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पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय में कुलपति सुमंत व्यास की नियुक्ति विवाद, हाईकोर्ट ने चांसलर व सरकार से मांगा जवाब

Rajasthan High Court Seeks Reply Over Appointment of RAJUVAS Vice-Chancellor Dr. Sumant Vyas

जयपुर। राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर में कुलपति पद पर हुई नियुक्ति को लेकर मामला अब राजस्थान हाईकोर्ट पहुंच गया है।

डॉ. सुमंत व्यास की कुलपति पद पर नियुक्ति को चुनौती देते हुए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय के चांसलर, रजिस्ट्रार, राज्य सरकार और स्वयं डॉ. सुमंत व्यास को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

यह आदेश हाईकोर्ट में जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने डॉ. आर.के. बघेरवाल की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अ

हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों से पूछा है कि नियुक्ति प्रक्रिया में अपनाई गई प्रक्रिया और नियमों के पालन को लेकर उनका क्या पक्ष है।

क्या है विवाद?

याचिकाकर्ता डॉ. आर.के. बघेरवाल की ओर से अधिवक्ता दिनेश यादव ने अदालत में तर्क दिया कि विश्वविद्यालय के चांसलर ने 23 अप्रैल को कुलपति की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी का गठन किया था।

इसके बाद 3 मई को कुलपति पद के लिए विज्ञापन जारी किया गया और 4 सितंबर को डॉ. सुमंत व्यास को कुलपति नियुक्त कर दिया गया।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि सर्च कमेटी का गठन ही नियमों के विरुद्ध किया गया। यूजीसी की गाइडलाइन के अनुसार विश्वविद्यालय से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा कोई भी व्यक्ति सर्च कमेटी का सदस्य नहीं हो सकता, ताकि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी रहे।

लेकिन याचिका में कहा गया है कि सर्च कमेटी का अध्यक्ष त्रिभुवन शर्मा को बनाया गया, जो पूर्व में विश्वविद्यालय के पशु पोषण विभाग में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष रह चुके हैं।

ऐसे में उनका विश्वविद्यालय से जुड़ाव स्पष्ट है और यह यूजीसी के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।

अनुभव को लेकर भी उठे सवाल

याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि कुलपति पद पर नियुक्ति के लिए कम से कम दस वर्ष का शैक्षणिक/अध्यापन अनुभव अनिवार्य है। जबकि डॉ. सुमंत व्यास के पास निर्धारित दस वर्ष का शिक्षण अनुभव नहीं है।

याचिका में कहा गया है कि जब सर्च कमेटी का गठन ही नियमों के विपरीत हुआ है, तो उसके द्वारा की गई सिफारिश और चयन प्रक्रिया भी स्वतः अवैध हो जाती है। ऐसे में डॉ. सुमंत व्यास की नियुक्ति को निरस्त किया जाना चाहिए।

हाईकोर्ट का रुख

प्राथमिक सुनवाई के बाद जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं। अदालत ने विश्वविद्यालय प्रशासन, चांसलर, राज्य सरकार और नियुक्त कुलपति से जवाब प्रस्तुत करने को कहा है।

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