सरसों तेल विवाद में राजस्थान हाईकोर्ट ने निचली अदालत की अंतरिम रोक बरकरार रखी, कहा- समान नाम, लोगो और पैकेजिंग से उपभोक्ताओं में भ्रम, यह सिर्फ व्यापारिक नहीं बल्कि जनहित का मामला
जोधपुर। ट्रेडमार्क कानून के क्षेत्र में राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया हैं कि ट्रेडमार्क उल्लंघन केवल दो व्यापारिक पक्षों का निजी विवाद नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं और आम जनता के हितों से भी गहराई से जुड़ा हुआ विषय है।
हाईकोर्ट ने फेसले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि जब समान प्रकृति के उत्पादों पर भ्रामक रूप से मिलते-जुलते नाम, लोगो और पैकेजिंग का उपयोग किया जाता है, तो इससे आम उपभोक्ता के मन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होना स्वाभाविक है, जिसे रोकना अदालत का कर्तव्य है
यह आदेश जस्टिस जस्टिस अरूण मोंगा और जस्टिस योगेन्द्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने ‘दुर्गा’ नाम से सरसों तेल के निर्माण और बिक्री से जुड़े विवाद में निचली अदालत द्वारा दिए गए अंतरिम निषेधाज्ञा आदेश को बरकरार रखते हुए दिया हैं.
क्या है पूरा मामला
यह विवाद पाली जिले के सुमेरपुर क्षेत्र में सरसों तेल के निर्माण और विपणन से जुड़ा है। प्रतिवादी फर्म एम/एस विनायक कॉर्पोरेशन ने दावा किया कि वह वर्ष 1999 से ‘DURGA’ ट्रेडमार्क के तहत सरसों एवं मूंगफली का तेल बनाकर बेच रही है।
इस ट्रेडमार्क का विधिवत पंजीकरण वर्ष 2018 में हुआ और बाद में असाइनमेंट डीड के माध्यम से इसके अधिकार वर्तमान फर्म को हस्तांतरित किए गए।
दूसरी ओर अपीलकर्ता मुपुब मेहता, जो ‘TRIBAA DURGA’ नाम से सरसों तेल का कारोबार कर रहे थे, पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने जानबूझकर ऐसा नाम, लोगो और पैकेजिंग अपनाई, जो पहले से पंजीकृत ‘DURGA’ ब्रांड से अत्यधिक समान है और जिससे उपभोक्ताओं को भ्रम हो सकता है।
निचली अदालत का आदेश और उस पर अपील
जोधपुर स्थित कॉमर्शियल कोर्ट संख्या 1 ने 7 अक्टूबर 2025 को इस विवाद में आदेश पारित करते हुए अपीलकर्ता को ‘DURGA’ अथवा उससे मिलते-जुलते किसी भी नाम, लेबल या पैकिंग के अंतर्गत सरसों तेल के निर्माण और बिक्री से अंतरिम रूप से रोक दिया था।
इस आदेश को चुनौती देते हुए अपीलकर्ता ने हाईकोर्ट में दलील दी कि ‘दुर्गा’ एक देवी का नाम है, जो सामान्य शब्द है और किसी एक व्यक्ति या फर्म के एकाधिकार में नहीं हो सकता।
‘TRIBAA DURGA’ एक संयुक्त और अलग ट्रेडमार्क है, जो उच्चारण, संरचना और व्यावसायिक प्रभाव में भिन्न है।
अपील में कहा गया कि पैकेजिंग, रंग-संयोजन और कलात्मक प्रस्तुति अलग-अलग हैं, कई अन्य व्यापारी भी ‘दुर्गा’ शब्द का प्रयोग कर रहे हैं।
प्रतिवादी की दलीलें
प्रतिवादी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अपनील दलीलों में अपीलकर्ता द्वारा अदालत के समक्ष तथ्य छिपाने का आरोप लगाया.
अधिवक्ता ने कहा कि अपीलकर्ता ने जनवरी 2025 में जब अपने ट्रेडमार्क के पंजीकरण के लिए आवेदन किया, तब स्वयं यह घोषणा की थी कि यह ट्रेडमार्क “proposed to be used” है, यानी पूर्व उपयोग का कोई दावा ही नहीं था।
इस प्रकार, एक ओर अदालत में 2021 से उपयोग का दावा करना और दूसरी ओर ट्रेडमार्क रजिस्ट्री के समक्ष पूर्व उपयोग से इनकार करना, परस्पर विरोधी और भ्रामक रुख है, जो अपीलकर्ता को किसी भी न्यायसंगत राहत से वंचित करता है।
हाईकोर्ट का फैसला
खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि ट्रेडमार्क अधिनियम, 1999 की धारा 31 के तहत पंजीकृत ट्रेडमार्क को वैध माना जाता है।
जब उत्पाद समान हों और लोगो व नाम में भी अत्यधिक समानता हो, तो भ्रम की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।
“औसत बुद्धि वाले उपभोक्ता” की कसौटी पर परखा जाना चाहिए, न कि विशेषज्ञ की तरह सूक्ष्म अंतर खोजे जाएं।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल यह तर्क कि ‘दुर्गा’ शब्द सामान्य है या कई लोग उसका प्रयोग करते हैं, अपने-आप में पंजीकृत ट्रेडमार्क के उल्लंघन से बचाव का आधार नहीं बन सकता।
जनहित को बताया सर्वोपरि
राजस्थान हाईकोर्ट ने सबसे महत्वपूर्ण कानूनी बिंदू को लेकर कहा कि
