नई दिल्ली, 26 सितम्बर 2025
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में पुलिस हिरासत में हुई मौतों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से दो सप्ताह में जवाब मांगा हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में संपूर्ण प्रदेश में पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों की कार्यप्रणाली और रखरखाव को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी है.
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने 4 सितम्बर 2025 को दैनिक भास्कर अख़बार की रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए यह स्वप्रेणा प्रसंज्ञान से जनहित याचिका दायर की हैंं.
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 के पहले आठ महीनों में राजस्थान में 11 लोगों की पुलिस हिरासत में मौत हुई थी.
इन मौतो में से 7 घटनाएं केवल उदयपुर संभाग में दर्ज की गईं थी.
मृतको के परिजनों द्वारा सभी मामलों में प्रभावित थानों से सीसीटीवी फुटेज प्राप्त करने के प्रयास विफल रहे क्योंकि पुलिस ने “तुच्छ कारणों” का हवाला देकर जानकारी देने से इनकार कर दिया.
सु्प्रीम कोर्ट ने इसे अपने पूर्व फैसले परम वीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह (2021) 1 SCC 184 में दिए गए दिशा-निर्देशों का गंभीर उल्लंघन माना, जिनमें सभी थानों में सीसीटीवी कवरेज और रिकॉर्डिंग संरक्षित रखना अनिवार्य किया गया था.
इन बिंदूओ पर मांगी जानकारी
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के अतिरिक्त महाधिवक्ता को नोटिस जारी कर निम्नलिखित बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब मांगा है, जिसे राज्य के पुलिस महानिदेशक के हलफ़नामे के साथ दो सप्ताह में दाखिल करना होगा.
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के जिलेवार पुलिस थानों मे सीसीटीवी कैमरो की संख्या और उनकी वर्तमान स्थिती, कैमरो की क्षमता जिसमें रेज़ोल्यूशन, नाइट विज़न, ऑडियो कैप्चर, टैम्पर डिटेक्शन आदि शामिल हैं की संपूर्ण जानकारी मांगी हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही सीसीटीवी कैमरो के वीडियो डेटा का स्टोरेज और सरंक्षण, कैमरो के रखरखाव और खराब कैमरो को ठीक करने की प्रक्रिया, कैमरो की कनेक्टिवीटी, सॉफटवेयर सहित विस्तृत जानकारी पेश करने को कहा हैं.
इन बिंदूओ पर जानकारी..
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार राजस्थान सरकार को निन्मलिखित बिंदूओ पर अपना जवाब पेश करना हैं.
- पुलिस थानों की संख्या – जिलावार विवरण।
- कैमरों की स्थापना – प्रत्येक थाने में लगे कैमरों की संख्या और उनकी स्थिति।
- तकनीकी विशिष्टताएँ – रेज़ोल्यूशन, नाइट विज़न, ऑडियो कैप्चर, टैम्पर डिटेक्शन आदि।
- वीडियो डेटा का संरक्षण – स्टोरेज सिस्टम और संरक्षित रखने की अवधि।
- रखरखाव व निवारण प्रक्रिया – कैमरों की सर्विसिंग की आवृत्ति और खराबी दूर करने की प्रक्रिया।
- कनेक्टिविटी – थानों में इंटरनेट की स्थिति और सेंट्रल सर्वर से एकीकरण।
- सॉफ्टवेयर व डैशबोर्ड – केंद्रीकृत निगरानी प्रणाली।
- मानक कार्यप्रणाली (SOPs) – अधिकारियों का प्रशिक्षण, डेटा प्रोटेक्शन, फुटेज की समीक्षा और छेड़छाड़ रोकने की प्रक्रिया।
- नियमित ऑडिट – कैमरों की कार्यप्रणाली व फुटेज की अखंडता की जांच।
- औचक निरीक्षण व फॉरेंसिक सत्यापन – सिस्टम को छेड़छाड़-रोधी बनाने की व्यवस्था।