राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस संगीत लोढा कमेटी के अध्यक्ष, जिम्मेदार अधिकारियों, एजेंसियो से वसूला जाएगा खर्च
नई दिल्ली, 21 नवंबर
Bench : Justice Vikram Nath & Justice Sandeep Mehta
पश्चिमी राजस्थान की जोजरी, बांदी और लूणी नदियों में बढ़ते प्रदूषण और इससे प्रभावित लगभग 20 लाख लोगों के जीवन, स्वास्थ्य और आजीविका पर गंभीर संकट को देखते हुए Supreme Court ने शुक्रवार को एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।
Supreme Court ने राजस्थान हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज जस्टिस संगीत लोढ़ा की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल इकोसिस्टम ओवरसाइट कमेटी के गठन का आदेश दिया है।
यह कमेटी जोधपुर, पाली और बालोतरा क्षेत्र में नदी पुनर्जीवन, प्रदूषण नियंत्रण और निगरानी की संपूर्ण प्रक्रिया की देखरेख करेगी।
Supreme Court द्वारा गठित यह कमेटी प्रत्येक 8 सप्ताह में अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश करेगी। कमेटी अपनी पहली रिपोर्ट 27 फरवरी 2026 को कोर्ट में पेश करेगी, साथ ही इसी दिन सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई करेगा।
दो दशक की विफलता
Supreme Court ने अपने 67 पेज के विस्तृत फैसले में इन नदियों में बढ़े प्रदूषण के लिए प्रशासनिक तंत्र, प्रदूषण नियंत्रण संस्थाएँ और औद्योगिक इकाइयों को जिम्मेदार माना है।
Supreme Court ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि पिछले दो दशकों में जो हुआ वह “सतत और संरचनात्मक विफलता” है, जिसमें प्रशासनिक तंत्र, प्रदूषण नियंत्रण संस्थाएँ और औद्योगिक इकाइयाँ अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल रहीं.
संवैधानिक प्रतिज्ञा का गंभीर उल्लंघन
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कोर्ट संवैधानिक सिद्धांतो पर विचार करने के लिए बाध्य हैं क्योकि इस मामले में हुए पर्यावरणीय का नुकसान कोई नियामक चूक या प्रशासनिक कमी भर नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गहरा प्रदूषण उस संवैधानिक प्रतिज्ञा का गंभीर उल्लंघन है जिसके अनुसार राज्य का दायित्व है कि वह नागरिकों के लिए गरिमा, सुरक्षा और कल्याण युक्त जीवन का वातावरण प्रदान करे.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदूषित नदियाँ, दूषित भूजल और इसके परिणामस्वरूप स्वास्थ्य एवं आजीविका पर पड़ने वाला दुष्प्रभाव ये सभी मिलकर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन के अधिकार की मूल भावना को नुकसान पहुंचा रहे है.
कोर्ट ने कहा कि यह अधिकार, जो एक जीवंत संवैधानिक गारंटी होना चाहिए, ऐसे पर्यावरणीय संकट में मात्र एक कमजोर कल्पना बनकर रह जाता है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब पर्यावरणीय क्षति क़ानूनी ढाँचे और संस्थागत तंत्र दोनों के मौजूद होने के बावजूद लगातार बनी रहती है, तब न्यायिक जांच को पुनः उन मूलभूत सिद्धांतों की ओर लौटना पड़ता है जिन्हें इस अदालत ने कई दशकों में विकसित किया है.
आदेश से जागी हैं सरकार की नींद
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि हमें यह कहते हुए खेद होता है कि जिन सुधारात्मक उपायों का वर्णन किया गया है, वे इस कोर्ट के 16 सितंबर 2025 के लिए गए स्वतः संज्ञान के बाद ही शुरू हुए.
कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को—अपने संवैधानिक दायित्व के अनुसार—वर्षों पहले ही स्वतः सक्रिय होकर 24 घंटे अनुपालन सुनिश्चित करना चाहिए था.
कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट से स्पष्ट है कि राजस्थान सरकार इस अदालत के स्वतः संज्ञान के बाद अपनी “नींद से जागी” है और उसने कई कदम उठाए हैं.
बिना उपचार के पानी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट से यह साफ पता चलता हैं कि जोधपुर, पाली और बालोतरा में स्थापित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और कॉमन इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) की क्षमता प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट की मात्रा की तुलना में बहुत कम है.
जिसके चलते अधिक मात्रा में आने वाला सीवरेज बिना उपचारित या आंशिक रूप से उपचारित औद्योगिक अपशिष्ट नदी के पानी में बह रहा हैं.
