जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले के जरिए हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए सात आरोपियों की सजा को अपील लंबित रहने तक निलंबित कर दिया हैं.
हाईकोर्ट ने अपने विस्तृत फैसले कहा कि अपीलों की सुनवाई में समय लगने की संभावना है और उपलब्ध रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया यह सामने आता है कि मृतक को लगी घातक गोली का आरोप सीधे इन आरोपियों पर नहीं है।
हाईकोर्ट ने इसी आधार पर सजा स्थगित करते हुए आरोपियों को निर्धारित शर्तों के साथ जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने गजवीरसिंह व अन्य की ओर से दायर अपीलों पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया है.
हत्या के मामले हुई सजा
सीकर में हुई एक हत्या के मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, दांतरामगढ़ (सीकर) ने 30 अगस्त 2025 को फैसला सुनाते हुए सात आरोपियों को हत्या सहित अन्य धाराओं में दोषी ठहराया था.
अदालत ने आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/149 के तहत आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी थी।
इसके अलावा धारा 323/149 के तहत एक वर्ष का साधारण कारावास तथा धारा 341 के तहत एक माह का साधारण कारावास भी दिया गया था। सभी सजाएं साथ-साथ चलने का आदेश दिया गया था।
दोषसिद्धि के खिलाफ आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर करते हुए सजा निलंबित करने की मांग की थी।
अपील में दलीलें
दोषियों की ओर से दायर कि गयी अपील में दलील दी गयी कि मामले में मृतक को लगी घातक गोली का आरोप सह-आरोपी पर है और जिन आरोपियों ने सजा निलंबन की मांग की है, उनके खिलाफ प्रत्यक्ष रूप से घातक चोट का आरोप नहीं है।
साथ ही यह भी बताया गया कि सभी आरोपी ट्रायल के दौरान जमानत पर थे और उन्होंने जमानत की शर्तों का कभी उल्लंघन नहीं किया।
सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने सजा निलंबन की मांग का विरोध किया और अदालत से अर्जियां खारिज करने का आग्रह किया।
हाईकोर्ट का फैसला
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद उपलब्ध रिकॉर्ड का अध्ययन किया और पाया कि मामले में मृतक कंवरराज सिंह को कुल चार चोटें आई थीं, जिनमें एक गोली का घाव और तीन अन्य चोटें थीं।
हाईकोर्ट ने कहा कि उपलब्ध सामग्री के अनुसार गोली की घातक चोट इन आवेदकों को नहीं बल्कि सह-आरोपी को आरोपित की गई है।
हाईकोर्ट ने यह भी माना कि आपराधिक अपीलों की अंतिम सुनवाई में पर्याप्त समय लग सकता है। ऐसे मामलों में यदि आरोपियों का आचरण ट्रायल के दौरान संतोषजनक रहा हो और उनके खिलाफ प्रत्यक्ष रूप से घातक चोट का आरोप न हो, तो सजा निलंबन पर विचार किया जा सकता है। इसी आधार पर अदालत ने सजा निलंबन की अर्जियां स्वीकार करते हुए सभी सात आरोपियों की सजा को अपील लंबित रहने तक निलंबित कर दिया।
किन आरोपियों को मिला लाभ
अदालत के आदेश से जिन आरोपियों को राहत मिली उनमें गजवीर सिंह, देवेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, मैना कंवर, कृष्ण देवराज सिंह उर्फ नंद सिंह, हिम्मत सिंह और जितेंद्र सिंह उर्फ आलू शामिल हैं। इन सभी को अपील के निस्तारण तक जमानत पर रिहा करने का रास्ता साफ हो गया है, बशर्ते वे ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि के अनुसार जमानती बांड प्रस्तुत करें।