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राज्य के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास को सुप्रीम कोर्ट कोर्ट की अवमानना से बड़ी राहत, अवमानना याचिका खारिज

Supreme Court Dismisses Contempt Plea Against Rajasthan Chief Secretary Over Consumer Commission Tenure Issue

नई दिल्ली। राजस्थान के मुख्य सचिव वी श्रिनिवास को अदालत की अवमानना के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में उपभोक्ता आयोगों के कार्यरत अध्यक्षों और सदस्यों द्वारा दायर की गई अवमानना याचिका को खारिज करते हुए मुख्य सचिव को राहत दी हैं वही सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को राजस्थान हाईकोर्ट जाने की छूट दी हैं.

याचिका में मुख्य सचिव श्रीनिवास के खिलाफ कथित रूप से सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों की अवहेलना का आरोप लगाया गया था.

जस्टिस Justice M.M. Sundresh और Justice N. Kotiswar Singh ने याचिकाओं पर सुनवाई के बाद मुख्य सचिव के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने से इनकार कर दिया।

हालांकि, पीठ ने याचिकाकर्ताओं को यह स्वतंत्रता प्रदान की कि यदि उन्हें सेवा निरंतरता या पूर्व आदेश के क्रियान्वयन को लेकर कोई व्यक्तिगत अथवा शेष शिकायत है तो वे संबंधित क्षेत्राधिकार राजस्थान हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं।

ये हैं मामला?

यह अवमानना याचिका जयश्री शर्मा सहित अन्य राजस्थान के आठ कार्यरत जिला उपभोक्ता आयोग (District Consumer Disputes Redressal Commission) के अधिकारियों द्वारा दायर की गई थी।

याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि सुप्रीम कोर्ट ने 21 मई 2025 को दिए गए अपने ऐतिहासिक फैसले Ganeshkumar Rajeshwarrao Selukar v. Mahendra Bhaskar Limaye—में स्पष्ट आदेश दिया था कि उपभोक्ता आयोगों के कार्यरत अध्यक्षों और सदस्यों को उनकी निर्धारित अवधि पूरी होने तक अथवा केंद्र सरकार द्वारा नए नियम अधिसूचित कर नई भर्ती प्रक्रिया शुरू होने तक कार्य जारी रखने दिया जाए।

याचिका में कहा गया कि यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 141 और 144 के तहत बाध्यकारी है।

इसके बावजूद राजस्थान सरकार ने नई नियमावली अधिसूचित नहीं की और न ही सभी कार्यरत सदस्यों की एकरूप निरंतरता सुनिश्चित की, जिससे जिला उपभोक्ता आयोगों के कामकाज में व्यवधान उत्पन्न हुआ।

याचिकाकर्ताओं की दलील

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शुभम जैन ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि बार-बार अभ्यावेदन दिए जाने के बावजूद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशो का पालन नहीं किया।

इससे न केवल सेवा सुरक्षा प्रभावित हुई बल्कि उपभोक्ता आयोग की व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।

याचिका में यह भी कहा गया कि यदि कार्यरत अध्यक्षों और सदस्यों की निरंतरता पर स्पष्टता नहीं होगी तो उपभोक्ता आयोगों में लंबित मामलों की सुनवाई बाधित होगी और आम उपभोक्ताओं को न्याय मिलने में देरी होगी।

राज्य सरकार का पक्ष

राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने सरकार पक्ष रखते हुए यह स्पष्ट किया गया कि मामले में जानबूझकर आदेश की अवहेलना नहीं की गई है।

सरकार ने कहा कि इस मामले में सरकार अपने स्तर पर नई नियमावली को लेकर कवायद जारी हैं

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह माना कि अवमानना कार्यवाही प्रारंभ करने का आधार पर्याप्त नहीं है। अदालत ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति विशेष को सेवा से संबंधित या आदेश के क्रियान्वयन से जुड़ी कोई शिकायत है, तो उसके लिए उपयुक्त उपाय उपलब्ध हैं।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

पीठ ने अपने आदेश में अवमानना याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि इस स्तर पर मुख्य सचिव के विरुद्ध अवमानना की कार्यवाही शुरू करना उचित नहीं है।

हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता अपने शेष या व्यक्तिगत विवादों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

इस आदेश के साथ ही अवमानना कार्यवाही समाप्त कर दी गयी, लेकिन संबंधित अधिकारियों के लिए न्यायिक उपचार का मार्ग खुला रखा गया है।

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