केवल राजधानी जयपुर से ही 100 से अधिक अधिवक्ता कर रहे हैं तैयारी, महिला आरक्षण से बढ़ी प्रतिस्पर्धा
जयपुर। राज्य के अधिवक्ताओं की सर्वोच्च प्रतिनिधि संस्था राजस्थान बार काउंसिल के बहुप्रतीक्षित चुनावों को लेकर पूरे प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। लगभग 8 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद होने जा रहे इन चुनावों को लेकर अधिवक्ताओं में जबरदस्त उत्साह, बेचैनी और प्रतिस्पर्धा का माहौल है। भले ही अभी तक चुनाव की औपचारिक तिथि घोषित नहीं हुई है, लेकिन चुनावी तैयारी, रणनीति और समीकरणों ने पूरे अधिवक्ता समुदाय को सक्रिय कर दिया है।
प्रदेश भर की अदालतों, बार रूम्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर केवल एक ही चर्चा है—“कब होंगे राजस्थान बार काउंसिल के चुनाव?”। तारीख घोषित न होने से जहां अधिवक्ताओं में अधीरता बढ़ रही है, वहीं वर्तमान बार काउंसिल के सदस्यों के प्रति नाराजगी भी खुलकर सामने आने लगी है। कई अधिवक्ता सोशल मीडिया के माध्यम से बीते कार्यकाल की कार्यशैली, पारदर्शिता और निर्णयों पर सवाल उठा रहे हैं।
25 पद, 500 से ज्यादा दावेदार: अभूतपूर्व मुकाबला
राजस्थान बार काउंसिल के 25 निर्वाचित सदस्यों के लिए इस बार मुकाबला बेहद रोचक और ऐतिहासिक होने जा रहा है। शुरुआती आकलन के अनुसार पूरे प्रदेश से 500 से अधिक अधिवक्ता चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर चुके हैं। यह संख्या आने वाले दिनों में और बढ़ने की पूरी संभावना है, क्योंकि अभी कई वरिष्ठ और युवा अधिवक्ता औपचारिक घोषणा से पहले समीकरणों को परख रहे हैं।
इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों का मैदान में उतरना इस बात का संकेत है कि अधिवक्ता समुदाय के भीतर नेतृत्व को लेकर गहरी रुचि और बदलाव की चाह है। लंबे समय बाद हो रहे चुनावों ने न केवल वरिष्ठ अधिवक्ताओं को बल्कि युवा और महिला अधिवक्ताओं को भी नई उम्मीद दी है।
महिला आरक्षण: चुनावी गणित बदलने वाला फैक्टर
इस बार के चुनाव को सबसे ज्यादा महिला आरक्षण ने रोचक और प्रतिस्पर्धात्मक बना दिया है। सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले के बाद बार काउंसिल चुनावों में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर नई उम्मीद जगी है। इसी कारण बड़ी संख्या में महिला अधिवक्ता पूरे आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतर रही हैं।
महिला अधिवक्ताओं का मानना है कि अब समय आ गया है जब नीति निर्माण, अनुशासन, कल्याण योजनाओं और न्यायिक सुधारों में उनकी मजबूत भागीदारी हो। यही वजह है कि इस बार महिला उम्मीदवार केवल “प्रतीकात्मक” नहीं, बल्कि मजबूत दावेदार के रूप में सामने आ रही हैं।

केवल जयपुर से 100 से अधिक अधिवक्ता मैदान में
राजधानी जयपुर इस चुनाव का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरी है। केवल जयपुर से ही 100 से ज्यादा अधिवक्ताओं ने चुनाव लड़ने की तैयारी का ऐलान कर दिया है। इनमें करीब 30 से अधिक महिला अधिवक्ता और 70 से ज्यादा पुरुष अधिवक्ता शामिल हैं।
जयपुर से इतने बड़े पैमाने पर उम्मीदवारों का उतरना यह दर्शाता है कि राजधानी में बार राजनीति सबसे अधिक सक्रिय है। यहां से चुनाव लड़ने वाले अधिकांश अधिवक्ता या तो वर्तमान में विभिन्न बार एसोसिएशनों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं या फिर पूर्व में महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।
एक दर्जन से ज्यादा पूर्व अध्यक्षों की एंट्री
इस चुनाव की सबसे दिलचस्प बात यह है कि मैदान में केवल नए चेहरे ही नहीं, बल्कि कई दिग्गज और अनुभवी नेता भी उतर चुके हैं। राजस्थान बार काउंसिल के वर्तमान अध्यक्ष और कई मौजूदा सदस्य जहां दोबारा चुनावी किस्मत आजमाने की तैयारी में हैं, वहीं प्रदेश भर की विभिन्न बार एसोसिएशनों के पूर्व अध्यक्षों की बड़ी फौज भी मैदान में कूद चुकी है।
