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फैसला सुरक्षित रखने के 15 दिन बाद मिले नए तथ्यों पर हाईकोर्ट ने लिया बड़ा फैसला, सुरक्षित रखे गए फैसले को किया रिलीज, फिर से शुरू होगी सुनवाई

Rajasthan High Court Releases Reserved Judgment, Orders Fresh Hearing on Contract Employees’ Case

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने संविदा/अस्थायी कर्मचारियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुरक्षित रखने के बाद मिले नए तथ्यों के आधार पर मामले को सुरक्षित रखे गए फैसले की श्रेणी से रिलीज करते हुए फिर से सुनवाई के लिए बहाल कर दिया है।

जस्टिस पुष्पेन्द्र सिंह भाटी और जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ ने विकास शर्मा व अन्य की ओर से दायर विशेष अपील पर यह आदेश दिया है।

हाईकोर्ट ने पूर्व में सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद 15 अक्टूबर 2025 को फैसला सुरक्षित रखा था।

फैसला सुरक्षित रखे जाने के 15 दिन बाद ही 31 अक्टूबर 2025 को याचिकाकर्ताओं ने एक अतिरिक्त (एडिशनल) एफिडेविट पेश कर मामले में मिले नए तथ्यों को शामिल करने का अनुरोध किया।

क्या है पूरा मामला

याचिकाकर्ता विकास मिश्रा सहित अन्य अपीलकर्ताओं ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों के विरुद्ध विशेष अपील दायर कर संविदा कर्मचारियों से जुड़े अधिकारों, निरंतर सेवा और प्रतिस्थापन जैसे मुद्दों को चुनौती दी थी।

राज्य की ओर से पूर्व में यह दलील दी गई थी कि याचिकाकर्ताओं को हटाकर किसी अन्य संविदा या अनुबंधित कर्मचारी को नियुक्त नहीं किया जाएगा।

मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने 15 अक्टूबर 2025 को फैसला सुरक्षित रखा था.

आम तौर पर इस अवस्था के बाद अदालत केवल रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री के आधार पर ही फैसला सुनाती है, लेकिन इस प्रकरण में असाधारण परिस्थिति सामने आई।

नए दस्तावेज़ों से उठा विवाद

अधिवक्ता तनवीर अहमद ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि फैसला सुरक्षित रखे जाने के बाद याचिकाकर्ताओं को 30 मई 2025 का एक कार्यालय आदेश प्राप्त हुआ है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि संबंधित विभाग में सिविल डिफेंस कर्मचारियों सहित सभी कर्मचारियों को कार्यालय में उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए थे।

इसके अतिरिक्त, सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत 21 अप्रैल 2025 को प्राप्त सूची में जिन व्यक्तियों के नाम दर्ज हैं, वे वर्तमान में भी प्रतिवादी विभाग के साथ कार्यरत बताए गए हैं।

अधिवक्ता ने कहा कि फैसला सुरक्षित रखे जाने के बाद 03 सितंबर 2025 की भुगतान स्वीकृति (पेमेंट सैंक्शन) और कंटिन्जेंट बिलों की प्रतियां प्राप्त हुई हैं, जिसमें प्रथम दृष्टया यह संकेत मिलता है कि विभाग द्वारा संविदा/अनुबंध पर कार्यरत कर्मचारियों को नियमित रूप से भुगतान किया जा रहा है।

अधिवक्ता ने कहा कि यह स्थिति सरकार की उस पूर्व दलील के विपरीत है, जिसमें कहा गया था कि याचिकाकर्ताओं को हटाकर किसी अन्य संविदा कर्मी से प्रतिस्थापित नहीं किया जाएगा।

हाईकोर्ट की टिप्पणी

बहस सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि अतिरिक्त शपथपत्र के साथ संलग्न दस्तावेज़ मामले के मेरिट्स पर प्रत्यक्ष और महत्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं।

चूंकि प्रतिवादी पक्ष को इन नए तथ्यों और दस्तावेज़ों पर जवाब देने का अवसर अभी नहीं मिला है, इसलिए न्यायहित में मामले की पुनः सुनवाई आवश्यक है।

हाईकोर्ट ने यह भी स्वीकार किया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा बताए अनुसार ये दस्तावेज़ बहस समाप्त होने और फैसला सुरक्षित होने के बाद ही उपलब्ध हो पाए, ऐसे में अतिरिक्त शपथपत्र दाखिल करना अपरिहार्य था।

“जजमेंट रिज़र्व्ड” श्रेणी से हटाया

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले में पेश किए गए नए तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए पूर्व में पारित किए गए “जजमेंट रिज़र्व्ड” की श्रेणी से मामले को मुक्त करने का फैसला किया।

हाईकोर्ट ने इसके साथ ही मामले की पूर्ण सुनवाई के लिए उचित बेंच के समक्ष सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।

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