हाईकोर्ट ने कहा शर्तों का पालन नहीं किया गया तो निचली अदालत द्वारा इसकी सूचना हाईकोर्ट को दी जाएगी।
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने 37 साल पुराने एक बेदखली के मुकदमे को बहाल करने के लिए अनोखी शर्त रखी है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की याचिका को स्वीकार करते हुए सार्वजनिक स्थान पर 25 छायादार पौधे लगाने और उनकी देखभाल का शपथपत्र पेश करने का आदेश दिया है।
इसके साथ ही प्रतिवादीगण को 10 हजार रुपये की लागत अदा करने का आदेश दिया है।
जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने 37 वर्ष पुराने एक दीवानी मुकदमे से जुड़े मामले में निचली अदालत के आदेश को निरस्त करते हुए वाद को पुनः बहाल करने का आदेश देते हुए यह शर्त रखी है।
साथ ही राजस्थान हाईकोर्ट ने इस महत्वपूर्ण फैसले में यह भी स्पष्ट किया है कि केवल मामूली और संतोषजनक रूप से समझाई गई देरी के आधार पर किसी मुकदमे की बहाली से इनकार करना न्यायसंगत नहीं है।
वर्ष 1989 का मामला
यह मामला वर्ष 1989 में दायर एक बेदखली एवं मेस्ने प्रॉफिट (क्षतिपूर्ति) के वाद से जुड़ा है, जिसमें वादीगण ने प्रतिवादियों के खिलाफ मुकदमा दायर किया था।
प्रारंभिक कार्यवाही पूर्ण होने के बाद वर्ष 1994 में मुद्दे तय किए गए और इसके बाद वाद साक्ष्य के चरण में पहुँचा।
हालांकि, 21 सितंबर 2010 को मामले की सुनवाई के दौरान एक तारीख को लेकर हुई त्रुटि के कारण वादीगण अदालत में उपस्थित नहीं हो सके, जिसके चलते 25 अक्टूबर 2010 को वाद को डिफॉल्ट में खारिज कर दिया गया।
याचिका में दलील
याचिकाकर्ता वादीगण की ओर से यह दलील दी गई कि अदालत द्वारा तय अगली तारीख 25 अक्टूबर 2010 थी, लेकिन अनजाने में डायरी में 25 नवंबर 2010 अंकित हो गई।
इसी भूल के कारण वे नियत तिथि पर उपस्थित नहीं हो पाए।
इसके पश्चात वाद की बहाली के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 9 नियम 9 के तहत आवेदन प्रस्तुत किया गया, साथ ही सीमा अधिनियम की धारा 5 के अंतर्गत देरी माफ करने का भी अनुरोध किया गया।
निचली अदालत ने यह कहते हुए बहाली आवेदन खारिज कर दिया कि निर्धारित अवधि के भीतर आवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया और देरी के लिए पर्याप्त कारण नहीं बताया गया।
इसी आदेश को चुनौती देते हुए वादीगण हाईकोर्ट पहुँचे।
गलत तारीख अंकित होना
राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा कि देरी अत्यधिक या घातक नहीं थी।
वादीगण द्वारा दी गई वजह — गलत तारीख अंकित होना और संबंधित अवधि में शहर से बाहर होना — को हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया संतोषजनक माना।
हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में न्याय का मूल उद्देश्य तकनीकी आधारों के बजाय वास्तविक विवाद का निस्तारण होना चाहिए।
साक्ष्यों के आधार पर तय
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यह मुकदमा वर्ष 1989 से लंबित है और इसमें बेदखली जैसे महत्वपूर्ण अधिकारों का प्रश्न जुड़ा हुआ है, जिसे साक्ष्यों के आधार पर तय किया जाना आवश्यक है।
ऐसे में, मात्र तकनीकी कारणों से वाद को समाप्त करना उचित नहीं होगा।
हाईकोर्ट ने वाद को उसके मूल क्रमांक पर बहाल करते हुए सभी पक्षकारों को 16 फरवरी को ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेश होने के आदेश दिए हैं।
25 छायादार पौधे लगाने की शर्त
राजस्थान हाईकोर्ट ने सशर्त निचली अदालत के आदेश को रद्द करते हुए वाद को उसके मूल क्रमांक पर बहाल कर सुनवाई के आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को आदेश दिया है कि वे प्रतिवादीगण को 10 हजार रुपये की लागत अदा करेंगे।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को सार्वजनिक स्थान पर छायादार प्रजाति के 25 पौधे लगाने की शर्त रखी है।
याचिकाकर्ता को पौधारोपण से संबंधित फोटो और प्रमाण निचली अदालत में प्रस्तुत करने तथा यह शपथपत्र देने का भी आदेश दिया गया है कि वे इन पौधों की देखरेख करेंगे, ताकि वे पूर्ण रूप से विकसित हो सकें।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि इन शर्तों का पालन नहीं किया गया, तो निचली अदालत द्वारा इसकी सूचना हाईकोर्ट को दी जाएगी।
#Justice Anoop Kumar Dhand #RajasthanHighCourt #EvictionCase #DelayCondonation #TreePlantation #EnvironmentalJustice