कोर्ट ने कहा कि उत्पादन और दूषित पानी को साफ करने की क्षमता के बीच जो अंतर वर्षों से बना हुआ है—यह दर्शाता है कि औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार के अनुरूप पर्यावरणीय को नुकसान से बचाने का इन्फ्रास्ट्रक्चर कभी विकसित ही नहीं किया गया.
कोर्ट ने कहा कि वर्तमान इन्फ्रास्ट्रक्चार पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए अपर्याप्त हैं.
ऐसी स्थिती में कोर्ट को एक ऐसा तंत्र बनाना होगा जो स्वतंत्र तरीके से मोनिटरिंग कर सके.
हाई-लेवल इकोसिस्टम ओवरसाइट कमेटी गठित
Supreme Court ने प्रदूषण से पर्यावरण को हुए दीर्घकालिक नुकसान की भरपाई और भविष्य में प्रदूषण को रोकने के लिए जस्टिस संगीत लोढ़ा की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय High-Level Ecosystem Oversight Committee को लेकर विस्तृत आदेश जारी किए हैं।
कमेटी में जस्टिस संगीत लोढ़ा के साथ राजस्थान हाईकोर्ट के पंकज शर्मा को नियुक्त किया गया है।
इसके साथ ही कमेटी में-
• जल प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण और/या पर्यावरण इंजीनियरिंग के क्षेत्र में प्रतिष्ठित तकनीकी विशेषज्ञ, जिन्हें अध्यक्ष द्वारा पहचाना और नियुक्त किया जाएगा;
• अतिरिक्त मुख्य सचिव, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, राजस्थान सरकार;
• संयुक्त सचिव, नगरीय विकास एवं आवासन विभाग, राजस्थान सरकार;
• संयुक्त सचिव, स्थानीय स्वशासन विभाग, राजस्थान सरकार;
• सदस्य सचिव, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) या उनके नामित प्रतिनिधि;
• सदस्य सचिव, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (RSPCB) या उनके नामित प्रतिनिधि;
• प्रबंध निदेशक, राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम लिमिटेड (RIICO);
• निदेशक, राजस्थान अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (RUIDP);
• जोधपुर, पाली और बालोतरा के जिला कलेक्टर शामिल किए गए हैं।
कमेटी का दायित्व
यह कमेटी पूरे नदी तंत्र (Jojari–Bandi–Luni) का वैज्ञानिक निरीक्षण करेगी और सभी प्रदूषण स्रोतों का मैपिंग करेगी।
कमेटी इन नदियों में होने वाले अवैध डिस्चार्ज पॉइंट्स की पहचान, CETP/STP की क्षमता, कमी और वास्तविक संचालन की जांच करेगी।
कमेटी प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों/अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करेगी।
8-8 सप्ताह में देनी होगी रिपोर्ट
Supreme Court द्वारा गठित यह हाई-लेवल कमेटी पर्यावरण एवं तकनीकी विशेषज्ञों सहित प्रशासन को लेकर प्रत्येक 8-8 सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।
IIT जोधपुर, MNIT जयपुर तथा MBM इंजीनियरिंग कॉलेज, जोधपुर को लघु अवधि एवं दीर्घ अवधि की सभी योजनाएँ, प्रस्ताव, व्यवहार्यता आकलन (feasibility assessments), तकनीकी ढाँचे आदि सीधे कमेटी को सौंपेंगे।
समिति इन रिपोर्टों के लिए कार्यान्वयन रणनीतियाँ तैयार करेगी, समयसीमा निर्धारित करेगी और सभी उपायों के क्रियान्वयन की निगरानी करेगी।
समिति NGT के 25 फरवरी 2022 के अंतिम आदेश तथा जस्टिस पी.सी. टाटिया कमेटी की सिफारिशों पर आधारित सभी निर्देशों को समयबद्ध पालन को सुनिश्चित करेगी।
कमेटी प्रदूषित मिट्टी का उपचार, भूजल पुनर्जीवन, नदी पारिस्थितिकी की बहाली, जीव-जंतुओं एवं वनस्पतियों का पुनरोद्धार, भविष्य में प्रदूषण रोकथाम और दीर्घकालिक पर्यावरणीय निगरानी जैसी सभी वैज्ञानिक-तकनीकी एवं प्रशासनिक कार्यवाहियाँ करेगी।
