हाईकोर्ट ने कहा पात्रता और आरक्षण का दावा आवेदन की अंतिम तिथि तक उपलब्ध वैध दस्तावेज़ों के आधार पर ही किया जा सकता है
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने अनुसूचित जाति (महिला) श्रेणी में आरक्षण का लाभ न मिलने से जुड़ी एक याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि आरक्षण का लाभ पाने के लिए अभ्यर्थी को विज्ञापन में निर्धारित शर्तों और समयसीमा के अनुसार वैध जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमों का पालन न होने की स्थिति में कोर्ट कोई राहत नहीं दे सकता।
जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश याचिकाकर्ता चंचल वर्मा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया हैं.
याचिका में चंचल वर्मा ने जूनियर अकाउंटेंट पद पर नियुक्ति का लाभ न दिए जाने को चुनौती दी थी
क्या था पूरा मामला
याचिकाकर्ता चंचल वर्मा मूल रूप से मध्यप्रदेश की निवासी हैं और ‘कोली’ समुदाय से संबंध रखती हैं, जिसे मध्यप्रदेश और राजस्थान—दोनों राज्यों में अनुसूचित जाति के रूप में मान्यता प्राप्त है।
याचिकाकर्ता ने 1/4 दिसंबर 2010 के विज्ञापन के अनुसार राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड द्वारा निकाली गई जूनियर अकाउंटेंट भर्ती में अनुसूचित जाति (महिला) श्रेणी में आवेदन किया.
भर्ती प्रक्रिया में उन्होंने कट-ऑफ से अधिक अंक अर्जित किए और दस्तावेज़ सत्यापन के लिए बुलाया गया।
याचिकाकर्ता का कहना था कि उन्होंने मध्यप्रदेश और राजस्थान—दोनों राज्यों से जारी जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए, इसके बावजूद उन्हें नियुक्ति का लाभ नहीं दिया गया, जबकि उनसे कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति दे दी गई।
विवाद की मुख्य वजह
भर्ती विज्ञापन में स्पष्ट शर्त थी कि विवाहित अनुसूचित जाति/जनजाति महिला अभ्यर्थियों को जाति प्रमाण पत्र पिता/माता के नाम व निवास के आधार पर प्रस्तुत करना होगा, न कि पति के नाम से।
दस्तावेज़ सत्यापन के समय याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत राजस्थान का जाति प्रमाण पत्र पति के नाम और निवास पर आधारित था।
बाद में याचिकाकर्ता ने पिता के नाम से नया जाति प्रमाण पत्र बनवाया, लेकिन वह प्रमाण पत्र निर्धारित कट-ऑफ तिथि के बाद जारी हुआ था।
हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
हाईकोर्ट ने कहा कि भर्ती विज्ञापन की शर्तें सभी अभ्यर्थियों पर समान रूप से लागू होती हैं
पात्रता और आरक्षण का दावा आवेदन की अंतिम तिथि तक उपलब्ध वैध दस्तावेज़ों के आधार पर ही किया जा सकता है
बाद में प्राप्त किए गए प्रमाण पत्रों के आधार पर नियुक्ति का अधिकार उत्पन्न नहीं होता
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय Sakshi Arha बनाम राजस्थान हाईकोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि आरक्षण का लाभ पाने के लिए प्रासंगिक तिथि तक सभी आवश्यक दस्तावेज़ होना अनिवार्य है।
अंतरराज्यीय विवाह पर
याचिकाकर्ता की ओर से यह तर्क दिया गया कि विवाह के कारण राज्य परिवर्तन होने से महिला का अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त नहीं हो सकता।
इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिद्धांत रूप में यह बात सही है, लेकिन आरक्षण का लाभ तभी मिलेगा जब प्रमाण पत्र विज्ञापन में निर्धारित प्रारूप और समयसीमा के अनुरूप हो।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि याचिकाकर्ता ने विज्ञापन की शर्तों को कभी चुनौती नहीं दी, बल्कि उन्हीं शर्तों के तहत राहत की मांग की।
सभी पक्षो को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता के पास आवेदन की अंतिम तिथि और दस्तावेज़ सत्यापन की तिथि तक वैध जाति प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं था
भर्ती प्राधिकरण द्वारा कोई मनमानी या नियम विरुद्ध कार्रवाई नहीं की गई इसलिए कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इसमें हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।