बाड़मेर के अमरगढ़ और सगतसर गांवों के नामकरण से जुड़ी सरकार की अधिसूचना को Supreme Court ने किया रद्द, हाईकोर्ट के फैसले पर भी की टिप्पणी
नई दिल्ली/जयपुर। Supreme Court ने राजस्थान में नए राजस्व गांवों के नामकरण को लेकर सरकार द्वारा वर्ष 2020 में जारी की गई अधिसूचना को रद्द करते हुए महत्वपूर्ण और रिपोर्टेबल फैसला दिया है।
Supreme Court ने फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति विशेष, जाति, धर्म या समुदाय के नाम पर राजस्व गांव का नाम रखना न केवल सरकारी नीति के खिलाफ है, बल्कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 का भी उल्लंघन है।
Supreme Court ने इसी आधार पर राजस्थान सरकार द्वारा वर्ष 2020 में जारी उस अधिसूचना को निरस्त कर दिया, जिसके तहत बाड़मेर जिले में ‘अमरगढ़’ और ‘सगतसर’ नामक दो नए राजस्व गांव गठित किए गए थे।
अमरगढ़ और सगतसर
मामला राजस्थान के बाड़मेर जिले के सोहड़ा गांव से जुड़ा है। यहां ग्राम पंचायत की सिफारिश पर वर्ष 2020 में चार नए राजस्व गांव बनाने का प्रस्ताव रखा गया था।
अमरगढ़ और सगतसर नामक गांवों का गठन राजस्थान सरकार ने 31 दिसंबर 2020 को अधिसूचना जारी कर दिया।
इसके बाद जिला कलेक्टर ने 14 जनवरी 2021 को इन नए गांवों की सीमा, क्षेत्रफल और जनसंख्या से संबंधित आदेश भी जारी कर दिए।
वर्ष 2025 में जब ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू होने पर गांव के कुछ निवासियों ने आपत्ति दर्ज कराई कि इन राजस्व गांवों के नाम व्यक्तियों—अमरराम और सगत सिंह—के नाम पर रखे गए हैं, जो राज्य सरकार की स्पष्ट नीति के खिलाफ है।
हाईकोर्ट एकलपीठ ने की थी अधिसूचना रद्द
इस मामले में आपत्ति के बाद याचिकाकर्ता भीकाराम सहित अन्य ग्रामीणों ने राजस्थान हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की।
राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 11 जुलाई 2025 को फैसला सुनाते हुए माना कि अमरगढ़ और सगतसर के नाम सीधे तौर पर व्यक्तियों के नाम से जुड़े हैं।
यह नामकरण राजस्व विभाग की 20 अगस्त 2009 की सर्कुलर नीति का उल्लंघन है।
नीति के अनुसार किसी भी नए राजस्व गांव का नाम किसी व्यक्ति, धर्म, जाति या समुदाय पर आधारित नहीं हो सकता।
इसी आधार पर सिंगल बेंच ने राज्य सरकार की अधिसूचना को रद्द कर दिया, हालांकि सरकार को यह स्वतंत्रता दी कि वह कानून के अनुसार गांवों का पुनः नामकरण कर सकती है।
खंडपीठ ने पलटा एकलपीठ का फैसला
राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ के फैसले के खिलाफ कई अन्य ग्रामीणों ने (जो मूल याचिका में पक्षकार नहीं थे) हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष अपील दायर की।
राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 5 अगस्त 2025 को एकलपीठ के आदेश को पलटते हुए कहा कि जिन मामलों पर पहले निर्णय दिए गए थे, वे अलग परिस्थितियों के थे और पहले से स्थापित प्रक्रिया को वर्षों बाद चुनौती नहीं दी जा सकती।
खंडपीठ के इस फैसले के खिलाफ भीकाराम व अन्य ग्रामीणों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
Supreme Court में जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने मामले के सभी पक्षों की सुनवाई के बाद अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि—
वर्ष 2009 की सर्कुलर कोई साधारण दिशा-निर्देश नहीं, बल्कि राज्य सरकार की बाध्यकारी नीति है और सरकार स्वयं बनाई गई नीति के विपरीत कार्य नहीं कर सकती।
नीति का उद्देश्य सामाजिक सौहार्द और साम्प्रदायिक संतुलन बनाए रखना है।
Supreme Court ने कहा कि व्यक्ति के नाम पर गांव का नाम नीति और संविधान दोनों के खिलाफ है।
Supreme Court ने अपने फैसले में माना कि अमरगढ़ का नाम अमरराम और सगतसर का नाम सगत सिंह नामक व्यक्तियों से जुड़ा है।
कोर्ट ने कहा कि भले ही संबंधित व्यक्तियों ने भूमि दान दी हो, लेकिन इससे नीति का उल्लंघन जायज नहीं ठहराया जा सकता।
Supreme Court ने कहा कि सरकार द्वारा नीति में कोई संशोधन या निरस्तीकरण नहीं किया गया था।
कोर्ट ने कहा कि नीति का उल्लंघन कर जारी की गई अधिसूचना को वैध नहीं माना जा सकता, और ऐसा करना अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार का भी उल्लंघन है।
हाईकोर्ट के फैसले पर टिप्पणी
Supreme Court ने राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ के फैसले पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि—
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले के मूल मुद्दे पर विचार नहीं किया और केवल यह कहना कि प्रक्रिया पुरानी है, कानूनन पर्याप्त आधार नहीं है।
Supreme Court ने कहा कि कोर्ट का दायित्व है कि वह हर मामले का मेरिट पर निर्णय करे।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ के फैसले को रद्द करते हुए एकलपीठ के 11 जुलाई 2025 के फैसले को बहाल कर दिया है।
राजस्थान सरकार द्वारा अमरगढ़ और सगतसर नामक राजस्व गांवों से संबंधित अधिसूचना को भी अवैध घोषित करते हुए रद्द करने का आदेश दिया गया है।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार यदि चाहे तो कानून और नीति के अनुरूप नए नामों के साथ प्रक्रिया दोबारा शुरू कर सकती है।