नई दिल्ली। राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता द्वारा उठाई गई चिंताओं के मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच उचित संस्थागत स्तर पर की जा रही है और किसी भी आरोप का फैसला सार्वजनिक बहस या मीडिया में नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी किए गए बयान के अनुसार, CJI सूर्यकांत ने कहा कि वे और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के अन्य सदस्य शेष हाईकोर्टों में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर पहले से काम कर रहे हैं।
उन्होंने जस्टिस संदीप मेहता के पत्रों में उठाई गई चिंताओं का भी संज्ञान लिया है।
आरोपों को संस्थागत प्रक्रिया से ही निपटाया जाएगा
CJI ने जोर देकर कहा कि किसी मौजूदा न्यायाधीश के खिलाफ लगाए गए आरोपों से स्थापित संस्थागत प्रक्रिया के तहत ही निपटा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि केवल आरोप लगाए जाने को ही संबंधित न्यायाधीश के खिलाफ निष्कर्ष या दोष सिद्ध होने के रूप में नहीं माना जा सकता।
संबंधित न्यायाधीश को किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले अपना पक्ष रखने का पूरा और निष्पक्ष अवसर मिलना चाहिए।
जस्टिस मेहता के पत्र और जस्टिस शर्मा के जवाब पर होगा विचार
बयान में कहा गया है कि मामले की उचित स्तर पर जांच की जा रही है। इस दौरान जस्टिस संदीप मेहता द्वारा उपलब्ध कराई गई सामग्री के साथ-साथ जस्टिस शर्मा के जवाब पर भी विचार किया जाएगा।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के कार्यकाल को जारी रखने, स्थानांतरण या अन्य प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़ा कोई भी फैसला सक्षम संस्थागत प्राधिकरण द्वारा सभी तथ्यों पर विचार के बाद लिया जाएगा।
मीडिया में प्रतिस्पर्धी दावों से तय नहीं होंगे न्यायिक मामलों के आरोप
CJI सूर्यकांत ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीशों से संबंधित व्यक्तिगत शिकायतों या आरोपों को मीडिया में एक-दूसरे के प्रतिस्पर्धी दावों के आधार पर तय करने की अनुमति नहीं दे सकता।
उन्होंने न्यायपालिका से जुड़े ऐसे संवेदनशील मामलों में स्थापित प्रक्रिया और निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांतों के पालन पर जोर दिया।
गौरतलब है कि जस्टिस संदीप मेहता ने राजस्थान हाईकोर्ट के प्रशासन और मामलों की लिस्टिंग को लेकर CJI को पत्र लिखकर गंभीर चिंताएं जताई थीं।
