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एकल पट्टा प्रकरण में बड़ा फैसला- Supreme Court ने शांति धारीवाल की SLP खारिज की, गिरफ्तारी पर रोक जारी

Supreme Court Grants Major Relief to Former Zee Media Channel Head Ashish Dave, Issues Notice to Rajasthan Government and Zee Media

नई दिल्ली, 1 दिसंबर

पूर्ववर्ती राजस्थान की कांग्रेस सरकार में मंत्री रह चुके शांति धारीवाल की याचिका को Supreme Court ने खारिज कर दिया है।

जयपुर शहर के 500 करोड़ रुपये के एकल पट्टा (Single Lease) घोटाले के मामले में धारीवाल ने Rajasthan High court के 1 नवंबर 2025 सहित कई आदेशों को चुनौती दी थी।

सोमवार को इस विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस जे.के. महेश्वरी और जस्टिस विजय विश्नोई की पीठ ने Rajasthan Highcourt के आदेश में हस्तक्षेप से इंकार किया है।

Supreme Court ने धारीवाल की विशेष अनुमति याचिका (SLP) को सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया।

साथ ही यह स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट में लंबित प्रोटेस्ट पिटीशनों पर फैसला होने तक धारीवाल के खिलाफ कोई दमनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी और धारीवाल की गिरफ्तारी पर लगी रोक जारी रहेगी।

हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती

धारीवाल की याचिका में राजस्थान हाईकोर्ट के 1 नवंबर 2025 के आदेशों को चुनौती दी गई थी जिसमें इन आदेशों को चुनौती दी गई थी—

राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर – आदेश 01.11.2025, SB Crl MP 5353/2022 (धारीवाल मामला)
राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर – आदेश 01.11.2025, SB Crl RP 114/2022 (जी.एस. सांधू)
राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर – आदेश 01.11.2025, SB Crl MP 653/2025 (ओंकार माल सैनी)
राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर – आदेश 15.11.2025
राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर – आदेश 12.05.2025
ट्रायल कोर्ट जयपुर – आदेश 18.04.2022 (ACB को पुनः जांच के निर्देश)

मामले की शुरुआत

इस विवाद की जड़ जयपुर की एक सहकारी समिति की उस भूमि से जुड़ी है, जहां 175 प्लॉट का एक आवासीय प्रोजेक्ट प्रस्तावित था।

बाद में अधिकांश भू-धारकों ने अपने हिस्से एम/एस गणपति कंस्ट्रक्शन नामक निजी फर्म को बेच दिए, जिसके बाद फर्म को भूमि पर एकल पट्टा जारी करने की मांग की गई।

जमीन पूरी तरह निजी थी, सरकारी नहीं। जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) द्वारा उसका उपयोग परिवर्तन (90B के तहत) किया गया था।

भूमि विकास का प्रस्ताव पहले JDA के अधिकारियों और फिर राज्य सरकार के पास गया।

वर्ष 2011 में शांति धारीवाल, जो उस समय राजस्थान में शहरी विकास मंत्री थे, ने विभागीय नोटशीटों और अधिकारियों की सिफारिश पर एकल पट्टा जारी करने को मंजूरी दी।

राजनीतिक बदलाव और जांच का जन्म

2013 में राज्य सरकार बदलने के बाद विरोधी पक्षों द्वारा इस भूमि आवंटन को “भ्रष्टाचार”, “पद के दुरुपयोग” और “अनियमित फाइल प्रोसेसिंग” बताते हुए शिकायतें दर्ज कराई गईं।

शिकायत पर ACB ने 2014 में FIR 422/2014 दर्ज करते हुए कई अधिकारियों एवं निजी लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की।

पहले और दूसरे चरण की चार्जशीट में शांति धारीवाल का नाम नहीं था, जबकि धारीवाल के खिलाफ जांच 173(8) CrPC के तहत लंबित रखी गई।

मामले में तीन जांच के बाद तीसरा क्लोजर जारी करते हुए धारीवाल पर कोई अपराध साबित नहीं होना बताया गया।

मामले की तीन अलग-अलग पुलिस/ACB जांचों में अधिकारियों और अभियोजन विभाग ने एक समान निष्कर्ष निकाला कि धारीवाल ने निर्णय अकेले नहीं लिया।

ट्रायल कोर्ट का उलट फैसला

हालाँकि 2019 की क्लोजर रिपोर्ट के दो साल बाद शिकायतकर्ता की “प्रोटेस्ट पिटीशन” ट्रायल कोर्ट में दायर की गई। ट्रायल कोर्ट ने 18 अप्रैल 2022 को क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर दी, लेकिन ACB को पुनः जांच का आदेश देते हुए कहा कि कुछ बिंदुओं पर आगे जांच आवश्यक है।

यहीं से मामले में बड़ा बदलाव आया और धारीवाल तथा जी.एस. सांधू, ओंकार माल सैनी ने ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिकाएँ दायर कीं।

हाईकोर्ट का आदेश

वर्ष 2022 में हाईकोर्ट के जस्टिस एन.एस. ढड्ढा ने धारीवाल के पक्ष में निर्णय दिया और कार्यवाही खत्म कर दी।

लेकिन इंटरवेनर अशोक पाठक ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

वर्तमान CJI और तत्कालीन जस्टिस सूर्यकांत तथा जस्टिस उज्जल भुयान ने हाईकोर्ट पर पर्याप्त सुनवाई किए बिना फैसला देने की टिप्पणी करते हुए मामला वापस हाईकोर्ट को भेज दिया।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 12 मई 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट ने फिर सुनवाई शुरू की।

1 नवंबर 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले में क्लोजर रिपोर्ट हटाने का फैसला बरकरार रखा और ACB को फिर जांच की अनुमति दे दी।

Rajasthan High court के इसी आदेश को अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।

सोमवार को सुनवाई के दौरान शांति धारीवाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, राजस्थान सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, अशोक पाठक की ओर से आदित्य विक्रम सिंह ने पैरवी की।

ट्रायल कोर्ट करेगा निर्णय

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब यह मामला फिर से जयपुर विशेष अदालत पीसी एक्ट में सुनवाई के लिए आ गया है।

अधीनस्थ अदालत अब क्लोजर रिपोर्टों के खिलाफ दायर प्रोटेस्ट पिटीशन पर सुनवाई कर निर्णय लेगी, वहीं राजस्थान राज्य द्वारा क्लोजर रिपोर्ट वापस लेने के लिए दायर आवेदन पर सुनवाई के बाद फैसला करेगी।

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