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राजस्थान में राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ: एक दिन में करीब 8 लाख मुकदमों के निस्तारण का लक्ष्य, हाईकोर्ट से लेकर जिला अदालतों तक विशेष बेंचें गठित

Rajasthan Launches Second National Lok Adalat of 2026, Target to Dispose Nearly 8 Lakh Cases in a Single Day

जयपुर। प्रदेशभर में आज वर्ष 2026 की दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा हैं, जिसमें एक ही दिन में करीब 8 लाख मामलों के निस्तारण का लक्ष्य रखा गया है।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के निर्देशानुसार आयोजित इस महाअभियान का विधिवत शुभारंभ राजस्थान हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग, जयपुर में हुआ।

उद्घाटन समारोह में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एवं राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RALSA) के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर लोक अदालत का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर राजस्थान हाईकोर्ट के कई न्यायाधीश, न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता, रालसा के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में लॉ स्टूडेंट मौजूद रहे।

समारोह में जस्टिस इन्द्रजीत सिंह, जस्टिस चन्द्रप्रकाश श्रीमाली, जस्टिस मनीष शर्मा, जस्टिस संगीता शर्मा और जस्टिस रवि चिरानिया विशेष रूप से मौजूद रहें.

रालसा के सदस्य सचिव डॉ. हरिओम शर्मा अत्री, रजिस्ट्रार जनरल चंचल मिश्रा और अन्य अधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

करीब 8 लाख मुकदमें चिन्हित

राजस्थान में इस राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए कुल 7 लाख 77 हजार 381 मामलों को रैफर किया गया है।

इनमें 5 लाख 19 हजार 645 प्री-लिटिगेशन मामले तथा विभिन्न न्यायालयों में लंबित 2 लाख 57 हजार 736 मामले शामिल हैं।

इन मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ, जयपुर पीठ तथा प्रदेशभर की अदालतों में कुल 476 विशेष बेंचों का गठन किया गया है।

जिला एवं उपखंड स्तर की अदालतों में भी विशेष पीठें गठित कर समझौते के आधार पर मामलों का निपटारा किया जा रहा है।

ये मुकदमें होंगे निस्तारित

लोक अदालत में बैंक ऋण वसूली, बिजली-पानी बिल विवाद, चेक बाउंस, मोटर दुर्घटना दावा, वैवाहिक एवं पारिवारिक विवाद, श्रम विवाद, राजस्व प्रकरण सहित अन्य समझौता योग्य मामलों की सुनवाई की जा रही है।

मामलों का निस्तारण ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से किया जाएगा।

अदालतों के बाहर आपसी सहमति से सुलझाए मामले- एसीजे

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने कहा कि न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, सुलभ और तेज बनाने में लोक अदालत, मध्यस्थता (मेडिएशन) और प्री-लिटिगेशन समाधान प्रणाली की महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने कहा कि छोटे और सामान्य विवाद यदि अदालतों के बाहर ही आपसी सहमति से सुलझा लिए जाएं तो न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ काफी हद तक कम किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि जब छोटे विवाद समझौते से हल हो जाते हैं, तब न्यायालय गंभीर और जटिल कानूनी प्रश्नों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। इससे न्यायिक व्यवस्था अधिक मजबूत होती है और वादकारियों, अधिवक्ताओं तथा पूरे न्याय तंत्र को इसका लाभ मिलता है।

सौहार्दपूर्ण समाधान संभव

जस्टिस शर्मा ने कहा कि शुरुआती दौर में वैकल्पिक विवाद निपटान प्रणाली को लेकर कुछ अधिवक्ताओं के मन में शंकाएं थीं, लेकिन अब यह समझ विकसित हो चुकी है कि अनेक मामलों का प्रारंभिक स्तर पर ही सौहार्दपूर्ण समाधान संभव है।

इससे समय और संसाधनों की बचत होती है तथा पक्षकारों को शीघ्र राहत मिलती है।

उन्होंने ला स्टूडेंट और युवा अधिवक्ताओं से विशेष रूप से अपील करते हुए कहा कि वे पक्षकारों को लोक अदालत और मध्यस्थता जैसी व्यवस्थाओं को अपनाने के लिए प्रेरित करें।

Justice Sanjeev Prakash Sharma, The Acting Chief Justice

उन्होंने कहा कि यदि अधिक से अधिक मामले समझौते से निपटते हैं तो न्यायिक प्रणाली में तेजी आती है और नए मामलों के लिए भी अवसर उपलब्ध होते हैं।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि लोक अदालत न्याय प्रणाली का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुकी है। साथ ही मेडिएशन और प्री-लिटिगेशन तंत्र भी विवादों के शांतिपूर्ण समाधान में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

समाज के स्वस्थ विकास के लिए आवश्यक

उन्होंने कहा कि न्यायपालिका लगातार प्रयास कर रही है कि मध्यस्थता प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जाए ताकि मामले की शुरुआत से लेकर अंतिम चरण तक किसी भी स्तर पर पक्षकारों के बीच समझौता कराया जा सके।

उन्होंने कहा कि यदि छोटे विवाद अदालतों के बाहर ही निपट जाएं और केवल महत्वपूर्ण विधिक प्रश्नों से जुड़े मामलों की नियमित सुनवाई हो तो देश की न्याय व्यवस्था में व्यापक सुधार संभव है। इससे लोगों को समय पर न्याय मिलेगा और समाज में शांति एवं संतुलन भी स्थापित होगा।

जस्टिस शर्मा ने कहा कि त्वरित और सरल न्याय मिलने से लोगों को मानसिक शांति मिलती है, जो समाज के स्वस्थ विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता के लिए सभी न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और पक्षकारों को शुभकामनाएं भी दीं।

समारोह में वरिष्ठ अधिवक्ता जे. पी. गोयल, एस. के. गुप्ता, रालसा के स्पेशल सचिव महेन्द्र प्रताप बेनीवाल, उपसचिव रश्मि नवल सहित बड़ी संख्या में न्यायिक अधिकारी और अधिवक्ता उपस्थित रहे।

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