जयपुर। राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्र सूरतगढ़ में जर्जर कोर्ट भवन और न्यायिक व्यवस्था से जुड़ी गंभीर समस्याओं को लेकर सूरतगढ़ बार एसोसिएशन का एक प्रतिनिधिमंडल जयपुर पहुंचा और कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और वरिष्ठ जज जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी से मुलाकात कर विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य न्यायाधीश से मिलकर सूरतगढ़ न्यायालय की जर्जर भवन स्थिति, वर्षों से लंबित नए कोर्ट भवन के निर्माण तथा न्यायिक अधिकारियों की भारी कमी जैसे अहम मुद्दों को लेकर अनुरोध किया।
बार प्रतिनिधिमण्डल के साथ राजस्थान हाईकोर्ट के अधिवक्ता प्रहलाद शर्मा और पुनमचंद भंडारी भी मौजूद रहें.
जर्जर भवन, न्याय के रास्ते में बाधा
सूरतगढ़ न्यायालय की वर्तमान इमारत की स्थिति अत्यंत खस्ता हो चुकी है। बरसों पुराने ढांचे में दरारें, सीलन, अपर्याप्त कक्ष, रिकॉर्ड रूम की कमी और वकीलों एवं वादकारियों के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव लंबे समय से चिंता का विषय बना हुआ है।
प्रतिनिधिमंडल ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को बताया कि नए न्यायालय भवन के लिए भूमि आवंटन हुए लगभग चार वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अब तक निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी रेखांकित किया कि सूरतगढ़ न्यायालय में वर्तमान में केवल एक अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ) पदस्थापित हैं, जबकि मामलों का बोझ कहीं अधिक है।
दीवानी, फौजदारी, पारिवारिक, राजस्व और अन्य विविध मामलों की सुनवाई एक ही न्यायिक अधिकारी के जिम्मे होने से लंबित मामलों की संख्या बढ़ रही है। इससे न केवल न्यायिक प्रक्रिया धीमी हो रही है, बल्कि न्यायालय की कार्यक्षमता पर भी असर पड़ रहा है।
मुख्य न्यायाधीश ने किया आश्वस्त
वकीलों ने आग्रह किया कि सूरतगढ़ जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में कम से कम एक और अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की तत्काल नियुक्ति की जाए, ताकि मामलों का निष्पादन तेजी से हो सके और न्याय तक पहुंच सुगम बने।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने भी इस प्रतिनिधिमंडल से व्यस्तता के बीच मुलाकात कर समस्याएं सुनीं। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने वरिष्ठ जज जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी से भी मुलाकात कर अपनी समस्याएं बताईं।
मुख्य न्यायाधीश ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि सूरतगढ़ न्यायालय से जुड़ी समस्याओं का अति शीघ्र समाधान किया जाएगा। जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने भी वकीलों की बातों को गंभीरता से सुना और भरोसा दिलाया कि उच्च न्यायालय स्तर पर इस विषय को उचित मंच पर रखा जाएगा, ताकि प्रशासनिक और न्यायिक स्तर पर समन्वित कार्रवाई हो सके।