जयपुर, 7 नवंबर।
राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ ने राज्य के आईटी विभाग के राजकॉम्प में करोड़ों रुपये के घोटाले पर ACB की निष्क्रियता पर सख्त रुख अपनाते हुए कार्मिक विभाग के सचिव, सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के सचिव और ACB महानिदेशक को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है।
याचिका पर सुनवाई के दौरान संस्था की ओर से अधिवक्ता पूनम चंद भंडारी ने अदालत को बताया कि राजकॉम्प के अधिकारी आर.सी. शर्मा, तपन कुमार, कौशल और सुरेश गुप्ता ने मिलीभगत कर सरकारी प्रोजेक्ट्स में भारी गड़बड़ी की और अपनी पसंदीदा फर्मों को करोड़ों रुपये का लाभ पहुंचाया।
याचिका में बताया गया कि लीगल मेट्रोलॉजी प्रोजेक्ट में दो व्यक्तियों को अस्थायी नियुक्ति दी गई थी, जिन्हें अनुचित रूप से व्हाइटनर लगाकर मार्च 2022 तक कार्यकाल बढ़ाया गया।
इसी प्रकार, ईपीडीएस प्रोजेक्ट में लिंकवेल कंपनी ने उदयपुर जिला रसद अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षरों से कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र बनाकर करोड़ों रुपये का भुगतान उठा लिया।
याचिका में कहा गया कि एनालॉजिक्स कंपनी ने टोंक जिले में भी इसी तरह के फर्जी दस्तावेजों से भुगतान प्राप्त किया।
याचिका में बताया गया कि मामले में डॉ. टी.एन. शर्मा ने कई बार ACB में शिकायतें कीं, लेकिन कार्रवाई के बजाय ACB ने भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 17-ए का हवाला देकर जांच की स्वीकृति के लिए फाइल भेज दी।
अधिवक्ता भंडारी ने कहा कि यह धारा केवल नीति-संबंधी मामलों पर लागू होती है, न कि ऐसे स्पष्ट भ्रष्टाचार के मामलों पर।
हाईकोर्ट ने ACB की इस कार्यशैली पर गंभीर टिप्पणी करते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है और कहा है कि यदि मामला प्रारंभिक जांच में सही पाया जाता है, तो दोषी अधिकारियों और फर्मों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।