जयपुर। RPSC Chairman उत्कल रंजन साहू और सचिव रामनिवास मेहता ने राजस्थान हाईकोर्ट में शपथपत्र पेश कर बिना शर्त माफी मांगी है।
RPSC Chairman साहू और सचिव रामनिवास मेहता की ओर से पेश की गई इस बिना शर्त की माफी को हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया है।
जिसके बाद दोनों अधिकारियों को अदालत की अवमानना की कार्रवाई से मुक्त करते हुए उनके खिलाफ मामले को बंद कर दिया गया है।
सीनियर टीचर एग्रीकल्चर भर्ती
मामला सीनियर टीचर एग्रीकल्चर भर्ती 2021 से जुड़ा है। इस मामले में याचिकाकर्ताओं की योग्यता बीएससी बायोलॉजी को एंटोमोलॉजी के समानांतर मानने से इनकार करते हुए भर्ती से बाहर कर दिया था।
आरपीएससी के इस निर्णय के खिलाफ दुर्गालाल रेगर सहित 5 याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी। बाद में 3 अन्य याचिकाकर्ताओं ने भी याचिकाएं दायर कर चुनौती दी।
इन 8 याचिकाओं पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 3 याचिकाओं को खारिज कर दिया, वहीं दुर्गालाल रेगर व अन्य 4 याचिकाओं में हाईकोर्ट की एकलपीठ ने RPSC को आदेश दिया था कि वह याचिकाकर्ताओं के लिए पद रिक्त रखें।
लेकिन राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने अपनी मनमर्जी करते हुए सभी याचिकाओं को खारिज की श्रेणी में डालते हुए 22 जनवरी 2026 को परिणाम जारी कर दिया।
हाईकोर्ट के आदेश को किया दरकिनार
राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा जारी किए गए परिणाम को लेकर मामले को हाईकोर्ट में मेंशन किया गया।
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता श्रेयांश धारीवाल, अक्षित गुप्ता, प्रज्ञा सेठ, नकुल बंसल और तनवीर अहमद ने अदालत से कहा कि आयोग ने 22 जनवरी को जो परिणाम जारी किया है, उस परिणाम में यह उल्लेख किया कि संबंधित रिट याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि ये याचिकाएं अभी भी न्यायालय में लंबित हैं।
अधिवक्ताओं ने दलील दी कि वर्ष 2021 में पारित अंतरिम आदेशों के तहत अदालत ने आदेश दिया था कि यदि कम मेरिट वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जाती है तो कुछ पद रिक्त रखे जाएं।
अधिवक्ता श्रेयांश धारीवाल ने अदालत से कहा कि ये अंतरिम आदेश अभी तक प्रभावी हैं और अदालत ने इन्हें कभी निरस्त नहीं किया। इसके बावजूद आयोग द्वारा परिणाम जारी करते समय याचिकाओं को खारिज दर्शाया जाना गंभीर त्रुटि है।
आरपीएससी का जवाब
बाद में मामले में कोर्ट की सख्ती के बाद आरपीएससी की ओर से अधिवक्ता ने जवाब पेश करते हुए कहा कि 16 जनवरी 2025 को कई याचिकाओं के समूह में पारित एक आदेश के आधार पर आयोग को यह भ्रम हुआ कि संबंधित याचिकाएं भी समाप्त हो चुकी हैं, इसी कारण परिणाम जारी किया गया।
हाईकोर्ट का आदेश, परिणाम वापस करे
5 फरवरी को इस मामले में सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) को कड़ी फटकार लगाई।
हाईकोर्ट ने कहा कि जिन रिट याचिकाओं पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है, उन्हें खारिज मानकर RPSC द्वारा परिणाम घोषित करना कोर्ट की अवमानना माना जाएगा।
जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने सख्त आदेश देते हुए आयोग को आदेश दिया कि वह 22 जनवरी 2026 को घोषित परिणाम को तुरंत वापस ले, अन्यथा आयोग के अध्यक्ष और सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर कारण बताना होगा कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।
आरपीएससी के स्पष्टीकरण रिजेक्ट
आरपीएससी के स्पष्टीकरण को भी हाईकोर्ट ने स्वीकार करने से इनकार करते हुए एक बार फिर फटकार लगाई और कहा कि आरपीएससी का स्पष्टीकरण गैर-जिम्मेदाराना है।
हाईकोर्ट ने कहा कि परिणाम जारी करने से पहले संबंधित आदेशों का सत्यापन करना आयोग की जिम्मेदारी थी और बिना पुष्टि किए ऐसा करना उचित नहीं है।
अदालत ने आयोग को स्पष्ट आदेश दिया कि वह अगले दिन शाम 4:30 बजे तक 22 जनवरी 2026 का परिणाम वापस ले और इसकी अनुपालना रिपोर्ट प्रस्तुत करे। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि आदेश का पालन नहीं किया गया तो आयोग के अध्यक्ष और सचिव को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होना पड़ेगा और यह बताना होगा कि न्यायालय की अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।
परिणाम वापस और माफी के लिए समय
11 फरवरी 2026 को राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान आरपीएससी ने अपना जवाब पेश करते हुए कहा कि 5 फरवरी के कोर्ट आदेशों की पालना में 22 जनवरी को जारी किया गया परिणाम उसी दिन 5 फरवरी को ही वापस कर लिया गया।
हाईकोर्ट ने कहा कि आरपीएससी ने यह परिणाम कोर्ट के आदेश की पालना में करने का उल्लेख किया है, जबकि वास्तव में रिट याचिका संख्या 10858/2021 तथा 12145/2021 के खारिज होने संबंधी कोई आदेश कभी पारित ही नहीं हुआ था और इसे लेकर आरपीएससी द्वारा तथ्यात्मक भूल की गई थी।
हाईकोर्ट ने कहा कि यह स्पष्ट रूप से तथ्यात्मक त्रुटि को दर्शाता है, जिसका स्पष्टीकरण दिया जाना आवश्यक है।
आरपीएससी के अधिवक्ता ने इस मामले में विशेष रूप से अध्यक्ष और सचिव की ओर से माफी मांगने के लिए समय मांगा।
बिना शर्त माफी और केस बंद
13 फरवरी को सुनवाई के दौरान RPSC Chairman उत्कल रंजन साहू और सचिव रामनिवास मेहता की ओर से शपथपत्र पेश कर बिना शर्त माफी मांगी गई।
हाईकोर्ट ने आरपीएससी अध्यक्ष और सचिव द्वारा दायर माफीनामे को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि अंतरिम आदेश के उल्लंघन से संबंधित मुद्दे पर अब आगे कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है।
हाईकोर्ट ने अवमानना केस को बंद करते हुए मुख्य याचिका के अंतिम निस्तारण के लिए मामले को 23 मार्च 2026 को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।