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83 वर्षीय बुजुर्ग पीड़िता महिला व्हीलचेयर पर कोर्ट पहुंचकर बोलीं : “न्याय नहीं मिला, मजबूरी में समझौता कर रही हूं”- हाईकोर्ट ने DGP-SP को कोर्ट में किया तलब

“80 Lakh Cyber Fraud, Victim Forced to Settle for ₹10 Lakh”: Rajasthan High Court Summons DGP, SP

डिजिटल अरेस्ट कर 80 लाख की ठगी के आरोपी ने जमानत याचिका दायर की, दावा-महिला से 10 लाख में हुआ समझौता

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट में एक 83 वर्षीय बुजुर्ग महिला की दर्दभरी गुहार ने हाईकोर्ट न्यायाधीश को भी झकझोर कर रख दिया।

80 लाख रुपए की साइबर ठगी का शिकार हुई बुजुर्ग महिला ने अदालत में कहा कि उसे मात्र 10 लाख रुपए में समझौता करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

इस पर सख्त रुख अपनाते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि

यह मामला इतना गंभीर है कि “इसने हमारी अंतरात्मा को गहराई से झकझोर दिया है।”

अदालत ने अब इस मामले में तुरंत राज्य के डीजीपी और एसपी साइबर क्राइम को तलब कर लिया।

व्हीलचेयर पर पहुंची पीड़िता, बोली-“न्याय नहीं मिला”

सुनवाई के दौरान एक बेहद भावुक दृश्य सामने आया, जब 83 वर्षीय महिला व्हीलचेयर पर अदालत में पेश हुईं।

महिला ने अदालत से कहा कि

मैं जीवन के अंतिम चरण में हूं और अकेली रहती हूं। मैं साइबर ठगी का शिकार हुई हूं, लेकिन मुझे पूरी रकम नहीं मिली और मुझे न्याय न मिलने के कारण मुझे मजबूरी में समझौता करना पड़ रहा है।

पीड़ित महिला ने स्पष्ट कहा कि जांच एजेंसी से न्याय न मिलने के कारण वह अत्यधिक हताश हो चुकी हैं और मजबूरी में अपने 80 लाख रुपए के वैध दावे को सिर्फ 10 लाख में निपटाने के लिए दबाव में हैं।

जस्टिस समीर जैन की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा—

“यह एक विशिष्ट और अनूठा मामला है, जिसने न्यायालय की अंतरात्मा को गहराई से झकझोर दिया है।”

कोर्ट ने माना कि यह केवल एक आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि एक गंभीर साइबर अपराध है, जिसमें एक बुजुर्ग महिला को निशाना बनाया गया है।

जमानत पर सुनवाई में हुआ खुलासा

इस पूरे मामले का खुलासा राजस्थान हाईकोर्ट साइबर ठगी के आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई से हुआ।

साइबर ठगी के आरोपी नवीन तेमानी ने जमानत याचिका दायर की थी।

सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से कहा गया था कि उसका बुजुर्ग महिला के साथ 10 लाख रुपए में समझौता हो गया है, उसमें उसे जमानत दी जाए।

इस पर कोर्ट में अपने भतीजे के साथ व्हीलचेयर पर कोर्ट पहुंची महिला से जस्टिस समीर जैन ने पूछा तो उन्होंने कहा— जांच एजेंसी द्वारा न्याय नहीं मिलने से अत्यधिक हताशा के कारण उन्हें समझौता करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

बुजुर्ग महिला ने कहा कि उसके 80 लाख रुपए के अपने वैध दावे को महज 10 लाख रुपए में निपटाने के लिए विवश किया गया है।

डीजीटल अरेस्ट कर ठगे 80 लाख

अदालत को बताया गया कि यह पूरा मामला “डिजिटल अरेस्ट” से जुड़ा है, जिसमें बुजुर्ग महिला को मानसिक रूप से नियंत्रित कर उनसे 80 लाख रुपए की ठगी की गई।

बताया गया कि ठगी की राशि लेयर अकाउंट्स के जरिए ट्रांसफर की गई, जिससे पैसा दुबई स्थित विभिन्न खातों में भेजा गया और आरोपी विदेश में होने के कारण अब तक गिरफ्तार नहीं हो सके।

पुलिस ने मामले में चार्जशीट पेश कर दी है, लेकिन गिरफ्तारी अभी तक नहीं हो पाई है।

अंतरात्मा तक को झकझोर दिया

बुजुर्ग महिला की स्थिति और कोर्ट में मौजूद होकर दिए गए असहाय बयानों से जस्टिस समीर जैन ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि

यह मामला बेहद गंभीर और असाधारण है, जिसने अदालत की अंतरात्मा तक को झकझोर कर रख दिया है। पीड़िता की दयनीय स्थिति और कथित साइबर अपराध की भयावहता को देखते हुए कोर्ट उच्च पुलिस अधिकारियों को तुरंत तलब करना उचित समझता है।

डीजीपी-एसपी तलब, जांच अधिकारी को व्यक्तिगत पेशी के आदेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने सख्त निर्देश दिए कि डीजीपी और एसपी साइबर क्राइम 27 मार्च को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश होंगे।

इसके साथ ही इस मामले के जांच अधिकारी को केस डायरी के साथ व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में मौजूद रहने के आदेश दिए गए।

हाईकोर्ट ने सरकारी पक्ष को अगली सुनवाई से पहले सभी दस्तावेज अदालत में पेश करने के आदेश दिए हैं।

जयपुर में रुकने की व्यवस्था करें सरकार

हाईकोर्ट ने इस मामले में बुजुर्ग पीड़ित महिला के जयपुर में रहने की व्यवस्था करने का आदेश दिया है।

हाईकोर्ट ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए राज्य सरकार को पीड़िता के लिए विशेष निर्देश देते हुए कहा कि

यदि महिला सुनवाई के लिए शहर में रहना चाहती हैं, तो उनके लिए उच्च स्तर की आवास और भोजन व्यवस्था की जाए, जिसका पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।

कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि इन निर्देशों की पालना में कोई लापरवाही हुई, तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा।

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