जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने सीनियरिटी और प्रमोशन से जुड़े विवाद को सर्विस मैटर माना है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए राजस्थान सिविल सर्विसेज अपीलेट ट्रिब्यूनल यानी RCSAT का रास्ता मौजूद है। ऐसे मामलों में हाईकोर्ट अपनी विशेष रिट पावर का इस्तेमाल नहीं करेगा।
यह टिप्पणी राजस्थान पुलिस में हेड कांस्टेबल के प्रमोशन से वंचित कांस्टेबल अशोक कुमार की याचिका पर सुनवाई के दौरान आई। अशोक कुमार ने आरोप लगाया था कि उनसे जूनियर कर्मचारियों को प्रमोशन दिया गया, जबकि उन्हें प्रमोशन के लिए विचार में शामिल नहीं किया गया।
अशोक कुमार की ओर से कहा गया कि RCSAT फिलहाल प्रभावी तरीके से काम नहीं कर रहा है, इसलिए उन्हें हाईकोर्ट से राहत दी जाए। वहीं, सरकार की ओर से बताया गया कि संबंधित सदस्यों की नियुक्ति के बाद RCSAT अगले 15 दिनों में काम करने लगेगा।
इस पर जस्टिस समीर जैन ने प्रमोशन पर सीधे कोई आदेश देने के बजाय याचिकाकर्ता अशोक कुमार को RCSAT जाने की छूट दे दी।
हाईकोर्ट ने कहा कि RCSAT के काम शुरू करने के बाद अशोक कुमार 15 कार्य दिवस के भीतर वहां आवेदन या अपील दाखिल कर सकते हैं। ट्रिब्यूनल को मामले पर जल्द सुनवाई करने और संभव हो तो आवेदन दाखिल होने के तीन महीने के भीतर फैसला करने के निर्देश दिए गए हैं।
जूनियर कर्मचारियों को प्रमोशन मिला, कांस्टेबल ने उठाया सवाल
मामला राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल (बैंड) के पद पर तैनात अशोक कुमार से जुड़ा है। उन्होंने हेड कांस्टेबल (बैंड) के पद पर 2018-19, 2019-20 और 2020-21 के प्रमोशन को चुनौती दी थी।
अशोक कुमार का कहना था कि वह संबंधित कर्मचारियों से सीनियर और प्रमोशन के लिए योग्य थे। इसके बावजूद उन्हें प्रमोशन के लिए विचार में शामिल नहीं किया गया, जबकि उनसे जूनियर कर्मचारियों को प्रमोशन दे दिया गया।
वरिष्ठता सूची के आधार पर प्रमोशन की मांग की
अशोक कुमार ने हाईकोर्ट से 2018-19, 2019-20 और 2020-21 की प्रमोशन प्रक्रिया का पूरा रिकॉर्ड मंगाने की मांग की थी। इसमें सीनियरिटी लिस्ट, चयन बोर्ड की कार्यवाही, लिखित परीक्षा, आउटडोर टेस्ट, इंटरव्यू, चयन सूची और प्रमोशन आदेश शामिल थे।
उन्होंने 21 मई 2026 की संशोधित स्थायी सीनियरिटी लिस्ट के आधार पर हेड कांस्टेबल (बैंड) पद पर अपनी उम्मीदवारी पर दोबारा विचार करने की मांग की थी।
इसके साथ ही उनका कहा था कि उनकी वरिष्ठता और योग्यता को देखते हुए रिव्यू सिलेक्शन बोर्ड या रिव्यू डीपीसी गठित की जाए। अगर उन्हें प्रमोशन के लिए योग्य पाया जाता है तो उन्हें उसी तारीख से प्रमोशन दिया जाए, जिस दिन उनसे जूनियर कर्मचारी को प्रमोशन मिला था। साथ ही, प्रमोशन के बाद मिलने वाले दूसरे सेवा लाभ भी देने की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ता ने RCSAT के काम नहीं करने की बात कही
अशोक कुमार की ओर से कहा गया कि सीनियरिटी और प्रमोशन से जुड़े मामले RCSAT यानी राजस्थान सिविल सर्विसेज अपीलेट ट्रिब्यूनल के दायरे में आते हैं। लेकिन उस समय ट्रिब्यूनल प्रभावी तरीके से काम नहीं कर रहा था। इसलिए उन्होंने हाईकोर्ट से सीधे राहत देने की मांग की।
वहीं सरकार की ओर से इसका विरोध किया गया। सरकार ने बताया कि RCSAT में सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है और नियुक्ति के बाद ट्रिब्यूनल अगले 15 दिनों में काम करना शुरू कर देगा।
इस पर हाईकोर्ट ने माना कि RCSAT जल्द ही काम करने लगेगा और वहां इस मामले की सुनवाई के लिए वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध होगा।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने मामले की मेरिट पर सुनवाई करने के बजाय अशोक कुमार को RCSAT जाने की छूट दे दी।
हाईकोर्ट ने कहा- प्रमोशन विवाद ट्रिब्यूनल में उठाएं
वहीं हाईकोर्ट ने मामले की मेरिट पर सुनवाई करने के बजाय अशोक कुमार को RCSAT जाने की छूट दी।
हाईकोर्ट ने कहा कि किसी मामले में वैकल्पिक कानूनी रास्ता मौजूद होने पर भी हाईकोर्ट की रिट पावर पूरी तरह खत्म नहीं होती। हालांकि, रिट पावर का इस्तेमाल करना हाईकोर्ट के विवेक पर निर्भर करता है।
ऐसे में अगर विवाद सुनने के लिए कोई दूसरा प्रभावी कानूनी मंच उपलब्ध है, तो हाईकोर्ट सीधे मामले में हस्तक्षेप करने से बच सकता है। इस मामले में कोर्ट ने RCSAT को ऐसा वैकल्पिक मंच माना।
चूंकि सरकार ने बताया था कि RCSAT अगले 15 दिनों में सदस्यों की नियुक्ति के बाद काम करना शुरू कर देगा, हाईकोर्ट ने सीनियरिटी और प्रमोशन के विवाद पर खुद कोई फैसला नहीं दिया।
15 कार्यदिवस में RCSAT जाने की छूट
हाईकोर्ट ने अशोक कुमार को RCSAT के काम शुरू करने की तारीख से 15 कार्यदिवस के भीतर उचित अपील या आवेदन दाखिल करने की छूट दी है।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि ट्रिब्यूनल मामले पर उसके गुण-दोष यानी मेरिट के आधार पर सुनवाई करे और जल्द फैसला करे।
हाईकोर्ट ने RCSAT से कहा है कि वह मामले का जल्द से जल्द निपटारा करे और संभव हो तो आवेदन दाखिल होने की तारीख से 3 महीने के भीतर फैसला करे।
प्रमोशन पर हाईकोर्ट ने नहीं दिया फैसला
हाईकोर्ट ने अशोक कुमार की सीनियरिटी, प्रमोशन और उनसे जूनियर कर्मचारियों को प्रमोशन दिए जाने से जुड़े मूल विवाद पर कोई अंतिम राय नहीं दी।
याचिका का निस्तारण करते हुए कोर्ट ने उन्हें अपनी शिकायत RCSAT के सामने रखने की छूट दी। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके आदेश में की गई टिप्पणियों के आधार पर किसी भी पक्ष को कोई नुकसान नहीं होगा।
अब अशोक कुमार के प्रमोशन और सीनियरिटी से जुड़े मूल दावे पर सुनवाई RCSAT में होगी।