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करोड़ों के साइबर फ्रॉड केस में आरोपियों की दूसरी जमानत याचिकाएं खारिज, हाईकोर्ट ने कहा-डिजिटल स्कैम साइबर अपराधों का सबसे खतरनाक रूप, आम लोगों के विश्वास को तोड़ रहे हैं

Rajasthan High Court Rejects Second Bail in Major Cyber Fraud Case, Issues Strong Warning on Digital Scams

हाईकोर्ट ने RBI और सरकार को दिए निर्देश, कहा-अब और कठोर कदम उठाना अनिवार्य

जयपुर, 31 जनवरी। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने एक बड़े और संगठित साइबर फ्रॉड मामले में दो आरोपियों की दूसरी जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए डिजिटल स्कैम को साइबर अपराधों का देश के लिए बेहद घातक रूप बताया है।

जस्टिस अनूप कुमार धंध की एकलपीठ ने अलवर निवासी 20 वर्षीय विवेक यादव और 28 वर्षीय करण यादव की दूसरी जमानत याचिकाओं को खारिज करते हुए मामले में आरबीआई, केंद्र सरकार और राज्य सरकार को निर्देश देते हुए कहा कि मामले में अब कठोर कदम उठाए जाएं।

हाईकोर्ट ने इन अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए बहु-आयामी (मल्टी-फेसिटेड) रणनीति अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

सबसे खतरनाक और कपटी अपराध

जस्टिस अनूप कुमार धंध की एकलपीठ ने जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि डिजिटल युग में साइबर अपराध सबसे खतरनाक और कपटी अपराधों में से एक बन चुके हैं और ऐसे मामलों में न्यायालय को अत्यधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।

हाईकोर्ट ने कहा कि—

“तेजी से बदलती तकनीक और डिजिटल क्रांति के इस दौर में डिजिटल स्कैम साइबर अपराधों का सबसे खतरनाक रूप बन चुके हैं। ये अपराध न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि आम लोगों के विश्वास को भी तोड़ते हैं।”

हाईकोर्ट ने इन अपराधों से निपटने के लिए प्रयासों को नाकाफी बताते हुए कहा कि साइबर अपराधों से निपटने के लिए केवल कानून ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि व्यापक जन-जागरूकता अभियान की आवश्यकता है।

लोगों को ऑनलाइन लेन-देन के दौरान सतर्क रहने, संदिग्ध कॉल्स और लिंक से बचने तथा तुरंत शिकायत दर्ज कराने के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए।

अधिक प्रयासों की जरूरत

राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने देश और दुनिया में बढ़ते साइबर अपराधों को लेकर कहा कि—

विश्व के विभिन्न देशों ने ऐसे अपराधों के जोखिम को कम करने के लिए कानून निर्माण, जन-जागरूकता अभियान, तकनीकी नवाचार तथा आपसी सहयोग जैसी पहलों को अपनाया है।”

कोर्ट ने कहा कि यद्यपि चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं, लेकिन स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए जा रहे निरंतर प्रयास यह संकेत देते हैं कि डिजिटल स्कैम जैसे अपराधों की व्यापकता और प्रभाव को कम करने की दिशा में एक सकारात्मक प्रगति हो रही है।

कोर्ट ने कहा कि—

“विभिन्न देशों के अनुभव और रणनीतियां साइबर अपराधों के विरुद्ध चल रही इस लड़ाई में महत्वपूर्ण सीख प्रदान करती हैं।”

कोर्ट ने कहा कि आम नागरिकों को ऐसे घोटालों से बचने के लिए आवश्यक ज्ञान और उपकरणों से सशक्त बनाना इस संघर्ष में सर्वोपरि महत्व रखता है।

सरकार अधिक प्रयास करे

हाईकोर्ट ने कहा कि यद्यपि सरकार द्वारा विभिन्न स्तरों पर कई कदम उठाए गए हैं, किंतु वर्तमान में उत्पन्न इस गंभीर और खतरनाक स्थिति पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सभी संबंधित पक्षों द्वारा और अधिक कठोर तथा ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।

“सरकार द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशा-निर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 लागू किए गए हैं, जिनका उद्देश्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ओटीटी प्लेटफॉर्म और डिजिटल न्यूज़ पोर्टलों की गतिविधियों को नियंत्रित करना तथा आपत्तिजनक व नुकसानदायक सूचनाओं के स्रोत का पता लगाना है।”

कंपनियां बेच रही हैं डेटा

कोर्ट ने कहा कि—

“यह भी सामने आया है कि कुछ सोशल मीडिया कंपनियों द्वारा उपयोगकर्ताओं का डेटा बेचा जा रहा है, जिसका दुरुपयोग आरोपी व्यक्तियों द्वारा निर्दोष जनता के विरुद्ध साइबर अपराध करने के लिए किया जा रहा है।

