जयपुर, 3 अक्टूबर।
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि राज्य का भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक मामले दर्ज कर सकता है, यदि अपराध की उत्पत्ति राजस्थान की सीमा के भीतर हुई हो.
जस्टिस सुदेश बंसल की एकलपीठ ने रिपोर्टेबल जजमेंट के जरिए दिए अपने फैसले में कहा कि ACB को ऐसे मामलो में जांच पूर्ण कर सक्षम न्यायालय में चार्जशीट दाखिल करने तक सभी कार्यवाही करने का पूरा अधिकार है.
रोक हटाई
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस संबंध में किसी भी प्रकार की रोकटोक या प्रतिबंध का प्रावधान नहीं है.
हाईकोर्ट ने कहा कि राजस्थान पुलिस/ACB और CBI – दोनों के पास समानांतर अधिकार है और दोनों एजेंसियां सहयोग व समन्वय के साथ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कर सकती हैं.
राजस्थान हाईकोर्ट ने इस फैसले के साथ ही केंद्रीय कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और गबन से संबंधित मामलों में ACB की कार्यवाही पर लगी रोक को हटा दिया हैं.
CBI को नहीं विशेषाधिकार
राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया हैं कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को इस क्षेत्राधिकार पर कोई विशेषाधिकार नहीं प्राप्त है.
कोर्ट ने कहा कि CBI और ACB के क्राइम मैनुअल केवल प्रशासनिक अनुशासन और कार्य विभाजन के लिए हैं, न कि वैधानिक प्रावधानों को सीमित करने के लिए.
इसलिए ACB का अधिकार-क्षेत्र केंद्रीय कर्मचारियों पर भी लागू होगा.
अवैध नहीं
कोर्ट ने यह भी माना कि यदि जांच के दौरान क्राइम मैनुअल के प्रशासनिक निर्देशों का पालन नहीं होता, तो मात्र उस आधार पर जांच को अवैध नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि वह त्रुटि जांच की जड़ को प्रभावित न करती हो.
साथ ही यह भी कहा कि यदि भविष्य में नई परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं, तो याचिकाकर्ता अंतरिम राहत के लिए दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
हाईकोर्ट के इस फैसले से यह कानूनी स्थिति स्पष्ट हो गई है कि राजस्थान पुलिस/ACB और CBI – दोनों के पास समानांतर अधिकार है और दोनों एजेंसियां सहयोग व समन्वय के साथ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कर सकती हैं।