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जूनियर वकीलों को मिले 15 से 20 हजार का स्टाइपेंड, हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर जारी किए नोटिस

Rajasthan High Court PIL Seeks Implementation of Minimum Stipend for Junior Advocates

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका दायर कर राज्य में कार्यरत जूनियर युवा अधिवक्ताओं को न्यूनतम मासिक स्टाइपेंड दिए जाने की मांग की गयी हैं.

राजस्थान हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद राज्य सरकार सहित पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया हैं.

हाईकोर्ट ने राजस्थान विधि विभाग, राज्य वित्त विभाग, भारत सरकार के विधि मंत्रालय, बार काउंसिल आफ इंडिया और राजस्थान बार काउंसिल को नोटिस जारी किये है।.

राजस्थान हाईकोर्ट के अधिवक्ता मनीष टाक की ओर से दायर जनहित याचिका पर यह आदेश जस्टिस पुष्पेन्द्रसिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने दिया हैं.

याचिका में कहा गया है कि देशभर में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के बावजूद राजस्थान में अब तक इन्हें लागू नहीं किया गया है, जिससे युवा वकीलों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।

याचिकाकर्ता मनीष टाक ने याचिका में कहा कि 15 अक्टूबर 2024 को बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने एक परिपत्र जारी कर शहरी क्षेत्रों में कार्यरत जूनियर वकीलों को न्यूनतम 20,000 रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में 15,000 रुपये मासिक स्टाइपेंड देने की सिफारिश की थी।

यह परिपत्र दिल्ली हाईकोर्ट के आदेशो के बाद जारी किया गया था, जिसमें युवा अधिवक्ताओं की आर्थिक चुनौतियों को स्वीकार किया गया था।

Advocate Manish Tak

राजस्थान में अब तक नहीं निर्णय

याचिका में कहा गया है कि राजस्थान बार काउंसिल ने 28 अक्टूबर 2024 को उक्त परिपत्र को राज्य की सभी बार एसोसिएशनों को अग्रेषित भी किया, लेकिन राज्य सरकार की ओर से अब तक इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।

याचिका में कहा गया कि राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन ने भी 18 दिसंबर 2025 को राज्य सरकार को पत्र लिखकर इस पर अमल करने की मांग की, परंतु स्थिति जस की तस बनी हुई है।

कहा कहा लागू

याचिका में यह भी कहा गया कि अन्य राज्यों—जैसे केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और झारखंड—ने जूनियर वकीलों के लिए वित्तीय सहायता योजनाएं लागू की हैं।

केरल सरकार ने तो 2018 में ही युवा अधिवक्ताओं को मासिक सहायता देने की योजना शुरू कर दी थी। इसी प्रकार आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में भी न्यूनतम स्टाइपेंड की व्यवस्था लागू है। इसके विपरीत राजस्थान में अब तक कोई प्रभावी योजना लागू नहीं की गई है।

याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(g) और 21 का हवाला देते हुए कहा गया है कि बिना आर्थिक सुरक्षा के जूनियर वकीलों से कार्य करवाना उनके समानता के अधिकार, पेशा चुनने की स्वतंत्रता और जीवन व आजीविका के अधिकार का उल्लंघन है।

प्रारंभिक वर्षों में अधिवक्ताओं को स्थिर आय नहीं मिलती, जिससे वे आर्थिक रूप से असुरक्षित रहते हैं और कई बार पेशा छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। इससे न्याय व्यवस्था की गुणवत्ता और सुलभता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

जरूरी हैं न्यूनतम स्टाइपेंड

याचिका में यह भी कहा गया है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया एक वैधानिक संस्था है और उसके दिशा-निर्देशों की अनदेखी करना उचित नहीं है।

राज्य सरकार और राज्य बार काउंसिल का दायित्व है कि वे इन सिफारिशों पर विचार कर ठोस नीति बनाएं। लगातार की जा रही अनदेखी प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि राज्य सरकार और संबंधित प्राधिकारियों को निर्देशित किया जाए कि वे बीसीआई के 15 अक्टूबर 2024 के परिपत्र को लागू करें तथा जूनियर अधिवक्ताओं को न्यूनतम स्टाइपेंड सुनिश्चित करें।

याचिका में इस मामले में स्पष्ट दिशा-निर्देश और नियमावली जारी करने की मांग कि गयी हैं.

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