जोधपुर। सांचौर के चर्चित जालम सिंह हत्याकांड में मुख्य आरोपी भागीरथ विश्नोई को एक बार फिर राजस्थान हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने उसकी दूसरी जमानत याचिका भी खारिज कर दी।
जस्टिस मुकेश राजपुरोहित ने कहा कि पहली जमानत खारिज होने के बाद गवाहों के बयान दर्ज हुए हैं, लेकिन इससे ऐसी कोई बड़ी नई परिस्थिति सामने नहीं आई, जिसके आधार पर अब भागीरथ को जमानत दी जा सके।
हाईकोर्ट ने केस की गंभीरता और सामने आई परिस्थितियों को देखते हुए दूसरी जमानत याचिका खारिज कर दी। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि इस स्तर पर उसने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय नहीं दी है।
भागीरथ की पहली जमानत याचिका हाईकोर्ट ने 23 जुलाई 2025 को खारिज की थी। इसके बाद ट्रायल में कुछ गवाहों के बयान दर्ज हुए, जिसके आधार पर उसने दूसरी बार जमानत मांगी थी।
15 लाख रुपये के लिए जान से मारने की दी थी धमकी
पुलिस केस के मुताबिक, जालम सिंह पहले भागीरथ की लॉज पर काम करता था। तनख्वाह को लेकर विवाद के बाद जालम सिंह ने काम छोड़ दिया था।
इसी दौरान भागीरथ की लॉज से डोडा बरामद होने पर उसे जालम सिंह पर पुलिस को मुखबिरी करने का शक हुआ।
आरोप है कि इसके बाद भागीरथ ने जालम सिंह के परिवार से 15 लाख रुपये की मांग की और पैसे नहीं देने पर जालम सिंह को जान से मारने की धमकी दी थी।
लापता होने के बाद घायल हालत में मिला था जालम सिंह
अभियोजन के मुताबिक, जालम सिंह 17 अगस्त 2024 को घर से सांचौर जाने के लिए निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा।
परिवार की ओर से दर्ज रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि भागीरथ ने जालम सिंह के पिता से फोन पर 15 लाख रुपये मांगे और जालम सिंह से भी उनकी बात करवाई। बाद में जालम सिंह सड़क पर घायल हालत में मिला और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पुलिस ने जांच के बाद भागीरथ समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ केस में चालान पेश किया। फिलहाल इस मामले की सुनवाई सांचौर की कोर्ट में चल रही है।
आरोपी ने कहा- हत्या नहीं, कार हादसा था
दूसरी जमानत याचिका पर आरोपी भागीरथ की ओर से कहा गया कि उसे झूठा फंसाया गया है। बचाव पक्ष का तर्क था कि जालम सिंह की मौत हत्या से नहीं, बल्कि कार एक्सीडेंट में हुई थी।
इसके लिए बचाव पक्ष ने PW-05 नरपत सिंह के ट्रायल में दर्ज बयान का हवाला दिया। इस गवाह ने बयान दिया था कि मौके पर मौजूद लोगों और घायल जालम सिंह ने उसे बताया था कि उसे कार ने टक्कर मारी है।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड में भागीरथ की ओर से जालम सिंह पर हमला करने का कोई स्पष्ट सबूत नहीं है।
28 में से अभी 9 गवाहों के बयान होने की दी दलील
आरोपी भागीरथ की ओर से यह भी दलील दी गई कि वह 28 अगस्त 2024 से जेल में है और जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है।
मामले में कुल 28 गवाह हैं, जिनमें से अब तक 9 के बयान दर्ज हुए हैं। बचाव पक्ष ने कहा कि बाकी गवाहों के बयान और ट्रायल पूरा होने में अभी समय लग सकता है। इसी आधार पर भागीरथ को जमानत देने की मांग की गई।
परिवादियों ने कहा- हादसा दिखाने की कोशिश की गई
वहीं सरकारी वकील और परिवादी की ओर से जमानत का विरोध किया गया। सरकारी वकील ने कहा कि आरोपी से जुड़े कॉल रिकॉर्ड में परिवादी, जालम सिंह और उसके बड़े भाई से कई बार बातचीत होने की जानकारी है।
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जालम सिंह को सड़क पर इस तरह फेंका गया था, जिससे घटना को कार दुर्घटना जैसा दिखाया जा सके।
पहली जमानत खारिज होने का दिया हवाला
भागीरथ की पहली जमानत अर्जी को राजस्थान हाईकोर्ट ने 23 जुलाई 2025 को खारिज कर दिया था।
इसके बाद PW-1 से PW-9 तक के बयान दर्ज हुए। इन्हीं नई परिस्थितियों के आधार पर भागीरथ की ओर से दूसरी जमानत अर्जी दाखिल की गई थी।
परिवादी की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि मामले में सह-आरोपी छन्ना राम की जमानत अर्जी भी 20 अप्रैल 2026 को हाईकोर्ट की दूसरी बेंच खारिज कर चुकी है।
उनका कहना था कि मुख्य आरोपी भागीरथ के मामले में भी कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, इसलिए उसे जमानत देने का आधार नहीं बनता।
हाईकोर्ट ने कहा- अभी जमानत का कोई आधार नहीं
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि पहली जमानत खारिज होने के बाद कुछ गवाहों के बयान जरूर दर्ज हुए हैं, लेकिन इससे ऐसी कोई बड़ी नई बात सामने नहीं आई, जिसके आधार पर भागीरथ को दूसरी बार जमानत दी जा सके।
हाईकोर्ट ने सह-आरोपी छन्ना राम की जमानत खारिज होने के आदेश का भी जिक्र किया और कहा कि भागीरथ के मामले को उससे अलग मानने की कोई ठोस वजह सामने नहीं आई है।
हाईकोर्ट ने दूसरी जमानत भी खारिज की
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी भागीरथ विश्नोई की दूसरी जमानत अर्जी भी खारिज कर दी। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि उसने अभी यह तय नहीं किया है कि जालम सिंह की हत्या के आरोप सही हैं या नहीं। मामले के अंतिम नतीजे पर ट्रायल कोर्ट में ही फैसला होगा।