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रिलायंस फाउंडेशन के वाइल्डलाइफ रेस्क्यू, रिहैबिलिटेशन सेंटर वनतारा की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बनाई SIT

नई दिल्ली, 26 अगस्त।
कोल्हापुर के जैन मठ में 32 साल से रह रही हथिनी ‘माधुरी’ से शुरू हुआ विवाद अब वनतारा के लिए एसआईटी जांच तक पहुंचा गया हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को रिलायंस फाउंडेशन के गुजरात के जामनगर में वनतारा वाइल्डलाइफ रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर की जांच के लिए 4 सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित करने का आदेश दिया हैं.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित इस एसआईटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस जे. चेलमेश्वर करेंगे.

इसके साथ ही एसआईटी के सदस्य के रूप में तेलगांना हाईकोर्ट पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस राघवेंद्र चौहान, पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर हेमंत नागराले और कस्टम्स अधिकारी अनिश गुप्ता शामिल किया गया हैं.

कोल्हापुर की मशहूर हथिनी (माधुरी) की वनतारा में शिफ्टिंग के विवाद के बाद इस मामले में याचिका दायर की गयी.

जस्टिस पंकज मित्तल और पीबी वराले की पीठ ने SIT के गठन का आदेश जारी करते हुए कहा कि SIT जानवरों को भारत और विदेश से लाने में वन्यजीव संरक्षण कानून और अंतरराष्ट्रीय संधियों का पालन होने या नहीं होने के मामले की जांच करेगी.

इस मामले में संपूर्ण रिपोर्ट बनाकर एसआई को 12 सितंबर तक कोर्ट में पेश करनी होगी.

क्या है मामला

36 वर्षिय हथिनी माधुरी 1992 से स्वस्तिश्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी संस्थान मठ में रह रही थी. पेटा इंडिया कि ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए 16 जुलाई को बॉम्बे हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि हथिनी माधुरी को वनतारा में शिफ्ट किया जाए.

हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी 29 जुलाई को अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा था.

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आम जनता में व्यापक तौर पर विरोध प्रदर्शन ​शुरू हो गए. मामला इतना बढ गया कि वनतारा को अपनी तरफ से भी बयान जारी करना पड़ा।

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