जयपुर में हाउसिंग बोर्ड की जमीन पर अवैध कब्जे के मामले में सरकार को राहत नहीं
जयपुर, 23 अक्टूबर
राजधानी जयपुर के सांगानेर में राजस्थान आवासन मंडल (Rajasthan Housing Board) की जमीनों पर 87 अवैध कॉलोनियों को हटाने के मामले में राजस्थान सरकार को Supreme Court से बड़ा झटका लगा है।
Rajasthan Highcourt के आदेश के खिलाफ Supreme Court पहुंची राजस्थान सरकार की याचिका पर Supreme Court की टिप्पणी ने मामले की गंभीरता को उजागर कर दिया है।
Supreme Court ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि यह इतना बड़ा घोटाला हम सोच भी नहीं सकते, ऊपर से नीचे तक सभी मिलीभगत, सब ध्वस्त होगा।
राजस्थान सरकार ने 12 मार्च 2025 को एक आदेश जारी कर सांगनेर की उन सभी 87 कॉलोनियों को नियमित करने का आदेश दिया, जिसमें हाउसिंग बोर्ड (Rajasthan Housing Board) ने जमीन अधिग्रहित कर ली थी और उसके बाद अतिक्रमियों ने उन जमीनों पर अवैध कब्जा कर लिया था।
हाईकोर्ट का सख्त आदेश
इस मामले में PUBLIC AGAINST CORRUPTION ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सरकार के आदेश को चुनौती दी थी।
Rajasthan Highcourt ने 20 अगस्त 2025 को इस मामले पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एस. पी. शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने इस नियमन के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की कि सरकारी जमीनों पर किए गए कब्जों को कैसे नियमित किया जा सकता है और आदेश दिया कि आठ सप्ताह में समस्त कब्जे हटाकर रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
Rajasthan Highcourt ने यह भी कहा कि अवैध कब्जों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तथा जवाब प्रस्तुत होने के पश्चात उन अधिकारियों के खिलाफ भी कार्यवाही की जाएगी जिनकी उपस्थिति में ये अवैध निर्माण हुए हैं।
Rajasthan Highcourt के इस आदेश के खिलाफ राजस्थान सरकार ने Supreme Court में अपील दायर की थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई।
ये हैं मामला
राजस्थान हाउसिंग बोर्ड (Rajasthan Housing Board) ने अपने नए प्रोजेक्ट के लिए बी-2 बाईपास से सांगनेर के अंदर बड़े क्षेत्रफल का चयन किया।
इसके लिए किसानों को मुआवजा देते हुए हाउसिंग बोर्ड ने कاشتकारों से जमीनें खरीदी और उसके बाद काश्तकारों को उनका भुगतान भी कर दिया।
पब्लिक अगेंस्ट करप्शन के अधिवक्ता डॉ टी एन शर्मा, पूनम चंद भंडारी और अभिनव भंडारी के अनुसार बाद में एक योजनाबद्ध तरीके से अधिकारियों ने भूमाफियाओं के साथ मिलीभगत कर उन सभी जमीनों पर कब्जे करवा दिए और अब मिलीभगत करके ही उनका नियमन करवा रहे हैं।
सरकार के कई बड़े IAS और IPS अधिकारियों तथा राजनेताओं ने भी इन अवैध कॉलोनियों में प्लॉट ले रखे हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि सरकार में बड़े अधिकारियों की जानकारी में होने के बावजूद नियमन के लिए सरकार से फैसला करवाया गया।
Rajasthan Highcourt ने संस्था की याचिका पर 12 मार्च 2025 के आदेश पर रोक लगाते हुए आठ सप्ताह में सभी अतिक्रमणों को हटाकर पालना रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही के आदेश दिए।
Rajasthan Highcourt के फैसले के खिलाफ Supreme Court पहुंची राजस्थान सरकार को बड़ा झटका लगा और सरकार ने कोर्ट के रूख को देखते हुए याचिका को वापस कर लिया।