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स्कूल परीक्षा परिणाम के आधार पर प्रिंसिपल के खिलाफ कार्रवाई पर रोक, हाईकोर्ट के आदेश की पालना नहीं करने पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक को फटकार

Rajasthan High Court Pulls Up Secondary Education Director for Non-Compliance of Order in Principal Salary Case

अगली सुनवाई तक आदेश की पालना नहीं होने पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक को होना होगा कोर्ट में पेश

जयपुर। स्कूल के परीक्षा परिणाम के आधार पर प्रिंसिपल के खिलाफ कार्रवाई के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता प्रिंसिपल के खिलाफ जुलाई 2021 में दो वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने के निदेशक के आदेश को रद्द कर दिया था।

हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद याचिकाकर्ता प्रिंसिपल को रोकी हुई वेतनवृद्धि रिलीज नहीं करने पर अब हाईकोर्ट ने अधिकारियों को 20 फरवरी तक का समय दिया है।

हाईकोर्ट ने चेतावनी दी है कि 20 फरवरी तक कोर्ट आदेशों की पालना में रोकी हुई एक वार्षिक वेतन वृद्धि का भुगतान नहीं करने पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक को कोर्ट में पेश होना होगा।

यह आदेश जस्टिस आनंद शर्मा ने याचिकाकर्ता महेन्द्र तिवाड़ी की ओर से दायर सिविल अवमानना याचिका पर दिया है।

ये है मामला

अधिवक्ता विजय पाठक ने बताया कि याचिकाकर्ता प्रिंसिपल जयपुर जिले के राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल, रामनगर कोटखावदा से प्रिंसिपल के पद से सितंबर 2022 में सेवानिवृत्त हुए थे।

शिक्षण सत्र 2018-19 में स्कूल का परीक्षा परिणाम तय मापदंड से कम रहने पर 2021 में याची को नोटिस दिया गया और बाद में 17 सीसीए का नोटिस दिया गया।

विभागीय मापदंड से कम परीक्षा परिणाम स्कूल में सीनियर टीचर्स के गणित व इंग्लिश विषय का मापदंड से कम आया, जिस पर याचिकाकर्ता को माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने चार्जशीट दी और जुलाई 2021 में उसकी दो वार्षिक वेतन वृद्धि भी रोक दी।

याची के जवाब पर ध्यान दिए बिना ही जुलाई 2021 में विभाग ने दो वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने के आदेश जारी कर उसे दंडित किया।

विभाग में अपील और निर्णय

विभाग द्वारा दो वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने के फैसले के खिलाफ याचिकाकर्ता ने शिक्षा सचिव के समक्ष अपील दायर की।

मार्च 2024 में शिक्षा सचिव ने मामले में अपील को आंशिक स्वीकार कर पूर्व दंड में संशोधन करते हुए दो की जगह एक वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने का आदेश दिया।

हाईकोर्ट में चुनौती और आदेश

शिक्षा सचिव द्वारा एक वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने को भी याचिकाकर्ता द्वारा राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

अधिवक्ता विजय पाठक ने मामले में पैरवी करते हुए अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के स्कूल का परीक्षा परिणाम सदैव उत्कृष्ट रहा है। ऐसे में केवल एक साल कम परीक्षा परिणाम आने पर उसे दंडित नहीं किया जा सकता।

याचिका में कहा गया कि उसने सिलेबस पूरा करवा कर छात्रों को पूरे साल पढ़ाए जाने का प्रयास किया। हर छात्र का पढ़ने का स्तर एक जैसा नहीं होता है, इसलिए उसे कम परिणाम के लिए दोषी करार देकर दंडित नहीं किया जा सकता।

राजस्थान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए 4 मार्च 2025 को आदेश देते हुए शिक्षा सचिव के आदेश को रद्द कर दिया और एक वार्षिक वेतनवृद्धि का भुगतान करने का आदेश दिया।

आदेश का नहीं किया पालन

राजस्थान हाईकोर्ट के आदेशों की 6 माह बाद भी पालना नहीं करने पर याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की।

इसी अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों की पालना करने के लिए 20 फरवरी तक का अंतिम अवसर दिया है।

हाईकोर्ट ने कहा कि यदि इस तारीख तक कोर्ट के पूर्व आदेशों की पालना नहीं होती है तो माध्यमिक शिक्षा निदेशक अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर बताएं कि पालना क्यों नहीं की गई है।

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