सैकड़ो अधिवक्ताओं के हस्ताक्षर के साथ वरिष्ठ अधिवक्ता रतनाराम ठोलिया ने लिखा BCI चेयरमैन को पत्र
जयपुर/जोधपुर। प्रदेश में वकीलों की सबसे बड़ी संस्था के आठ साल बाद होने वाले चुनावों को लेकर अब भी संशय बना हुआ है।
Supreme Court of India के आदेशों के बावजूद राजस्थान में अब तक हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटी का गठन नहीं हो पाने से चुनाव लड़ने वाले अधिवक्ताओं से लेकर वर्तमान बीसीआर सदस्य भी पशोपेश में हैं।
समय पर चुनाव की मांग को लेकर इस मुद्दे पर प्रदेशभर में असंतोष बढ़ता जा रहा है और अधिवक्ताओं ने Bar Council of India से हस्तक्षेप की मांग तेज कर दी है।

सैकड़ो अधिवक्ताओं के हस्ताक्षर के साथ वरिष्ठ अधिवक्ता एवं राजस्थान हाईकोर्ट अधिवक्ता संघ, जोधपुर के पूर्व अध्यक्ष रतनाराम ठोलिया ने Bar Council of India के चेयरमैन को पत्र लिखकर राजस्थान राज्य बार काउंसिल चुनाव की निगरानी के लिए हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटी के गठन की मांग की है।
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रतनाराम ठोलिया ने पत्र में लिखा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा एम. वरदन बनाम भारत संघ एवं अन्य मामले में 18 नवंबर 2025 को दिए गए आदेश के तहत देश की विभिन्न राज्य बार काउंसिलों के चुनाव निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से कराए जाना है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि सभी राज्य बार काउंसिलों के चुनाव 30 अप्रैल 2026 से पहले पूरे किए जाएं।
पत्र में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने न केवल समय-सीमा तय की, बल्कि यह भी आदेश दिया था कि चुनाव प्रक्रिया की निगरानी एक हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटी द्वारा की जाए।

आदेश के अनुसार विभिन्न राज्यों के लिए चरणबद्ध तरीके से समितियों का गठन किया जाना था, जिसके तहत गुजरात, झारखंड के लिए फेज-III A, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल के लिए फेज-III B तथा पंजाब और हरियाणा के लिए फेज-III C के अंतर्गत समितियां गठित की गईं।
लेकिन राजस्थान राज्य बार काउंसिल के लिए अब तक किसी भी हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटी का गठन नहीं किया गया है।
पत्र में इस बात पर गहरी चिंता जताई गई है कि यदि राजस्थान बार काउंसिल के चुनाव बिना किसी उच्च स्तरीय पर्यवेक्षण समिति के कराए जाते हैं, तो चुनाव प्रक्रिया के विलंबित होने की पूरी संभावना बनी रहेगी।
यह भी कहा गया कि पूर्व में भी राजस्थान बार काउंसिल के चुनाव लगभग आठ वर्षों तक लंबित रहे हैं, जिससे प्रदेश के अधिवक्ताओं में भारी असंतोष देखा गया था। ऐसे में बिना सख्त निगरानी के चुनाव कराना सुप्रीम कोर्ट की मंशा के विपरीत होगा।
अधिवक्ता द्वारा लिखे गए पत्र में यह भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट का उद्देश्य केवल समय-सीमा तय करना नहीं था, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी था कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और विवाद-मुक्त रहे। इसके लिए हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पत्र में Bar Council of India से यह अनुरोध किया गया है कि परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राजस्थान राज्य बार काउंसिल चुनाव के लिए भी शीघ्र एक हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटी का गठन किया जाए, ताकि चुनाव प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके और किसी भी प्रकार के विवाद या देरी से बचा जा सके।