हाईकोर्ट द्वारा भर्ती रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ दायर SLP पर होगी सुनवाई,
नई दिल्ली/जयपुर। बहुचर्चित सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती 2021 मामले में आज Supreme Court of India में अहम सुनवाई होने जा रही है।
राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा भर्ती प्रक्रिया को रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए दायर स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) पर सुनवाई तय की गई है।
इस मामले को लेकर हजारों अभ्यर्थियों की उम्मीदें और चिंताएं एक साथ बढ़ गई हैं।
यह महत्वपूर्ण सुनवाई जस्टिस Dipankar Datta और जस्टिस Satish Chandra Sharma की पीठ द्वारा की जाएगी।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट की शरण
गौरतलब है कि Rajasthan High Court ने 4 अप्रैल को एसआई भर्ती 2021 को रद्द करते हुए एकलपीठ के फैसले को बरकरार रखा था।
कोर्ट ने अपने आदेश में पेपर लीक और विभिन्न अनियमितताओं को गंभीर मानते हुए पूरी चयन प्रक्रिया को निरस्त कर दिया था।
एकलपीठ के बाद खंडपीठ द्वारा भी इस निर्णय को कायम रखने से चयनित अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा।
इसके बाद चयनित अभ्यर्थियों, जिनमें पायल शर्मा व अन्य शामिल हैं, ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और भर्ती को बचाने की अपील की।
याचिका में क्या दलीलें दी गईं?
चयनित अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता क्रिस्टी जैन ने याचिका दायर करते हुए कहा है कि सभी अभ्यर्थियों को एक साथ दंडित करना न्यायसंगत नहीं है।
याचिका में तर्क दिया गया है कि जिन अभ्यर्थियों का चयन निष्पक्ष तरीके से हुआ है, उन्हें सेवा में बनाए रखा जाना चाहिए, जबकि दोषियों के खिलाफ अलग से कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद परीक्षा पास की है और पूरी भर्ती रद्द करना उनके साथ अन्याय है।
अचयनित अभ्यर्थियों की कैवियट
वहीं दूसरी ओर अचयनित अभ्यर्थियों ने भी अपनी ओर से मजबूत कानूनी तैयारी कर ली है।
उनकी ओर से अधिवक्ता ऋषभ संचेती और हरेन्द्र नील के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में कैवियट दायर की गई है।
कैवियट का अर्थ है कि अदालत बिना संबंधित पक्ष को सुने कोई भी आदेश पारित नहीं कर सकती।
अचयनित अभ्यर्थियों ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि उन्हें सुने बिना कोई भी निर्णय न लिया जाए।
क्यों महत्वपूर्ण है आज की सुनवाई?
आज की सुनवाई कई मायनों में अहम मानी जा रही है।
यह न केवल एसआई भर्ती 2021 के भविष्य को तय कर सकती है, बल्कि यह भी स्पष्ट कर सकती है कि पेपर लीक जैसे मामलों में पूरी भर्ती रद्द करना उचित है या नहीं।
साथ ही, यह निर्णय आने वाले समय में अन्य भर्ती परीक्षाओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल बन सकता है।
कैसे शुरू हुआ विवाद
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित SI भर्ती परीक्षा 2021 राज्य की महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक थी।
हजारों अभ्यर्थियों ने इसमें हिस्सा लिया, लेकिन परीक्षा के बाद ही अनियमितताओं की शिकायतें सामने आने लगीं।
धीरे-धीरे यह मामला केवल संदेह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ठोस साक्ष्यों के साथ सामने आया कि परीक्षा प्रश्नपत्र लीक हुआ था, संगठित तरीके से अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाया गया और कुछ चयनित उम्मीदवारों की भूमिका संदिग्ध थी।
जैसा कि अदालत के दस्तावेज़ में दर्शाया गया है, इस मामले में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को पक्षकार बनाया गया, जिनमें कई चयनित उम्मीदवार भी शामिल थे।
SI भर्ती -2021 पेपर लीक की तारीखें
सबसे पहले पेपर लीक का आरोप लगाते हुए कैलाश चन्द्र शर्मा के साथ कई अभ्यर्थियों ने नवंबर 2024 में याचिकाएं दायर कीं।
राज्य सरकार ने मंत्रिमंडलीय उप समिति की अनुशंसा, एसआईटी के चेयरमैन की 26 जून की संशोधित रिपोर्ट और 27 जून 2025 की सांख्यिकी विभाग की रिपोर्ट पर अपना जवाब पेश किया।
राज्य सरकार ने 1 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट में शपथ पत्र दायर कर कहा कि वह भर्ती रद्द नहीं कर रही।
एकलपीठ ने सभी पक्षकारों की बहस सुनने के बाद 14 अगस्त 2025 को फैसला सुरक्षित रखा।
28 अगस्त 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट की एकपीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए भर्ती को रद्द कर दिया।
एकलपीठ के फैसले के खिलाफ चयनित अभ्यर्थियों और राज्य सरकार ने अपील दायर की।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 8 सितंबर 2025 को एकलपीठ के भर्ती रद्द करने वाले आदेश पर रोक लगाई, लेकिन चयनित अभ्यर्थियों को फील्ड ट्रेनिंग कराने की छूट दी थी।
खंडपीठ के अंतरिम आदेश को मूल याचिकाकर्ता कैलाश चन्द्र शर्मा सहित अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट ने 24 सितंबर 2025 के आदेश से चयनित अभ्यर्थियों की ट्रेनिंग पर रोक लगाते हुए हाईकोर्ट को तीन महीने में अपीलों का निपटारा करने के लिए कहा था।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार, प्रार्थी पक्ष व चयनित अभ्यर्थियों की बहस 19 जनवरी 2026 को पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा।
राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 4 अप्रैल 2026 को फैसला सुनाते हुए एकलपीठ के आदेश को बरकरार रखा और भर्ती को रद्द कर दिया।