जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में जोधपुर और जयपुर के न्यायाधीशों के तबादलों को लेकर अब अधिवक्ता समुदाय ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है।
जोधपुर मुख्यपीठ के न्यायाधीश जस्टिस फरजंद अली को अग्रिम आदेशों तक जयपुर स्थानांतरित किए जाने के विरोध में अधिवक्ताओं का अभियान सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है।

बुधवार सुबह सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संदीप मेहता द्वारा राजस्थान के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के संबंध में भारत के मुख्य न्यायाधीश को लिखे गए पत्रों की जानकारी सामने आने के बाद जोधपुर के अधिवक्ता भी मुखर हो गए हैं।
इसके बाद से ही हाईकोर्ट के प्रशासनिक फैसलों को लेकर अधिवक्ता समुदाय में हलचल तेज हो गई है।
‘जस्टिस फरजंद अली को जोधपुर वापस लाओ’ की मांग
अधिवक्ता जस्टिस फरजंद अली के तबादले का खुलकर विरोध कर रहे हैं।
पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता मनीष व्यास ने इस मुद्दे पर जोधपुर के अधिवक्ता समुदाय से आंदोलन के लिए एकजुट होने की अपील करते हुए सोशल मीडिया ग्रुपों में अभियान शुरू कर दिया है।
देर शाम समाचार लिखे जाने तक 60 से अधिक अधिवक्ता इस अभियान के समर्थन में अपनी सहमति जता चुके थे। वहीं, जोधपुर की दोनों बार एसोसिएशनों के कई पदाधिकारी भी इस मुद्दे पर खुलकर सामने आ गए हैं।

तीन पत्रों के बाद अधिवक्ताओं में बढ़ा उबाल
गौरतलब है कि जस्टिस संदीप मेहता की ओर से भारत के मुख्य न्यायाधीश को लिखे गए तीन पत्रों की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद राजस्थान के अधिवक्ता समुदाय में पहले से ही तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
अब जस्टिस फरजंद अली के तबादले के मुद्दे ने इस असंतोष को एक नए अभियान का रूप दे दिया है।
जोधपुर के अधिवक्ताओं का यह अभियान आने वाले दिनों में किस दिशा में जाता है और क्या यह औपचारिक आंदोलन का रूप लेता है, इस पर अब न्यायिक और अधिवक्ता जगत की नजरें टिकी हुई हैं।
जस्टिस उमाशंकर व्यास की तबीयत बिगड़ी, SMS अस्पताल के ICU में भर्ती
राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस उमाशंकर व्यास की तबीयत बुधवार दोपहर अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें तत्काल जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती कराया गया।
जानकारी के अनुसार, उन्हें अस्पताल के आईसीयू में उपचार के लिए रखा गया है।
जस्टिस उमाशंकर व्यास की पत्नी नंदिनी व्यास भी जिला एवं सत्र न्यायाधीश हैं। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संदीप मेहता द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश को लिखे गए पत्रों में जस्टिस उमाशंकर व्यास और उनकी पत्नी नंदिनी व्यास का भी उल्लेख किया गया है।
फिलहाल जस्टिस व्यास के स्वास्थ्य को लेकर अस्पताल में उपचार जारी है।
सोशल मीडिया पर तस्वीरें और पुराने आदेश भी वायरल
इस बीच सोशल मीडिया पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से जुड़ी तस्वीरें, हाईकोर्ट के पुराने आदेश और फैसले भी तेजी से साझा किए जा रहे हैं।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के बूंदी दौरे की कुछ तस्वीरों को विशेष रूप से प्रचारित किया जा रहा है।

सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों को लेकर विभिन्न दावे किए जा रहे हैं और उनमें दिखाई दे रहे एक व्यक्ति को जमीन से जुड़े एक मामले से जोड़कर चर्चा की जा रही है।

बताया जा रहा है कि संबंधित मामले पर हाईकोर्ट की एकलपीठ में आगामी दिनों में सुनवाई होनी है। हालांकि, सोशल मीडिया पर किए जा रहे इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
पूर्व जज ने जताई चिंता
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संदीप मेहता के पत्रों के खुले तौर पर मीडिया में आने पर राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस वी. एस. दवे ने नाराजगी जताई है।

सोशल मीडिया पर लिखे एक संदेश में जस्टिस दवे ने इस घटनाक्रम पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायपालिका के आंतरिक मामलों को इस तरह सार्वजनिक रूप से मीडिया में नहीं आना चाहिए।
उन्होंने न्यायपालिका से जुड़े संवेदनशील आंतरिक मुद्दों के सार्वजनिक चर्चा का विषय बनने पर चिंता जताई।
