जयपुर, 30 अक्टूबर 2025
राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवाएं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा 2023 यानी RAS-2023 भर्ती परीक्षा के एक दिव्यांग अभ्यर्थी को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने “बेंचमार्क डिसेबिलिटी” की न्यूनतम सीमा से कम दिव्यांगता के आधार पर साक्षात्कार चरण से बाहर किए दिव्यांग अभ्यर्थी भुलेश मीणा की उम्मीदवारी पर पुनर्विचार करने के आदेश दिए हैं।
जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने कहा कि चूंकि भुलेश मीणा की दिव्यांगता बेंचमार्क मानकों के अनुरूप है, अतः RPSC को उनके अभ्यर्थन पर विचार करना चाहिए।
अदालत ने कहा कि यदि वे अन्य मानदंडों के अनुरूप पात्र हैं, तो उन्हें साक्षात्कार हेतु बुलाया जाए और मेरिट के अनुसार परिणाम घोषित किया जाए।
3 में से 2 अभ्यर्थी
राजस्थान हाईकोर्ट ने पूर्व में 17 सितंबर 2025 को एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए AIIMS, जोधपुर के विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड से याचिकाकर्ता भुलेश मीणा, हरदेव और गोविंदराम की पुनः जांच कराने के आदेश दिए थे।
कोर्ट के आदेश से गठित मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार —
भुलेश मीणा को 48.26% स्थायी श्रवण दिव्यांगता (Hearing Impairment) पाई गई, जो कि बेंचमार्क डिसेबिलिटी की श्रेणी में आती है।
वहीं हरदेव को 30% दृष्टि दिव्यांगता (Visual Impairment) और गोविंद राम को 14.66% अस्थायी श्रवण दिव्यांगता पाई गई।
दोनों को आंशिक राहत
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता हरदेव (भरतपुर) और गोविंद राम (हनुमानगढ़) की याचिकाओं को यह कहते हुए निस्तारित किया कि उनकी दिव्यांगता बेंचमार्क सीमा से कम है।
हाईकोर्ट ने उन्हें यह छूट दी है कि वे RPwD Act, 2016 की नवीनतम गाइडलाइंस के आधार पर पुनः RPSC को representation दे सकते हैं।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि दोनों याचिकाकर्ताओं के representation पेश करने पर दो सप्ताह में प्राप्त कर चार सप्ताह के भीतर कारणयुक्त आदेश (reasoned order) जारी करे।
याचिकाकर्ता का पक्ष
याचिकाकर्ताओं ने RPwD Act, 2016 के तहत आवेदन किया था। वे मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद साक्षात्कार चरण के लिए योग्य घोषित हुए थे। लेकिन RPSC ने उन्हें यह कहते हुए अयोग्य घोषित कर दिया कि उनकी दिव्यांगता “बेंचमार्क डिसेबिलिटी” की न्यूनतम सीमा से कम है।
न्यायमूर्ति अशोक कुमार जैन ने कहा कि सभी याचिकाओं का निस्तारण उक्त दिशा-निर्देशों के साथ किया जाता है। संबंधित विभाग यह सुनिश्चित करे कि RPwD Act, 2016 और केंद्र सरकार की गाइडलाइंस के अनुरूप दिव्यांग उम्मीदवारों के अधिकारों की रक्षा हो।
मामले की पृष्ठभूमि
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की ओर से आयोजित RAS भर्ती परीक्षा-2023 के इंटरव्यू में संदिग्ध दिव्यांग प्रमाण पत्र के मामले सामने आए।
RPSC ने फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्रों के बढ़ते मामलों को देखते हुए पहली बार इस भर्ती प्रक्रिया में दिव्यांग अभ्यर्थियों की मेडिकल जांच का प्रावधान किया।
जिसके चलते कई अभ्यर्थियों ने मेडिकल जांच से दूरी बना ली, वहीं कई अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच को पुनः जांच (Re-verification) के लिए भेजा गया।
RPSC ने इस मामले में कई अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में शामिल होने से अयोग्य घोषित कर दिया।
972 पदों के लिए भर्ती
RPSC ने RAS-2023 भर्ती का विज्ञापन 28 जून 2023 को जारी किया था।
शुरुआत में 905 पद (राज्य सेवाएं 424 एवं अधीनस्थ सेवाएं 481) के लिए 1 जुलाई से 31 जुलाई 2023 तक आवेदन मांगे गए।
बाद में सरकार ने इन पदों की संख्या बढ़ाकर 972 (राज्य सेवाएं 491 एवं अधीनस्थ सेवाएं 481) कर दी।
6.96 लाख से ज्यादा आवेदन
RAS-2023 भर्ती में 972 पदों के लिए RPSC को 6,96,969 अभ्यर्थियों से आवेदन प्राप्त हुए।
प्रारंभिक परीक्षा 1 अक्टूबर 2023 को आयोजित हुई, जिसमें 4,57,927 अभ्यर्थी उपस्थित हुए।
आपत्तियों के परीक्षण के बाद 20 अक्टूबर 2023 को RAS (प्रारंभिक) परीक्षा-2023 का परिणाम जारी किया गया।
प्रारंभिक परीक्षा में सफल रहे 19,355 अभ्यर्थियों के लिए मुख्य परीक्षा 20 और 21 जुलाई 2024 को आयोजित की गई।
मुख्य परीक्षा का परिणाम 2 जनवरी 2025 को जारी हुआ, जिसमें 2,168 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए अस्थायी रूप से सफल घोषित किया गया।
इसमें 2 उम्मीदवारों के परिणाम सील कवर में रखे गए, 20 का परिणाम रद्द किया गया, और 3 का परिणाम प्रशासनिक कारणों से होल्ड किया गया।