ने अखबार में प्रकाशित खबर बिना सत्यापन प्रकाशित करने की बात कही.

हाईकोर्ट ने माना- अधिकारी की चिंता वास्तविक

कोर्ट की सहायता कर रहे अधिकारी की ओर से बिना सत्यापन के प्रकाशित खबरों को लेकर जताई गई चिंता पर हाईकोर्ट ने कहा कि यह चिंता प्रथमदृष्टया वास्तविक प्रतीत होती है।

कोर्ट ने कहा कि यदि ऐसी रिपोर्ट या प्रकाशन सत्यापित तथ्यों पर आधारित नहीं हैं तो इससे आम लोगों में अनावश्यक चिंता और भ्रम पैदा हो सकता है तथा सामाजिक ताने-बाने पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

दैनिक भास्कर को भी नोटिस

मामले में हाईकोर्ट ने दैनिक भास्कर को फिलहाल कार्यवाही में एक पक्ष के रूप में शामिल किया है।

अधिवक्ता मुकुल सिंघवी को अखबार की ओर से नोटिस स्वीकार करने और संबंधित समाचार के संबंध में निर्देश प्राप्त कर कोर्ट के समक्ष स्पष्टीकरण रखने को कहा गया है।

कोर्ट ने यह जानना चाहा है कि गीता भवन, स्कूल, कॉलेज, मंदिर और सरकारी जमीनों के उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्ति के रूप में प्रतिबिंबित होने संबंधी खबर किन परिस्थितियों में प्रकाशित हुई।

कोर्ट ने कहा कि यही समाचार वर्तमान जनहित याचिका शुरू होने का आधार बना था।

सरकारी जमीनों पर राज्य सरकार से मांगा जवाब

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज राज्य की संपत्तियों के मामले में आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

इसके साथ ही यह भी बताना होगा कि वर्ष 2025 में संशोधित कानून के तहत ‘मेकर, चेकर और अप्रूवर’ की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ऐसी संपत्तियों को पोर्टल पर दर्ज किए जाने की कार्रवाई को राज्य प्राधिकारी किस सीमा तक स्वीकार करते हैं।

राजस्व और स्थानीय निकाय विभाग करेंगे सूची की जांच

कोर्ट ने उम्मीद पोर्टल पर अपलोड की गई वक्फ संपत्तियों की पूरी सूची स्थानीय स्वशासन विभाग और राजस्व विभाग को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

दोनों विभाग सूची की जांच कर अगली सुनवाई से पहले अपना पक्ष कोर्ट के रिकॉर्ड पर रखेंगे।

इसके अलावा वक्फ बोर्ड और राज्य सरकार के अधिकारियों को उन संपत्तियों के संबंध में भी रिपोर्ट देनी होगी, जिन पर सरकार या निजी व्यक्तियों ने आपत्ति की है या भविष्य में आपत्ति उठ सकती है।

अब नगर निगम और वक्फ बोर्ड के हलफनामे, राजस्व एवं स्थानीय निकाय विभाग की जांच और न्यायमित्र की रिपोर्ट के आधार पर उम्मीद पोर्टल पर दर्ज संपत्तियों की स्थिति और स्पष्ट होगी। मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर 2026 को होगी।

अब 2 सितंबर को सुनवाई

इस मामले में अब नगर निगम और वक्फ बोर्ड के जवाबी शपथपत्र, संबंधित विभागों की जांच और न्यायमित्र की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।

कोर्ट के सामने इससे तस्वीर साफ होने की उम्मीद है कि उम्मीद पोर्टल पर दर्ज संपत्तियों का आधार क्या है, उनके रिकॉर्ड और जमीन की स्थिति में कोई अंतर है या नहीं और विवाद होने पर उसका समाधान कैसे किया जाएगा।

मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर 2026 को होगी।

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