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राजस्थान की ‘विद्यालय सहायक’ भर्ती विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में मामला खत्म: सरकार ने पुरानी भर्ती छोड़ी, सभी अपीलें हुईं निस्तारित

Supreme Court Seeks Response on Plea Alleging Medical Data Leak of 1.5 Lakh People

नई दिल्ली: राजस्थान की चर्चित विद्यालय सहायक भर्ती से जुड़े लंबे कानूनी विवाद का आखिरकार निपटारा हो गया और सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई समाप्त कर दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब राज्य सरकार पहले ही इस भर्ती प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला कर चुकी है और उसकी जगह पंचायत सहायक भर्ती के लिए नए नियम लागू कर दिए गए हैं, तो लंबित अपीलों पर फैसला देने का अब कोई औचित्य नहीं रह जाता।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में साफ कहा कि जब अपील का मुद्दा ही खत्म हो जाए और उसमें अब कोई राहत देने की जरूरत न बचे, तो ऐसी अपील “इन्फ्रक्टुअस” यानी बेअसर मानकर खत्म कर दी जाती है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में लंबित आवेदन (पेंडिंग एप्लिकेशन) भी अपने आप निपट जाते हैं।

इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी अपीलों को निस्तारित कर दिया।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने आदेश में कहा कि अपील अब सुनवाई योग्य नहीं रह गई है, इसलिए मुख्य अपीलों के निस्तारण के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़ी सभी लंबित अर्जियां भी समाप्त कर दीं।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब मूल विवाद ही खत्म हो गया है, तो उन पर लंबित आवेदन अलग से विचार के लिए नहीं बचते।

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क्या था मामला?

यह विवाद राजस्थान सरकार की विद्यालय सहायक भर्ती से जुड़ा था।

भर्ती प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग याचिकाएं दाखिल हुईं और मामला आखिरकार सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।

इस दौरान राजस्थान सरकार और अन्य पक्षों की ओर से बड़ी संख्या में अपीलें भी दायर की गईं।

सुनवाई के दौरान सभी पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने अब विद्यालय सहायक भर्ती को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला कर लिया है।

इसकी जगह पंचायत सहायक भर्ती के लिए नए नियम लागू कर दिए गए हैं। ऐसे में पुरानी भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा मूल विवाद ही समाप्त हो गया और अपीलों पर फैसला देने की जरूरत नहीं रह गई।

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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब सभी पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि राजस्थान सरकार विद्यालय सहायक भर्ती को आगे नहीं बढ़ाएगी और उसकी जगह पंचायत सहायक भर्ती के लिए नए नियम लागू कर दिए गए हैं, तो इन अपीलों में फैसला देने के लिए अब कुछ भी बाकी नहीं रह गया है।

इसी आधार पर कोर्ट ने सभी अपीलों को निष्प्रभावी (इन्फ्रक्टुअस) मानते हुए निस्तारित कर दिया। साथ ही मामले से जुड़ी सभी लंबित अर्जियां भी समाप्त कर दीं।

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भर्ती की वैधता पर कोई राय नहीं दी

इस आदेश की खास बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया की वैधता या उससे जुड़े किसी कानूनी मुद्दे पर कोई फैसला नहीं दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने केवल यह माना कि सरकार के फैसले के बाद मूल विवाद ही समाप्त हो गया है।

यानी सुप्रीम कोर्ट ने यह नहीं कहा कि विद्यालय सहायक भर्ती सही थी या गलत।

सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ इतना माना कि जब सरकार स्वयं उस भर्ती प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ा रही है, तब उस विवाद पर निर्णय देने की आवश्यकता नहीं रह जाती।

सरकार के फैसले से खत्म हुआ विवाद

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से साफ है कि इस मामले का अंत किसी कानूनी निष्कर्ष की वजह से नहीं, बल्कि राज्य सरकार की नई नीति के कारण हुआ।

सरराजस्थान सरकार ने विद्यालय सहायक भर्ती को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला लेकर पंचायत सहायक भर्ती के लिए नए नियम लागू कर दिए। इसके बाद पुरानी भर्ती से जुड़े विवाद का कोई व्यावहारिक महत्व नहीं रह गया।

इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने मामले में कोई विस्तृत कानूनी टिप्पणी किए बिना सभी अपीलों का निस्तारण कर दिया।

इसके साथ ही वर्षों से लंबित यह भर्ती विवाद भी सुप्रीम कोर्ट के स्तर पर समाप्त हो गया।

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