181 पदों के लिए 2700 में से 4 अभ्यर्थी हुए सफल, मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल
जयपुर। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित सहायक अभियोजन अधिकारी (Assistant Prosecution Officer – APO) भर्ती परीक्षा 2024 के चौंकाने वाले परिणाम को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने अब RPSC सचिव को रिकॉर्ड सहित पेश होने के आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट जयपुर पीठ में जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने 8 जनवरी को RPSC सचिव को समस्त रिकॉर्ड सहित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश दिए हैं।
इस परिणाम से बाहर हुए सृष्टि जैन सहित दर्जनों अभ्यर्थियों ने याचिका दायर कर हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
याचिका में कहा गया है कि 181 पदों के लिए आयोजित इस भर्ती प्रक्रिया में लगभग 2700 अभ्यर्थियों ने मुख्य परीक्षा दी थी, लेकिन केवल 4 अभ्यर्थी ही सफल घोषित किए गए, जबकि 2696 अभ्यर्थी प्रत्येक प्रश्नपत्र में अनिवार्य न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक भी प्राप्त नहीं कर पाए।
याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने कहा कि—
“लगभग तीन हजार अभ्यर्थियों में से केवल चार का सफल होना, और शेष का न्यूनतम बेंचमार्क तक भी न पहुँच पाना, संपूर्ण मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।”
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि पिछली सुनवाई में नोटिस जारी होने के बावजूद राज्य सरकार की ओर से कोई भी अधिकारी उपस्थित नहीं हुआ, जिसे गंभीरता से लेते हुए RPSC सचिव को समस्त प्रासंगिक रिकॉर्ड के साथ उपस्थित होने का आदेश दिया गया है।
RJS परीक्षा पास करने वाले भी फेल
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कई ऐसे अभ्यर्थी हैं, जिन्होंने राजस्थान न्यायिक सेवा (RJS) परीक्षा 2025 जैसी कहीं अधिक कठिन परीक्षा में 40 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए, लेकिन APO मुख्य परीक्षा में वे न्यूनतम अर्हता भी हासिल नहीं कर सके।
इससे मॉडल उत्तरों में त्रुटि, अत्यधिक कठोर मूल्यांकन, बिना मॉडरेशन के यांत्रिक जांच जैसी गंभीर आशंकाएँ उत्पन्न हुई हैं।
यह भी पढ़िए: 181 पदों पर 2700 ने दी परीक्षा, केवल 4 हुए पास, APO भर्ती पर उठे सवाल, हाईकोर्ट में याचिका दायर
परीक्षा निरस्त करने की मांग
अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता तनवीर अहमद के जरिए दायर की गई याचिका में परीक्षा परिणाम को मनमाना, अव्यावहारिक और संविधान के मूल अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं में कहा गया है कि कई अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्होंने राजस्थान न्यायिक सेवा (RJS) परीक्षा 2025 जैसी कहीं अधिक कठिन परीक्षा में 40 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए, लेकिन APO मुख्य परीक्षा में वे न्यूनतम अर्हता अंक तक नहीं ला पाए।
इससे मूल्यांकन में त्रुटिपूर्ण मॉडल उत्तर, अत्यधिक कठोर अंकन, या बिना मॉडरेशन के यांत्रिक जांच की आशंका जताई गई है।