केवल जयपुर की बात करें तो बार एसोसिएशन जयपुर, डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन जयपुर और राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर के एक दर्जन से अधिक पूर्व अध्यक्ष सीधे तौर पर चुनावी मैदान में सक्रिय हैं। यदि इसमें पूर्व महासचिव, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष और कार्यकारिणी सदस्यों को भी जोड़ा जाए, तो यह संख्या 50 से भी अधिक पहुंच जाती है।
कौन-कौन हैं चुनावी रणभूमि में
इस बार चुनावी मैदान में उतरने वाले अधिवक्ताओं की सूची लंबी और प्रभावशाली है। अलग-अलग बार एसोसिएशनों के पूर्व अध्यक्ष, महासचिव और पदाधिकारी रह चुके अधिवक्ताओं की एक बड़ी कतार दिखाई दे रही है।
प्रमुख नामों में प्रहलाद शर्मा, राजेश कर्नल, कपिल माथुर, पवन शर्मा, राममनोहर शर्मा, विजय पूनिया, करणपाल सिंह, चिरंजीलाल सैनी, विवेक शर्मा, सुबोध शर्मा, मनीष कुमावत, अमरजीत सिंह मस्ताना, राजेन्द्र अग्रवाल, अतर सिंह, गजराज सिंह, संजय शर्मा, राजेन्द्र तंवर, संजय व्यास, अनुप पारीक, सतीश खांडल, सतीश शर्मा, महेश शर्मा, अनुभव शर्मा, राजेश शर्मा, मंगल सैनी शामिल हैं।
इसके अलावा करणपाल, विजय सिंह पूनिया, कुलदीप पूनिया, सौरभ सारस्वत, रजनीश गुप्ता, गौरव गुप्ता, शीशराम यादव, रणजीत खींचड़, सतीश बलवदा, प्रशांत शर्मा, महेश पंचोली, विपुल शर्मा, राजेश चौधरी, बिरजू सिंह राठौड़, नरेन्द्र सिंह खूड़ी, महेश कुमावत, बाबूलाल बैरवा सहित 70 से अधिक अधिवक्ता फिलहाल सक्रिय तैयारियों में जुटे हुए हैं।
मौजूदा बार काउंसिल सदस्य भी फिर मैदान में
वर्तमान राजस्थान बार काउंसिल के कई सदस्य भी एक बार फिर से चुनावी बिसात बिछा चुके हैं। जयपुर से शाहिद हसन, भुवनेश शर्मा, सुशील शर्मा, डॉ. महेश शर्मा, हरेंद्र सिंह, चिरंजीलाल शर्मा, कपिल माथुर और घनश्याम सिंह राठौड़ ने दोबारा चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है।
इन नेताओं का दावा है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में अधिवक्ताओं के हित में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं और अधूरी योजनाओं को पूरा करने के लिए उन्हें फिर से मौका मिलना चाहिए।
महिला अधिवक्ताओं की मजबूत मौजूदगी
महिला उम्मीदवारों की सूची भी इस बार बेहद प्रभावशाली है। सारिका चौधरी, निधि खंडेलवाल, सुमन शर्मा, संगीता शर्मा, सुमित्रा कुमावत, साजिया खान, प्रमिला शर्मा, तारामणि शर्मा, बीना शर्मा (चौमू), मोबिना खान, आरजू खान, रेखा शर्मा, शशी जैन, बबीता शर्मा, लक्ष्मी शर्मा, सुनीता शर्मा, सोनू सैनी, शिल्पा शर्मा, वंदना शर्मा, बीना कुमारी, बिंदिया शर्मा, नीतू सिंह सहित 30 से अधिक महिला अधिवक्ता सक्रिय रूप से चुनाव की तैयारी में जुटी हैं।
महिला अधिवक्ताओं का कहना है कि यह चुनाव केवल प्रतिनिधित्व का नहीं, बल्कि नीतिगत बदलाव और समान भागीदारी का प्रतीक बनेगा।
चुनावी मुद्दे और अधिवक्ताओं की अपेक्षाएं
इस बार के चुनाव में प्रमुख मुद्दों में अधिवक्ता कल्याण योजनाएं, स्वास्थ्य बीमा, पेंशन, युवा अधिवक्ताओं के लिए आर्थिक सहायता, न्यायालयों में बुनियादी सुविधाएं, पारदर्शिता और बार काउंसिल की जवाबदेही शामिल हैं। युवा अधिवक्ता खास तौर पर यह चाहते हैं कि नई नेतृत्व टीम उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुने।
तारीख की घोषणा का इंतजार
फिलहाल पूरा अधिवक्ता समुदाय केवल एक घोषणा का इंतजार कर रहा है—चुनाव की तारीख। जैसे ही तारीख सामने आएगी, चुनावी प्रचार, समर्थन जुटाने और रणनीतिक गठबंधनों का दौर और तेज हो जाएगा। इतना तय है कि राजस्थान बार काउंसिल के ये चुनाव न केवल ऐतिहासिक होंगे, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए अधिवक्ता राजनीति की दिशा भी तय करेंगे।
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