राजस्थान हाईकोर्ट के इस फैसले से प्रदेश की 18 से 21 वर्ष आयु वर्ग की हजारों युवतियों को राहत मिलेगी.
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता (एएनएम) / ऑक्सिलरी नर्स मिडवाइफ (Auxiliary Nurse Midwife – ANM) के संविदा पदों पर न्यूनतम आयु 21 वर्ष तय करने के राज्य सरकार के निर्णय को असंवैधानिक करार देते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समान पद और समान योग्यता के बावजूद नियमित और संविदा भर्ती में अलग-अलग आयु सीमा तय करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है।
जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस अनुरूप सिंघी की खंडपीठ ने यह ऐतिहासिफ और रिपोर्टेबल जजमेंट शोभा व सैकड़ो अन्य महिला अभ्यर्थियो की ओर से दायर याचिकाओं पर दिया है.
हाईकोर्ट ने राजस्थान संविदा भर्ती नियम, 2022 के नियम 6 को उस सीमा तक असंवैधानिक घोषित कर दिया, जहां यह एएनएम/महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता (संविदा) पद के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष अनिवार्य करता है।
ऐसे शुरू हुआ विवाद
राज्य सरकार ने वर्ष 2022 में राजस्थान संविदा भर्ती नियम लागू किए, जिनके तहत विभिन्न विभागों में संविदा नियुक्तियों के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित की गई।
इसी नियम के तहत महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता (एएनएम) के संविदा पदों पर भी 21 वर्ष की आयु सीमा तय की गई।
वहीं दूसरी ओर, राजस्थान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधीनस्थ सेवा नियम, 1965 के तहत इसी पद पर नियमित भर्ती के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित है।
याचिकाकर्ताओं ने इसे एक गंभीर विसंगति बताते हुए कहा कि दोनो भर्ती में पद एक हैं, शैक्षणिक योग्यता एक है और कार्य, जिम्मेदारी और प्रशिक्षण समान है.
लेकिन नियुक्ति के स्वरूप (संविदा/नियमित) के आधार पर आयु सीमा अलग-अलग क्यों?
अधिकांश महिला अभ्यर्थी
याचिकाकर्ताओं में अधिकांश वे युवतियाँ जिन्होंने एएनएम/महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता का प्रशिक्षण पूरा कर लिया था और राजस्थान नर्सिंग काउंसिल में पंजीकरण करा लिया, जिसके आधार पर वे नियमित भर्ती के लिए पात्र मानी गयी.
लेकिन केवल 21 वर्ष की आयु पूरी न होने के कारण संविदा भर्ती से बाहर कर दी गईं।
इन अभ्यर्थियों का तर्क था कि एएनएम कोर्स में प्रवेश की न्यूनतम आयु 17 वर्ष होती है और कोर्स पूरा करते-करते अधिकांश छात्राएं 18–19 वर्ष की आयु में पूरी तरह योग्य हो जाती हैं।
ऐसे में 21 वर्ष की शर्त उनके करियर को अनुचित रूप से बाधित करती है।
याचिकाकर्ताओं की प्रमुख दलीलें
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में कहा गया अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन किया गया हैं क्योकि समान पद पर समान योग्यता रखने वाले उम्मीदवारों के साथ भेदभाव किया गया।
अधिवक्ताओं ने कहा कि राज्य सरकार यह नहीं बता पाई कि संविदा एएनएम को नियमित एएनएम से अधिक “परिपक्व” क्यों होना चाहिए।
इंटेलिजिबल डिफरेंशिया के अभाव के लिए आयु सीमा में अंतर का कोई तार्किक आधार नहीं है।
भारतीय संविदा अधिनियम का हवाला देते हुए कहा गया कि 18 वर्ष की आयु में व्यक्ति संविदा करने में सक्षम है, तो सरकारी संविदा नौकरी में 21 वर्ष की बाध्यता कैसे उचित?
याचिका में कहा गया कि यह नियम सिर्फ युवतियों के रोजगार के अवसरों को अनुचित रूप से सीमित करता है।
पात्रता तय करना सरकार का अधिकार
राज्य सरकार ने नियमों का बचाव करते हुए कहा संविदा भर्ती एक नीतिगत निर्णय है और नियम 2022 सभी विभागों में समान रूप से लागू हैं.
सरकार ने कहा कि अधिक आयु से बेहतर दक्षता और परिपक्वता सुनिश्चित होती है और पात्रता तय करना सरकार का अधिकार है.
हाईकोर्ट की अहम टिप्पणियां
सभी पक्षो की बहस सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा अनुच्छेद 14 मनमाने कानूनों की अनुमति नहीं देता और कोई भी वर्गीकरण तभी वैध होगा जब उसका उद्देश्य से सीधा संबंध हो
केवल “संविदा” शब्द जोड़ देने से पद की प्रकृति नहीं बदल जाती.
कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि:
“जब नियमित और संविदा नियुक्ति में पद, योग्यता और कार्य समान हैं, तो आयु सीमा में भिन्नता असंवैधानिक है।”
खंडपीठ ने माना कि नियम 6, राजस्थान संविदा भर्ती नियम, 2022 इस कसौटी पर खरा नहीं उतरता और इसलिए उसे एएनएम पद के संदर्भ में असंवैधानिक घोषित किया गया।
21 वर्ष की आयु सीमा असंवैधानिक घोषित
हाईकोर्ट ने नियम 6 को आंशिक रूप से निरस्त करते हुए कहा कि एएनएम/महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता (संविदा) पद पर न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है
हालांकि कोर्ट ने नियम को पूरी तरह रद्द नहीं किया, बल्कि केवल एएनएम पद के संदर्भ में इसे असंवैधानिक माना।
हजारों अभ्यर्थियों को बड़ी राहत
राजस्थान हाईकोर्ट के इस फैसले से प्रदेश की 18 से 21 वर्ष आयु वर्ग की हजारों युवतियों को राहत मिलेगी.
भविष्य की संविदा भर्तियों में आयु सीमा पर पुनर्विचार होगा और पहले से बाहर किए गए योग्य अभ्यर्थियों के लिए अवसर खुल सकता है
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला राजस्थान की संविदा भर्ती नीति में मील का पत्थर साबित होगा।