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सक्षम प्राधिकारी के बिना बर्खास्तगी अवैध: शिक्षक की सेवा समाप्ति पर राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Termination Without Approval of Competent Authority Is Illegal: Rajasthan High Court

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने प्राथमिक शिक्षा विभाग में कार्यरत एक शिक्षक की सेवा समाप्ति को लेकर महत्वपूर्ण फैसला देते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी कर्मचारी को सेवा से हटाने से पहले सक्षम प्राधिकारी द्वारा विधिवत निर्णय लिया जाना अनिवार्य है।

कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक जल्दबाजी या अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर पारित आदेश कानून की कसौटी पर टिक नहीं सकते।

जस्टिस डॉ नूपुर भाटी की एकलपीठ ने बांसवाड़ा जिले के शिक्षक रमेश चंद्र डामा की याचिका स्वीकार करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय), बांसवाड़ा द्वारा पारित सेवा समाप्ति आदेश को अधिकार क्षेत्र के अभाव में अवैध ठहराते हुए रद्द कर करने का आदेश दिया हैं.

क्या था पूरा मामला

याचिकाकर्ता रमेश चंद्र डामा की नियुक्ति 27 सितंबर 2023 को शिक्षक ग्रेड-III (लेवल-1) के पद पर हुई थी।

याचिकाकर्ता नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे थे, इसी दौरान भर्ती परीक्षा में नकल के मामले में 26 जून 2024 को उनके विरुद्ध गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई।

एफआईआर में भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 467, 471, राजस्थान लोक परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2022 की धारा 3, 4 व 6, तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66-D शामिल थीं।

आरोपों के आधार पर याचिकाकर्ता को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया।

पहले निलंबन, फिर अचानक बर्खास्तगी

एफआईआर के बाद विभाग ने 10 जुलाई 2024 को याचिकाकर्ता को निलंबित कर दिया। निलंबन आदेश से आहत होकर याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में अलग से याचिका दायर की।

इस याचिका के लंबित रहते हुए विभाग ने 14 जनवरी 2025 को निलंबन आदेश वापस ले लिया, जिससे मामला निष्प्रभावी हो गया।

लेकिन इसी प्रक्रिया के दौरान चौंकाने वाला कदम उठाते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय), बांसवाड़ा ने 13 जनवरी 2025 को याचिकाकर्ता को सेवा से बर्खास्त करने का आदेश पारित कर दिया।

याचिकाकर्ता की दलील-आदेश देने वाला अधिकारी सक्षम नहीं

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता डॉली जायसवाल ने दलील दी कि शिक्षक ग्रेड-III जैसे पदों पर सेवा समाप्ति का अधिकार जिला स्थापना समिति (District Establishment Committee) को है

जिला शिक्षा अधिकारी को एकतरफा बर्खास्तगी का अधिकार नहीं है.

अधिवक्ता ने कहा कि बिना सक्षम समिति के निर्णय के पारित आदेश अधिकार क्षेत्र से परे है और शून्य (Void) माना जाएगा

इसके समर्थन में उन्होंने हाईकोर्ट की समन्वय पीठ द्वारा पूर्व में दिए गएमहेश चंद्र पटेल बनाम राज्य सरकार का हवाला दिया, जिसमें बिल्कुल समान परिस्थितियों में बर्खास्तगी आदेश को रद्द किया गया था।

राज्य सरकार का पक्ष

राज्य सरकार की ओर से सेवा समाप्ति आदेश का बचाव करने का प्रयास किया, लेकिन सरकारी अधिवक्ता यह स्वीकार करने से नहीं बच सके कि पूर्व में समान मामले में हाईकोर्ट द्वारा याचिकाकर्ता के पक्ष में निर्णय दिया जा चुका है।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

सभी पक्षों को सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने स्पष्टकहा कि—

“सेवा समाप्ति से पूर्व जिला स्थापना समिति का निर्णय लिया जाना अनिवार्य था। इसके बाद ही जिला शिक्षा अधिकारी आदेश पारित कर सकते थे। वर्तमान मामले में यह प्रक्रिया उलट दी गई, जो कानून की दृष्टि में अस्वीकार्य है।”

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि प्रशासनिक सुविधा या कथित सार्वजनिक हित के नाम पर वैधानिक प्रक्रिया की अनदेखी नहीं की जा सकती।

बर्खास्तगी आदेश रद्द, लेकिन कार्रवाई की छूट बरकरार

हाईकोर्ट ने 13 जनवरी 2025 के सेवा समाप्ति आदेश को रद्द करने का आदेश दिया हैं हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता के विरुद्ध आरोप प्रमाणित होते हैं

और सक्षम प्राधिकारी विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाते हुए निर्णय लेता है तो विभाग को कानून के अनुसार कार्रवाई करने से नहीं रोका गया है।

हाईकोर्ट ने इस मामले में संबंधित अधिकारियों को आदेश दिए हैं कि यदि दोबारा कार्रवाई करनी है तो चार सप्ताह के भीतर विधिसम्मत प्रक्रिया अपनाई जाए

यदि भविष्य में याचिकाकर्ता निर्दोष पाया जाता है और पुनर्नियुक्ति का आदेश होता है, तो उसे सभी परिणामी लाभ दिए जाएंगे

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