जयपुर जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में सीनियर एडवोकेट (Designation) के लिए इस बार जबरदस्त उत्साह देखने को मिला है।
नामांकन की अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 तक कुल 192 अधिवक्ताओं ने आवेदन दाखिल किए, जो यह दर्शाता है कि लंबे समय बाद शुरू हुई इस प्रक्रिया को लेकर अधिवक्ता समुदाय में भारी उत्सुकता और उम्मीदें हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट ने Designation of Senior Advocates Rules, 2026 के तहत प्रदेशभर के अनुभवी और योग्य अधिवक्ताओं से आवेदन आमंत्रित किए थे।
27 फरवरी 2026 को जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, आवेदन जमा करने की अंतिम समयसीमा 31 मार्च शाम 5 बजे तक निर्धारित की गई थी।
जयपुर-जोधपुर दोनों पीठ दोनो में उत्साह
अंतिम दिन तक जयपुर और जोधपुर दोनों पीठों में अधिवक्ताओं ने बड़ी संख्या में आवेदन दाखिल किए।
जोधपुर मुख्यपीठ से करीब 71 आवेदन
जयपुर पीठ से 121 आवेदन
इस तरह कुल संख्या 192 तक पहुंच गई, जो पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक मानी जा रही है।
लंबे इंतजार के बाद शुरू हुई प्रक्रिया
राजस्थान हाईकोर्ट में सीनियर एडवोकेट की डेजिग्नेशन प्रक्रिया लंबे अंतराल के बाद शुरू हुई है।
इससे पहले 25 जनवरी 2022 को अंतिम बार 26 अधिवक्ताओं को सीनियर एडवोकेट का दर्जा दिया गया था।
इनमें गायत्री राठौड़ एकमात्र महिला अधिवक्ता थीं जिन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान मिला था।
इस बार 2-3 महिला अधिवक्ता बन सकती है सीनियर
पिछले कुछ समय से देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत लगातार देश में महिला अधिवक्ताओं को आगे आने का आहवान करते रहे हैं.
कई मंचो पर उन्होने सीनियर एडवोकेट (Designation) में महिला अधिवक्ताओं की भागीदारी पर भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दे चुके हैं.
दूसरी तरफ राजस्थान के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सहित स्क्रुटनी कमेटी में शामिल अधिकांश जज भी महिला अधिवक्ताओं के उत्थान के प्रति सकारात्मक रूख रखते हैं.
इससे उम्मीद जताई जा रही हैं कि राजस्थान को इस बार 2—3 महिला अधिवक्ता को वरिष्ठता मिल सकती हैं.
प्रतिष्ठा और पहचान का प्रतीक
सीनियर एडवोकेट का दर्जा न्यायिक क्षेत्र में बेहद सम्मानजनक माना जाता है।
यह न केवल पेशेवर उत्कृष्टता का प्रतीक है, बल्कि अधिवक्ता की कानूनी समझ, अनुभव और न्यायपालिका में योगदान को भी दर्शाता है।
यही कारण है कि इस बार बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिवक्ता इस दौड़ में शामिल हुए हैं।
अब शुरू होगी स्क्रूटनी प्रक्रिया
हाईकोर्ट प्रशासन द्वारा प्राप्त आवेदनों की स्क्रूटनी प्रक्रिया इसी सप्ताह शुरू होने की संभावना है।
इस दौरान अधिवक्ताओं के अनुभव, पेशेवर उपलब्धियां, प्रस्तुत दस्तावेजों की गहन जांच की जाएगी।
प्रोबोनो सेवा और रिपोर्टेबल जजमेंट होंगे निर्णायक
इस बार डेजिग्नेशन प्रक्रिया में केवल वरिष्ठता ही नहीं, बल्कि कई महत्वपूर्ण पैरामीटर्स को आधार बनाया जाएगा।
विशेष रूप से
प्रोबोनो (निःशुल्क) सेवाएं
रिपोर्टेबल जजमेंट्स में भागीदारी
को निर्णायक मानदंड के रूप में देखा जाएगा।
अधिवक्ताओं में उत्साह, बढ़ी प्रतिस्पर्धा
लंबे समय बाद शुरू हुई इस प्रक्रिया ने अधिवक्ता समुदाय में नई ऊर्जा भर दी है। बड़ी संख्या में आवेदन आने से यह स्पष्ट है कि इस बार सीनियर एडवोकेट बनने की दौड़ बेहद कड़ी और प्रतिस्पर्धात्मक होने जा रही है।
अब सबकी नजरें स्क्रूटनी और अंतिम चयन सूची पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि कौन-कौन अधिवक्ता इस प्रतिष्ठित सम्मान को हासिल करेगा।
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