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डीजे दिनेश कुमार गुप्ता को SC से बड़ी राहत, प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज का दर्जा बरकरार रहेगा, लेबर कोर्ट में पोस्टिंग से नहीं घटेगा रुतबा, जूनियर अधिकारी या जिला जज को नहीं करेंगे रिपोर्ट,

Supreme Court Dismisses Challenge to Rajasthan Panchayati Raj Delimitation; Elections to Be Completed by

सुप्रीम कोर्ट ने कहा लेबर कोर्ट या इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल में पोस्टिंग को किसी भी हाल में पदावनति नहीं माना जा सकता

नई दिल्ली/जयपुर। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार गुप्ता को एक ओर बड़ी राहत देते हुए उनके हालिया तबादले के बाद उपजे वरिष्ठता विवाद में बड़ा आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने सेवा विवाद में स्पष्ट करते हुए कहा है कि किसी न्यायिक अधिकारी को लेबर कोर्ट या औद्योगिक ट्रिब्यूनल में पदस्थ किए जाने मात्र से उसके मूल पद, दर्जा और अधिकारों में कोई कमी नहीं मानी जा सकती।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लेबर कोर्ट या इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल में पोस्टिंग को किसी भी हाल में पदावनति नहीं माना जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि संबंधित न्यायिक अधिकारी का मूल पद प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज ही रहेगा और उन्हें उसी पद के अनुरूप वेतन, भत्ते और सभी सुविधाएं मिलती रहेंगी।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि प्रशासनिक पदस्थापन से किसी न्यायिक अधिकारी की गरिमा, रैंक और संवैधानिक स्थिति पर आंच नहीं आनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश राजस्थान के डीजे कैडर के न्यायिक अधिकारी दिनेश कुमार गुप्ता की याचिका पर दिया है।

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जूनियर को नहीं करेंगे रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने डीजे दिनेश कुमार गुप्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि वे अपने से किसी भी कनिष्ठ न्यायिक अधिकारी या जिला जज को रिपोर्ट नहीं करेंगे, बल्कि उनका प्रशासनिक नियंत्रण सीधे संबंधित सत्र मंडल के प्रशासनिक/पोर्टफोलियो जज के पास रहेगा।

इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से पेश अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के सभी आदेशों को स्वीकार किया है, जिसके बाद अदालत ने याचिका का निस्तारण कर दिया।

ये है मामला

जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार गुप्ता का राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन ने रिटायरमेंट से 10 माह पूर्व ब्यावर से जालौर ट्रांसफर किया था।

इस ट्रांसफर को चुनौती देते हुए दिनेश कुमार गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

उस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का अनुरोध किया था।

जिसके बाद राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर डीजे दिनेश कुमार गुप्ता का तबादला राजधानी जयपुर में करते हुए लेबर कोर्ट में पीठासीन अधिकारी के पद पर पदस्थापित किया गया।

दिनेश कुमार गुप्ता को राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा लेबर कोर्ट नंबर-1, जयपुर मेट्रोपॉलिटन-II-कम-इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल के पीठासीन अधिकारी के रूप में पदस्थ किया गया था।

इस पोस्टिंग को लेकर याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में आशंका व्यक्त की कि यह नियुक्ति उनके पद, रैंक और गरिमा के अनुरूप नहीं है, क्योंकि वे मूल रूप से प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज के पद पर कार्यरत रहे हैं।

साथ ही याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि उन्हें अपने से कनिष्ठ यानी जूनियर अधिकारी को रिपोर्ट करना होगा, जो कि उनकी गरिमा के खिलाफ है।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत के समक्ष यह तर्क रखा कि प्रशासनिक पदस्थापन के कारण किसी न्यायिक अधिकारी की प्रतिष्ठा, सेवा शर्तों या अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट आदेश के मुख्य बिंदू

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए तीन अहम आदेश जारी किए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता का मूल पद प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज ही रहेगा, चाहे उनकी वर्तमान पदस्थापना किसी भी न्यायालय में क्यों न हो।

प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज को मिलने वाले सभी वेतन, भत्ते और सुविधाएं उन्हें लेबर कोर्ट में कार्य करते हुए भी मिलती रहेंगी।

याचिकाकर्ता किसी भी कनिष्ठ न्यायिक अधिकारी या जिला जज को रिपोर्ट नहीं करेंगे। उनका प्रशासनिक नियंत्रण सीधे उस सत्र मंडल के प्रशासनिक/पोर्टफोलियो जज के पास रहेगा, जहां संबंधित श्रम न्यायालय स्थित है।

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