जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने खेल सामग्री खरीद घोटाले के मामले में जेल में बंद बहरोड़ के पूर्व विधायक बलजीत यादव को राहत देने से इनकार कर दिया हैं.
जस्टिस रवि चिरानिया की एकलपीठ ने मंगलवार को जमानत याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश दिया हैं.
याचिकाकर्ता बलजीत यादव की ओर से अदालत में दलील दी गई कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) में दर्ज जिस मूल एफआईआर के आधार पर कार्रवाई की है, उस प्रकरण पर पहले से ही हाईकोर्ट की ओर से स्थगन (स्टे) आदेश जारी है।
याचिका में यह भी कहा गया कि पूरा मामला राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि पूर्व में एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की अध्यक्षता में गठित जांच समिति ने उन्हें क्लीन चिट दी थी।
याचिका में यह भी कहा गया कि लगभग तीन करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया गया है, जबकि संबंधित खेल सामग्री की वास्तविक आपूर्ति की गई थी। ऐसे में पूरी राशि के गबन का आरोप प्रथम दृष्टया सही नहीं माना जा सकता।
ईडी ने किया विरोध
ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) भरत व्यास ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी के निर्देश पर चार फर्मों को खेल सामग्री खरीद के टेंडर स्वीकृत किए गए।
एएसजी ने कहा कि इन फर्मों से बाजार मूल्य की तुलना में कई गुना अधिक कीमत पर सामग्री खरीदी गई।
ईडी ने यह भी आरोप लगाया कि जिन फर्मों को आपूर्ति का कार्य दिया गया, वे आरोपी के रिश्तेदारों या उनके परिचितों से जुड़ी हुई थीं।
दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी और पूर्व विधायक बलजीत यादव को राहत देने से इनकार कर दिया।
वर्ष 2021-22 का है मामला
गौरतलब है कि वर्ष 2021-22 में बहरोड़ विधानसभा क्षेत्र के लगभग 32 सरकारी विद्यालयों के लिए बैडमिंटन और क्रिकेट किट खरीदी गई थीं।
आरोप है कि विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (MLALAD Fund) से करीब तीन करोड़ रुपये खर्च कर खेल सामग्री की खरीद में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं और सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।
इसी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धनशोधन के आरोपों की जांच करते हुए फरवरी 2026 में पूर्व विधायक बलजीत यादव को गिरफ्तार किया था। वर्तमान में वह न्यायिक अभिरक्षा में जेल में हैं।
