जयपुर/जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में प्रशासनिक सादगी और ईंधन बचत को लेकर एक नई पहल देखने को मिल रही है।
राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने अब अपने सफर में “कार पुलिंग” मॉडल अपनाते हुए जोधपुर से जयपुर और जयपुर से जोधपुर की यात्रा एक ही वाहन में करना शुरू कर दिया है।
इस कदम के बाद पहले जहां मुख्य न्यायाधीश के साथ कई वाहनों का काफिला चलता था, वहीं अब पूरा सफर एक ही कार में पूरा किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार अंतिम कार्यदिवस पर बुधवार को राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ में सुनवाई के बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश दोपहर बाद जयपुर के लिए केवल एक ही वाहन से रवाना हुए.
उनके साथ प्रमुख निजी सचिव अजयसिंह भी उसी कार में सफर कर जयपुर पहुंचे।

बड़े बदलाव का प्रयास
यह बदलाव केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं है, बल्कि हाईकोर्ट प्रशासन द्वारा ईंधन बचत और सादगी का व्यावहारिक संदेश देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
गौरतलब है कि मुख्य न्यायाधीश ने हाल ही में अपने एस्कॉर्ट वाहन को भी छोड़ दिया था। अब उन्होंने इससे एक कदम आगे बढ़ाते हुए अपने साथ चलने वाले अन्य वाहनों की संख्या भी कम कर दी है।
पहले जहां सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों से कई गाड़ियां साथ चलती थीं, अब पूरा सफर सीमित संसाधनों में किया जा रहा है।
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रजिस्ट्रार जनरल और रजिस्ट्री भी शामिल
सिर्फ मुख्य न्यायाधीश ही नहीं, बल्कि राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी इस पहल में शामिल हो गए हैं।
रजिस्ट्रार जनरल चंंचल मिश्रा सहित रजिस्ट्री में शामिल अधिकांश अधिकारी कार पुलिंग कर जयपुर से जोधपुर और जोधपुर से जयपुर की यात्रा कर रहे हैं.
24 मई को राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर से रजिस्ट्रार जनरल के साथ ही विजिलेंस रजिस्ट्रार अनिल बेनीवाल सहित कई अधिकारी कार पुलिंग कर एक ही वाहन से जोधपुर पहुंचे थे.
वही अंतिम कार्यदिवस के बाद भी सभी अधिकारी एक ही वाहन से जोधपुर से जयपुर पहुंचे
राजस्थान हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल चंचल मिश्रा, रजिस्ट्रार विजिलेंस अनिल बेनीवाल और उनका स्टाफ भी एक ही वाहन में यात्रा कर रहे हैं।
अनावश्यक वाहनों के का कम उपयोग
बताया जा रहा है कि जोधपुर से जयपुर और जयपुर से जोधपुर के बीच होने वाली प्रशासनिक यात्राओं में अब अनावश्यक वाहनों के उपयोग को कम किया जा रहा है।
हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से यह संदेश स्पष्ट रूप से दिया जा रहा है कि सरकारी संसाधनों का उपयोग जरूरत के अनुसार ही होना चाहिए।
बढ़ती ईंधन कीमतों और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता को देखते हुए यह पहल न्यायपालिका के भीतर एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में देखी जा रही है।
राजस्थान हाईकोर्ट में पिछले कुछ समय से सादगी और पर्यावरण संरक्षण को लेकर कई प्रतीकात्मक कदम भी सामने आए हैं।
इसी क्रम में जस्टिस समीर जैन लगातार पिछले कई दिनों से गांधीनगर स्थित आवास से राजस्थान हाईकोर्ट तक साइकिल से आ-जा रहे हैं।
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लगातार दे रहे हैं संदेश
न्यायिक गलियारों में उनकी इस पहल की भी काफी चर्चा हो रही है।
राजसमंद जिला अदालत के सभी जज अपने आवास से कोर्ट परिसर तक प्रतिदिन पैदल आ रहे हैं.
अब मुख्य न्यायाधीश द्वारा कार पुलिंग अपनाने के बाद यह संदेश और मजबूत हुआ है कि उच्च पदों पर बैठे लोग यदि स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करें तो प्रशासनिक व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
न्यायपालिका के भीतर शुरू हुई यह पहल केवल फ्यूल बचत तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे “सिस्टम में सादगी” और “जिम्मेदार प्रशासन” की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन का यह कदम अब अन्य सरकारी विभागों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।