नई दिल्ली। बीसीआई चेयरमैन मनन मिश्रा को लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया में चल रही अंदरूनी कलह के बीच सुप्रीम कोर्ट ने उनकी भूमिका और अधिकारों को लेकर सीमा तय कर दी है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ कहा कि वह अभी केवल प्रो-टेम चेयरमैन हैं, लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए स्थायी चेयरमैन नहीं।
यानी नए BCI के चुनाव तक मनन मिश्रा रोजमर्रा का काम संभाल सकते हैं, लेकिन उनकी मौजूदा भूमिका नए चुनाव से चुने गए चेयरमैन जैसी नहीं होगी।
मामला सिर्फ कुर्सी पर बने रहने का नहीं, बल्कि उस कुर्सी से बड़े फैसले लेने के अधिकार का भी है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नए बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चुनाव तक मनन मिश्रा रोजमर्रा का काम संभाल सकते हैं, लेकिन बड़े पॉलिसी फैसलों में अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को भी शामिल करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि मौजूदा व्यवस्था को नए बीसीआई के चुनाव तक ही प्रो-टेम व्यवस्था के तौर पर देखा जा सकता है।
यानी मनन मिश्रा चेयरमैन की कुर्सी पर रहेंगे, लेकिन उनके अधिकारों की सीमा अब सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दी है।
नए चुनाव तक संभालेंगे सिर्फ रोजमर्रा का काम
सुप्रीम कोर्ट में मनन मिश्रा के बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन पद पर लंबे समय तक बने रहने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि BCI Rules के मुताबिक चेयरमैन का कार्यकाल दो साल का होता है। इसके बावजूद मनन मिश्रा के कार्यकाल को आगे बढ़ाकर 2030 तक करने की कोशिश की गई।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि स्टेट बार काउंसिल के चुनाव हो चुके हैं और अब नए बार काउंसिल ऑफ इंडिया के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
ऐसे में नया BCI बनने और नए पदाधिकारियों के चुनाव तक मनन मिश्रा प्रो-टेम चेयरमैन के तौर पर काम कर सकते हैं।
यानी वह BCI का रोजमर्रा का काम संभालेंगे, लेकिन उनकी मौजूदा भूमिका को नियमित रूप से चुने गए चेयरमैन के बराबर नहीं माना जाएगा।
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बड़े पॉलिसी फैसलों पर रहेगी रोक
सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ उनकी भूमिका तय नहीं की, बल्कि बड़े फैसलों को लेकर भी व्यवस्था साफ की।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि BCI के बड़े पॉलिसी फैसलों में अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को शामिल किया जाना चाहिए। दोनों BCI के सदस्य हैं और ऐसे बड़े फैसलों में उनकी राय ली जानी चाहिए।
रोजमर्रा के काम में उनकी मौजूदगी जरूरी नहीं होगी। लेकिन जब BCI कोई ऐसा बड़ा फैसला ले, जिसका असर उसकी पॉलिसी या पूरे कामकाज पर पड़े, तो दोनों को इसमें शामिल करना होगा।
सुनवाई के दौरान जस्टिस Joymalya Bagchi ने BCI की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट Guru Krishnakumar से कहा कि नए BCI के चुनाव तक मनन मिश्रा की भूमिका प्रो-टेम चेयरमैन की तरह ही देखी जानी चाहिए।
2030 तक के कार्यकाल पर SC की मुहर नहीं
यहां एक बात साफ समझना जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट ने मनन मिश्रा के 2030 तक चेयरमैन बने रहने को मंजूरी नहीं दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ इतना कहा है कि नया BCI बनने तक कामकाज चलता रहना चाहिए। इसलिए तब तक मनन मिश्रा रोजमर्रा का काम संभाल सकते हैं।
यानी उनकी मौजूदा स्थिति स्थायी नहीं, बल्कि नए चुनाव तक की व्यवस्था है।
नया BCI बनते ही नए पदाधिकारियों का चुनाव होगा और फिर मनन मिश्रा की यह भूमिका भी खत्म हो जाएगी।
इसलिए सुप्रीम कोर्ट की इस बात को 2030 तक के कार्यकाल की मंजूरी समझना सही नहीं होगा।
नए BCI के गठन का रास्ता साफ
इस पूरे मामले में अगला कदम स्टेट बार काउंसिल के चुनाव हैं।
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इन चुनावों की प्रक्रिया आगे बढ़ी और अब नए स्टेट बार काउंसिल के गठन का रास्ता साफ हो गया है।
नए स्टेट बार काउंसिल बनने के बाद इनमें से BCI के लिए प्रतिनिधि चुने जाएंगे।
यही प्रतिनिधि मिलकर नए बार काउंसिल ऑफ इंडिया के गठन और उसके पदाधिकारियों के चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पूरी प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
यानी सुप्रीम कोर्ट चाहता है कि नया निर्वाचित BCI जल्दी बने और मौजूदा अस्थायी व्यवस्था खत्म हो।
मनन मिश्रा के कार्यकाल पर क्यों उठा सवाल?
दरअसल मनन मिश्रा के चेयरमैन पद पर लंबे समय से बने रहने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई हैं।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि BCI Rules में चेयरमैन का कार्यकाल दो साल तय है। लेकिन अप्रैल 2025 में BCI की ओर से जारी नोटिफिकेशन में मनन मिश्रा का कार्यकाल 2030 तक बढ़ाने की बात कही गई।
इसी वजह से सवाल उठा कि नियमों के मुताबिक मनन मिश्रा इतने लंबे समय तक चेयरमैन पद पर रह सकते हैं या नहीं।
अब सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद के बीच फिलहाल ऐसी व्यवस्था बताई है, जिससे BCI का काम भी चलता रहे और नए चुनाव का रास्ता भी खुला रहे।
नया BCI बनने तक मनन मिश्रा रोजमर्रा का काम संभाल सकते हैं, लेकिन बड़े पॉलिसी फैसलों में अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को शामिल करना होगा।
NALSAR विवाद के बाद उठे सवाल
मनन मिश्रा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं का एक संदर्भ NALSAR विवाद से भी जुड़ा है। जब इन छात्रों ने यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने पर आपत्ति जताई।
विवाद तब बढ़ा, जब BCI ने इस विवाद के बाद NALSAR के कुछ लॉ ग्रेजुएट्स के एनरोलमेंट को लेकर निर्देश जारी किए थे।
इसके बाद मनन मिश्रा की काफी आलोचना हुई और उन्होंने बाद में इस मामले में माफी भी मांगी।
हालांकि, आज की सुनवाई में NALSAR विवाद मुख्य मुद्दा नहीं था।
सुप्रीम कोर्ट के सामने सवाल यह था कि नया BCI चुने जाने तक मनन मिश्रा की भूमिका क्या रहेगी और बड़े फैसलों में उनके अधिकार कितने होंगे।
सीधी बात यह है कि मनन मिश्रा फिलहाल BCI का रोजमर्रा का काम संभाल सकते हैं, लेकिन उन्हें नए चुनाव से चुना गया चेयरमैन नहीं माना जाएगा।
बड़े पॉलिसी फैसलों में अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को भी शामिल करना होगा।