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जहां वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध हों, वहां अवमानना को निष्पादन का औजार नहीं बनाया जा सकता, याचिकाकर्ताओं पर ₹1 लाख का जुर्माना

Rajasthan High Court Dismisses Second Contempt Petition on Pasture Land Encroachment, Imposes ₹1 Lakh Cost

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने चरागाह (पशुचारण) भूमि से अतिक्रमण हटाने से जुड़े एक पुराने मामले में दायर दूसरी अवमानना याचिका को सख्त टिप्पणी के साथ खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया है.

जस्टिस सुदेश बंसल और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा हैं कि अवमानना कार्यवाही का उद्देश्य आदेश का “निष्पादन” (execution) कराना नहीं है।

हाईकोर्ट ने कहा हैं कि सुप्रीम कोर्ट के स्थापित सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा गया कि जहां वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध हों, वहां अवमानना को निष्पादन का औजार नहीं बनाया जा सकता।

हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 91 स्वयं में पूर्ण संहिता है, जिसमें नोटिस, बेदखली, जुर्माना, ध्वस्तीकरण और अपील/स्थगन की व्यवस्था है। इसलिए यदि किसी को क्रियान्वयन से शिकायत है, तो उसे उसी वैधानिक प्रक्रिया के तहत उपाय अपनाने चाहिए, न कि बार-बार अवमानना याचिका दायर कर।

ये हैं मामला

झुंझुनूं जिले के अजीतपुरा और नुनिया गोठड़ा गांवों की चरागाह व सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण के मामले में याचिकाकर्ताओं ने 2022 में जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 91 के तहत तहसीलदार द्वारा पारित बेदखली आदेशों का पालन नहीं हुआ।

23 मई 2022 को हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यदि बेदखली आदेश अंतिम हो चुके हैं और उन पर कोई अंतरिम रोक नहीं है, तो उनका कानून के अनुसार क्रियान्वयन अनिवार्य है।

पहली अवमानना खारिज

याचिकाकर्ताओं ने आदेश की पालना नहीं करने आरोप लगाते हुए पहले भी अवमानना याचिका दायर की थी, जिसे 11 मार्च 2024 को खारिज कर दिया गया था।

कोर्ट ने तब कहा था कि जानबूझकर (willful) अवहेलना सिद्ध नहीं होती। इसके बावजूद याचिकाकर्ताओं ने दूसरी अवमानना याचिका दाखिल की।

याचिका का विरोध

प्रभावित लोगों की ओर से पैरवी करते हुए एडवोकेट मोहित बलवदा व सुनील शेखावत ने दलील दी कि इस मामले में तथ्य छुपाकर अवमानना याचिका लगाई गई है।

सरकार का पक्ष

राज्य सरकार की ओर से पेश अनुपालन रिपोर्ट में बताया गया कि कुल 149 कथित अतिक्रमणकर्ताओं के विरुद्ध धारा 91 की कार्रवाई हुई।

इनमें से 114 लोगों ने बेदखली आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिनके मामलों में आवासीय निर्माण को लेकर अंतरिम रोक प्रभावी है।

सरकार ने यह भी कहा कि गैर-आवासीय क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाया जा चुका है और कुल 11,412 वर्ग मीटर में से 8,038 वर्ग मीटर क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त किया गया है।

जिन आवासीय हिस्सों पर अंतरिम रोक है, वहां कार्रवाई न्यायिक आदेशों के कारण लंबित है

₹1 लाख का जुर्माना क्यों

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि दूसरी अवमानना याचिका पहली के खारिज होने के बावजूद दायर की गई और इसका उद्देश्य वस्तुतः बेदखली आदेशों का निष्पादन करवाना था।

इसे प्रक्रिया का दुरुपयोग मानते हुए याचिकाकर्ताओं पर ₹1 लाख का संयुक्त जुर्माना लगाया गया।

हाईकोर्ट ने कहा कि अवमानना सिद्ध करने के लिए जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण अवहेलना आवश्यक है। यहां तथ्यों को लेकर विवादित प्रश्न हैं—कौन सा निर्माण खातीदारी भूमि में है और कौन सा चरागाह में—जिनका निपटारा अवमानना की सीमित कार्यवाही में नहीं किया जा सकता।

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