कमेटी आवश्यकता पड़ने पर मैदानी सर्वेक्षण कर सभी डिस्चार्ज पाइंट, पाइपलाइन, नाले, चैनल आदि का विस्तृत मानचित्रण करेगी।
कानूनी एवं अवैध डिस्चार्ज पॉइंट्स की पहचान करेगी, प्रत्येक स्रोत से निकलने वाले अपशिष्ट की प्रकृति व अनुपालन की जाँच करेगी, सभी CETP से जुड़े औद्योगिक इकाइयों में SCADA मीटर की स्थापना और संचालन की जाँच करेगी।
कमेटी यह भी सुनिश्चित करेगी कि CETP से निकलने वाला उपचारित अपशिष्ट untreated सीवेज या वर्षा जल के साथ किसी भी अवस्था में न मिल सके।
कमेटी को सभी SCADA मीटरों को पूरी तरह ऑनलाइन करने, एक सामान्य निगरानी डैशबोर्ड से जोड़ने, तथा सभी STP में भी SCADA आधारित निगरानी उपकरण लगाने की सिफारिश तैयार करनी होगी।
कमेटी CETP, STP, ऑक्सिडेशन तालाब, ड्रेनेज सिस्टम, SCADA यूनिट्स तथा उद्योगों के प्राथमिक उपचार संयंत्रों की नियत समय पर और आकस्मिक जांच करेगी।
कमेटी को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए मानक तय करने होंगे और उनका उल्लंघन होने पर कार्रवाई करनी होगी।
हर 3 माह में जारी होगा डाटा
Supreme Court द्वारा गठित कमेटी के निर्देशों या सुझावों की अवहेलना करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों, एजेंसियों, उद्योगों/औद्योगिक इकाइयों की पहचान की जाएगी और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ ही कमेटी इनके खिलाफ अभियोजन तथा पर्यावरण क्षतिपूर्ति की वसूली की अनुशंसा भी करेगी।
कमेटी प्रत्येक 3 माह में पानी की गुणवत्ता का डेटा प्रकाशित करेगी।
कमेटी किसी भी रिकॉर्ड को तलब कर सकेगी, राज्य और स्थानीय निकायों को निर्देश दे सकेगी, राष्ट्रीय संस्थानों (जैसे CSIR-NEERI) से तकनीकी सहायता माँग सकेगी।
कमेटी उन सभी विषयों से भी निपट सकती है जो प्रदूषण नियंत्रण, नदी पुनर्जीवन, उपचार अवसंरचना वृद्धि और पर्यावरणीय मानकों के प्रवर्तन से संबंधित होंगे।
कमेटी को यह पूर्ण अधिकार होगा कि वह पर्यावरणीय एवं संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हेतु आवश्यक कदम उठा सके।
कमेटी के प्रशासनिक एवं लॉजिस्टिक प्रबंध
Supreme Court के आदेश से गठित कमेटी के लिए राजस्थान सरकार-
- एक RAS अधिकारी (रजिस्ट्रार/नोडल अधिकारी),
- एक PA,
- एक LDC,
- एक कानून सहायक,
- और दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी
उपलब्ध कराएगी.
कमेटी राजस्थान के जोधपुर या अध्यक्ष द्वारा बताए किसी भी निर्धारित स्थान से कार्य कर सकेगी।
सरकार कमेटी को जोधपुर सर्किट हाउस अथवा अध्यक्ष द्वारा निर्धारित स्थान पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा सहित पूर्ण सुसज्जित कार्यालय उपलब्ध कराएगी।
Supreme Court ने सभी व्यवस्थाएँ 9 दिसंबर 2025 तक पूर्ण करने के आदेश दिए हैं।
कमेटी के लिए वित्तीय प्रावधान
Supreme Court ने अपने फैसले में राज्य सरकार को आदेश दिया है कि—
- कमेटी के अध्यक्ष को प्रति माह ₹5,00,000,
- समिति के वकील को प्रति माह ₹1,00,000,
- यात्रा भत्ता, संचालन व्यय, सुरक्षा व्यवस्था और वाहन उपलब्ध कराए जाएँ.
कमेटी के अध्यक्ष को हाईकोर्ट जज के समान TA मिलेगा और कमेटी के निरीक्षण हेतु वकील को प्रति यात्रा ₹10,000 मिलेगा.
Supreme Court ने आदेश दिया है कि यह खर्च गलती करने वाले अधिकारियों, विभागों या प्रदूषण करने वाले उद्योगों से वसूल किया जा सकेगा।
अनुच्छेद 21 के तहत
Supreme Court ने अपने फैसले में कहा कि यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन, स्वास्थ्य और स्वच्छ पर्यावरण के मौलिक अधिकार तथा राज्य के संवैधानिक कर्तव्य की रक्षा के लिए जरूरी है।