देश की बढ़ती तकनीकी प्रगति और डिजिटल पहुंच के साथ-साथ साइबर अपराधों में वृद्धि होना एक गंभीर संकेत है।”

“ऐसे सभी दोषियों के विरुद्ध, जिनमें वे कंपनियां भी शामिल हैं जो नागरिकों का डेटा बेच रही हैं और जिसके कारण साइबर अपराध हो रहे हैं, कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।”

कोर्ट ने कहा कि निर्दोष नागरिकों की मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने के लिए एक मजबूत और प्रभावी तंत्र विकसित किया जाना अत्यंत आवश्यक है।

जागरूकता अभियान

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि—

“अब समय आ गया है कि प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया, टेलीविजन और एफएम रेडियो के माध्यम से व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि हर समय लोगों को ऑनलाइन लेन-देन के दौरान सतर्क रहने के लिए जागरूक किया जा सके।”

“साइबर धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए, न कि जटिल, ताकि पीड़ित तुरंत शिकायत दर्ज करा सकें और सभी संबंधित संस्थाएं मिलकर पीड़ितों की धनराशि को सुरक्षित करने का हर संभव प्रयास करें।”

आरबीआई को निर्देश

कोर्ट ने कहा कि—

“भारतीय रिज़र्व बैंक के 06 जुलाई 2017 के परिपत्र के अनुसार, सभी बैंकों का यह दायित्व है कि वे अपने ग्राहकों को 24×7 शिकायत दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध कराएं—चाहे वह वेबसाइट, फोन बैंकिंग, एसएमएस, ई-मेल, आईवीआर, टोल-फ्री हेल्पलाइन या शाखा के माध्यम से हो।”

यदि किसी खाते में अनधिकृत लेन-देन की सूचना दी जाती है, तो बैंक यह सुनिश्चित करने के लिए बाध्य हैं कि उस खाते में आगे कोई भी अनधिकृत लेन-देन न हो।”

हाईकोर्ट ने इस आदेश की प्रति केंद्र एवं राज्य सरकार के वित्त मंत्रालय, गृह मंत्रालय, राजस्थान के पुलिस महानिदेशक तथा भारतीय रिज़र्व बैंक को भेजने के आदेश दिए हैं, ताकि आवश्यक अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके और आम नागरिकों तथा ग्राहकों की मेहनत की कमाई की सुरक्षा हेतु और अधिक प्रभावी कदम उठाए जा सकें।

क्या है मामला

अलवर निवासी विवेक यादव (20 वर्ष) और करण यादव (28 वर्ष) द्वारा हाईकोर्ट में दूसरी जमानत याचिकाएं दायर की गई थीं।

सुनवाई के दौरान सामने आया कि दोनों आरोपी वर्तमान में केंद्रीय कारागार, अलवर में न्यायिक हिरासत में हैं। इससे पहले इनकी पहली जमानत याचिकाएं 13 अक्टूबर 2025 को खारिज की जा चुकी थीं, हालांकि तब जांच पूर्ण होने के बाद पुनः आवेदन करने की छूट दी गई थी।

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि विवेक यादव के बैंक खातों से जुड़े कुल 9 साइबर फ्रॉड मामलों की जांच में यह सामने आया कि फरवरी 2024 से अगस्त 2025 के बीच उसके खातों से लगभग 2 करोड़ 27 लाख रुपये से अधिक की संदिग्ध ऑनलाइन लेन-देन हुई।

वहीं, करण यादव के खिलाफ 7 साइबर शिकायतें दर्ज पाई गईं, जिनमें करीब 14 लाख रुपये की धोखाधड़ी सामने आई। जांच के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि 2024 से पहले दोनों आरोपियों के खातों में इस प्रकार की भारी-भरकम वित्तीय गतिविधियां नहीं थीं।

बचाव पक्ष की दलीलें

आरोपियों की ओर से यह तर्क दिया गया कि जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। साथ ही, उनका दावा था कि वे मुख्य आरोपी नहीं हैं और उनके बैंक खातों का दुरुपयोग किसी अन्य सह-आरोपी द्वारा किया गया।

बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपियों का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और मामला मजिस्ट्रेट ट्रायल है, इसलिए उन्हें जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए।

अदालत की सख्त टिप्पणी

इन दलीलों को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर यह तय करना संभव नहीं है कि आरोपी निर्दोष हैं या उनके खातों का दुरुपयोग हुआ।

कोर्ट ने कहा कि ये तथ्य परीक्षण के दौरान साक्ष्यों के आधार पर तय होंगे। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत के चरण में विस्तृत साक्ष्य मूल्यांकन न्यायसंगत नहीं है, लेकिन प्रथम दृष्टया मामला गंभीर और संगठित अपराध का प्रतीत होता है।

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