जयपुर, 2 दिसंबर
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष और राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के निर्देश पर यू-ट्यूब चैनल NewsPinch की एक वीडियो रिपोर्ट पर प्रसंज्ञान लिया हैं.
जिसके बाद राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने बालोतरा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को इस मामले में तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश देते हुए जंजीरों से बांधे गए लोगो को तुरंत मुक्त कराते हुए उनके लिए चिकित्सा व्यवस्था और पुनर्वास की व्यवस्था करने का निर्देश दिया हैं.

राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसी घटनाएँ मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन हैं और इन्हें रोकने के लिए जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय निकायों को संयुक्त रूप से काम करना होगा।
15 दिसंबर तक इस मामले में संपूर्ण रिपोर्ट प्राधिकरण के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए गए हैं.
तुरंत चिकित्सा उपलब्ध कराने के निर्देश
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को यह निर्देश दिया हैं कि वे सभी पीड़ितों को मानसिक स्वास्थ्य इकाई के माध्यम से तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराए
तुरंत प्रभाव से पीड़ितो और उनके परिजनों से मिलकर परामर्श करने गंभीर मामलों में आश्रय गृह या मानसिक स्वास्थ्य सुविधा केंद्र में ले जाने के निर्देश दिए हैं.
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने परिवारों को उपलब्ध सरकारी योजनाओं की जानकारी देने और संपूर्ण कार्रवाई की रिपोर्ट 15 दिसंबर तक पेश करने के निर्देश दिए हैं.
ये हैं मामला
यू-ट्यूब चैनल NewsPinch की ओर से बालोतरा जिले में लोगो को झंझीर से बांधकर रखने को लेकर स्टोरी प्रसारित कि गयी थी.
“राजस्थान में इन इंसानों को जंजीरों से क्यों बांधकर रखा जा रहा है?” शीर्षक से प्रकाशित इस रिपोर्ट में राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों को अमानवीय परिस्थितियों में जंजीरों से बांधकर रखने के मामलों का खुलासा किया गया.
इस वीडियो रिपोर्ट में 4 लोगो के बार में जानकारी दी गयी थी.
वीडियो रिपोर्ट में पहला मामला बालोतरा जिले के खोखसर क्षेत्र के निवासी पद्माराम का है, जो करीब 10–15 वर्षों से मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं। परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है और इलाज संभव न होने पर उन्हें जंजीर से बांधकर रखा जाता है। परिवार खेती-बाड़ी और पशुपालन से मुश्किल से अपना गुजारा कर रहा है।
दूसरा मामला 14–15 वर्षीय किशोर ‘बुराराम’ का है, जिसे जंजीरों से बांधकर रखा गया है। आरोप है कि माता-पिता ने कभी उसे किसी डॉक्टर को नहीं दिखाया। वे झाड़-फूंक कराने में यकीन रखते हैं।
तीसरी पीड़ित महिला है, जिसे मानसिक बीमारी के चलते वर्षों से एक कच्चे कमरे में जंजीर से बांधकर रखा गया। वीडियो में परिवार ने बताया कि वे उसे घर से बाहर नहीं छोड़ सकते क्योंकि क्षेत्र में पर्याप्त मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं।
इसी प्रकार चौथा मामला खोखसर निवासी ‘सोहनदान’ का है, जिसे मानसिक बीमारी के कारण कई वर्षों से जंजीरों में कैद रखा गया है।