नई दिल्ली: राजस्थान के एनडीपीएस (मादक पदार्थ) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को बड़ी राहत देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट का जमानत से इनकार करने वाला आदेश रद्द कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपी करीब 11 महीने से जेल में है, जबकि मामले में 24 गवाहों में से अब तक केवल 3 की ही गवाही हुई है और ट्रायल पूरा होने में अभी समय लगेगा।
इन परिस्थितियों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को जमानत देने का आदेश दिया।
जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस अरुण पल्ली की पीठ ने यह आदेश राजस्थान के अजमेर जिले के अराई थाना में दर्ज एनडीपीएस एक्ट के मामले में सुनाया।
आरोपी राहुल कसोटिया ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी दूसरी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार की ओर से दाखिल काउंटर एफिडेविट और मामले से जुड़े रिकॉर्ड पर गौर किया।
इसके बाद कोर्ट ने कहा कि आरोपी करीब 11 महीने से जेल में है, ट्रायल पूरा होने में अभी समय लगेगा और इन परिस्थितियों को देखते हुए उसे जमानत दी जा सकती है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला राजस्थान के अजमेर जिले के अराई थाना में दर्ज एनडीपीएस एक्ट के एक मामले से जुड़ा है।
पुलिस का आरोप है कि जिस वाहन से कथित मादक पदार्थ बरामद हुआ, वह राहुल कसोटिया के नाम पर पंजीकृत था।
इसी मामले में उनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/15 के तहत केस दर्ज किया गया। हालांकि आरोपी का कहना है कि बरामदगी के समय वह वाहन में मौजूद नहीं था और उसने वाहन किराये पर दिया हुआ था।
राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने 17 अप्रैल 2026 को उसकी दूसरी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
इसके बाद आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या माना अहम?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस वाहन से कथित मादक पदार्थ बरामद हुआ, उसका मालिक आरोपी है।
हालांकि, बरामदगी के समय आरोपी वाहन में मौजूद नहीं था। आरोपी का कहना है कि उसने वाहन किराये पर दिया था और उसका मामले से कोई संबंध नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन दलीलों की सच्चाई का फैसला ट्रायल के दौरान होगा।
फिलहाल इस स्तर पर इन पर कोई अंतिम राय नहीं दी जा सकती।
11 महीने से जेल, ट्रायल भी धीमा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा भी कि आरोपी करीब 11 महीने से जेल में है। वहीं, मामले में 24 गवाह हैं, लेकिन अब तक केवल 3 गवाहों के बयान ही दर्ज हो सके हैं।
ऐसे में ट्रायल पूरा होने में अभी काफी समय लगने की संभावना है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोपी की हिरासत की अवधि, मामले की परिस्थितियां और ट्रायल की रफ्तार को देखते हुए उसे जमानत दी जा सकती है।
धारा 37 पर भी किया विचार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जमानत पर फैसला करते समय एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 में तय शर्तों को भी ध्यान में रखा गया है।
सभी परिस्थितियों पर विचार करने के बाद कोर्ट ने आरोपी को ट्रायल कोर्ट की शर्तों के अनुसार जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अनुमति याचिका का निपटारा कर दिया और लंबित सभी अर्जियां भी समाप्त कर दीं।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले के आरोपों की सच्चाई पर कोई अंतिम राय नहीं दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ इतना माना कि मौजूदा परिस्थितियों में आरोपी लंबे समय से जेल में है और ट्रायल जल्द पूरा होने की संभावना नहीं है।
इसलिए फिलहाल उसे जमानत दी जा सकती है। अब मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में आगे जारी रहेगी।