हाईकोर्ट ने कहा- केवल सेवा पुस्तिका में टिप्पणी दर्ज कर देना, किसी कर्मचारी को दंडित करने का वैध तरीका नहीं है।
जयपुर। Rajasthan HighCourt ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी भी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ बिना चार्जशीट, बिना विभागीय जांच और बिना सुनवाई के दंडात्मक प्रविष्टि दर्ज करना न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का भी उल्लंघन है।
Rajasthan HighCourt जयपुर पीठ में जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने दौसा की महवा नगरपालिका के एक कर्मचारी टीकम सिंह को बड़ी राहत देते हुए उसकी सेवा पुस्तिका में की गई अवैध और मनमानी प्रविष्टियों को निरस्त करते हुए यह आदेश दिया है।
हाईकोर्ट की फटकार के बाद 15 दिसंबर को ही डीएलबी निदेशक ने कर्मचारी को बहाल करने की जानकारी अदालत को दे दी. जिसके बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता कर्मचारी को समस्त सेवालाभ के साथ बहाली के आदेश दिए हैं.
दंडित करने का वैध तरीका नहीं
Rajasthan HighCourt ने अपने आदेश में कहा कि सेवा नियमों और राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के तहत बिना विधिवत प्रक्रिया अपनाए कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती।
Rajasthan HighCourt ने कहा कि केवल सेवा पुस्तिका में टिप्पणी दर्ज कर देना किसी कर्मचारी को दंडित करने का वैध तरीका नहीं है।
इसके साथ ही याचिका का निस्तारण करते हुए हाईकोर्ट ने यह संदेश भी दिया कि प्रशासनिक अधिकारियों को अधिकारों का प्रयोग करते समय कानून और न्याय के दायरे में रहना होगा।
पुनः बहाली के आदेश
HighCourt ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता अब अपनी पूर्व स्थिति में बहाल माना जाएगा और उसे सभी परिणामी लाभ दिए जाएंगे।
एकलपीठ ने इसके साथ ही याचिकाकर्ता टीकम सिंह की सेवा पुस्तिका में दर्ज की गई 12 अगस्त, 14 अक्टूबर और 18 अक्टूबर 2024 की प्रतिकूल प्रविष्टियों को हटाने का आदेश दिया है।
इन प्रविष्टियों के आधार पर न केवल उनकी सेवा प्रभावित की गई, बल्कि उन्हें कार्यालय में प्रवेश से भी रोक दिया गया और निलंबन जैसी स्थिति बना दी गई।
ये है मामला
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता तनवीर अहमद ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता टीकम सिंह को वर्ष 2018 में सफाई कर्मचारी के पद पर नियुक्त किया गया था और वर्ष 2020 में उनकी सेवा की पुष्टि भी कर दी गई थी।
लेकिन वर्ष 2021 में उसे महवा नगरपालिका में ट्रांसफर कर दिया गया।
इसके बाद 2024 में निलंबन आदेश, वेतन रोकने, वार्षिक वेतन वृद्धि (AGI) रोकने और सेवा समाप्ति से जुड़े कई आदेश जारी हुए, जिनमें से अधिकांश उन्हें न तो सही तरीके से उपलब्ध कराए गए और न ही किसी वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया।
भ्रष्टाचार में शामिल नहीं होने पर मिली सजा
अधिवक्ता ने कहा कि याचिकाकर्ता कर्मचारी के खिलाफ न तो कोई चार्जशीट सही तरीके से दी गई और न ही कोई जांच बैठाई गई।
अधिवक्ता ने कहा कि सेवा पुस्तिका में दर्ज कई आदेशों के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई।
याचिका में यह भी कहा गया कि RTI के माध्यम से भी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई और कई आदेशों की एंट्री गलत तरीके से दर्ज दिखाई दी।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी सुरेंद्र कुमार मीणा द्वारा मनमाने ढंग से कार्रवाई की गई और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने से इंकार करने पर उन्हें लगातार प्रताड़ित किया गया।
मामले में 10 अक्टूबर 2025 को सुनवाई के दौरान डायरेक्टर एलबी को हाईकोर्ट ने आदेश दिए थे, लेकिन उनकी पालना नहीं की गई।
EO को किया निलंबित
राजस्थान हाईकोर्ट में मामले का खुलासा होने के बाद कोर्ट ने डीएलबी निदेशक को कोर्ट में तलब किया था।
15 दिसंबर को कोर्ट में पेश हुए डीएलबी निदेशक ने हाईकोर्ट को जानकारी दी थी कि इस मामले में याचिकाकर्ता को सेवा से हटाने वाले तत्कालीन EO सुरेंद्र मीणा को निलंबित कर दिया गया है।
सरकार ने EO के निलंबन के आदेश कोर्ट के सामने पेश किए।
DLB निदेशक ने कोर्ट में स्वीकार किया है कि महवा नगरपालिका में कार्यरत कर्मचारी टीकम सिंह की सेवा से जुड़ा रिकॉर्ड ही मौजूद नहीं है।