“ट्रेडमार्क उल्लंघन केवल विवादित पक्षों को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि इससे उपभोक्ताओं और आम जनता के साथ धोखा होने की आशंका भी रहती है। ऐसे मामलों में जनहित सर्वोपरि होना चाहिए।”
अदालत ने माना कि समान नाम और पैकेजिंग वाले सरसों तेल से आम उपभोक्ता यह मान सकता है कि दोनों उत्पाद एक ही कंपनी के हैं, जो बाजार में विश्वास और पारदर्शिता को नुकसान पहुंचाता है।
अपील खारिज, अंतरिम रोक बरकरार
इन सभी तथ्यों और कानूनी सिद्धांतों के आधार पर हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत के आदेश में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।
हाईकोर्ट ने अपीलकर्ता की अपील खारिज करते हुए ‘TRIBAA DURGA’ नाम से सरसों तेल के निर्माण और बिक्री पर लगी अंतरिम रोक जारी रहेगी।
ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया गया कि वह मुख्य वाद का निपटारा स्वतंत्र रूप से करे, बिना हाईकोर्ट की टिप्पणियों से प्रभावित हुए।
क्यों है यह फैसला अहम
यह निर्णय न केवल ट्रेडमार्क कानून में ब्रांड संरक्षण को मजबूती देता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि धार्मिक या सामान्य शब्दों का उपयोग भी तब प्रतिबंधित हो सकता है, जब वे पंजीकृत ट्रेडमार्क के रूप में उपभोक्ता भ्रम का कारण बनें।
ट्रेडमार्क विवाद में ‘जनहित’ सर्वोपरि: ‘दुर्गा’ ब्रांड पर अंतरिम रोक राजस्थान हाईकोर्ट ने लगाई मुहर
जोधपुर। ट्रेडमार्क कानून के क्षेत्र में राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया हैं कि ट्रेडमार्क उल्लंघन केवल दो व्यापारिक पक्षों का निजी विवाद नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं और आम जनता के हितों से भी गहराई से जुड़ा हुआ विषय है।
हाईकोर्ट ने फेसले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि जब समान प्रकृति के उत्पादों पर भ्रामक रूप से मिलते-जुलते नाम, लोगो और पैकेजिंग का उपयोग किया जाता है, तो इससे आम उपभोक्ता के मन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होना स्वाभाविक है, जिसे रोकना अदालत का कर्तव्य है
यह आदेश जस्टिस जस्टिस अरूण मोंगा और जस्टिस योगेन्द्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने ‘दुर्गा’ नाम से सरसों तेल के निर्माण और बिक्री से जुड़े विवाद में निचली अदालत द्वारा दिए गए अंतरिम निषेधाज्ञा आदेश को बरकरार रखते हुए दिया हैं.
क्या है पूरा मामला
यह विवाद पाली जिले के सुमेरपुर क्षेत्र में सरसों तेल के निर्माण और विपणन से जुड़ा है। प्रतिवादी फर्म एम/एस विनायक कॉर्पोरेशन ने दावा किया कि वह वर्ष 1999 से ‘DURGA’ ट्रेडमार्क के तहत सरसों एवं मूंगफली का तेल बनाकर बेच रही है।
इस ट्रेडमार्क का विधिवत पंजीकरण वर्ष 2018 में हुआ और बाद में असाइनमेंट डीड के माध्यम से इसके अधिकार वर्तमान फर्म को हस्तांतरित किए गए।
दूसरी ओर अपीलकर्ता मुपुब मेहता, जो ‘TRIBAA DURGA’ नाम से सरसों तेल का कारोबार कर रहे थे, पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने जानबूझकर ऐसा नाम, लोगो और पैकेजिंग अपनाई, जो पहले से पंजीकृत ‘DURGA’ ब्रांड से अत्यधिक समान है और जिससे उपभोक्ताओं को भ्रम हो सकता है।
निचली अदालत का आदेश और उस पर अपील
जोधपुर स्थित कॉमर्शियल कोर्ट संख्या 1 ने 7 अक्टूबर 2025 को इस विवाद में आदेश पारित करते हुए अपीलकर्ता को ‘DURGA’ अथवा उससे मिलते-जुलते किसी भी नाम, लेबल या पैकिंग के अंतर्गत सरसों तेल के निर्माण और बिक्री से अंतरिम रूप से रोक दिया था।
इस आदेश को चुनौती देते हुए अपीलकर्ता ने हाईकोर्ट में दलील दी कि ‘दुर्गा’ एक देवी का नाम है, जो सामान्य शब्द है और किसी एक व्यक्ति या फर्म के एकाधिकार में नहीं हो सकता।
‘TRIBAA DURGA’ एक संयुक्त और अलग ट्रेडमार्क है, जो उच्चारण, संरचना और व्यावसायिक प्रभाव में भिन्न है।
अपील में कहा गया कि पैकेजिंग, रंग-संयोजन और कलात्मक प्रस्तुति अलग-अलग हैं, कई अन्य व्यापारी भी ‘दुर्गा’ शब्द का प्रयोग कर रहे हैं।
प्रतिवादी की दलीलें
प्रतिवादी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अपनील दलीलों में अपीलकर्ता द्वारा अदालत के समक्ष तथ्य छिपाने का आरोप लगाया.
अधिवक्ता ने कहा कि अपीलकर्ता ने जनवरी 2025 में जब अपने ट्रेडमार्क के पंजीकरण के लिए आवेदन किया, तब स्वयं यह घोषणा की थी कि यह ट्रेडमार्क “proposed to be used” है, यानी पूर्व उपयोग का कोई दावा ही नहीं था।
इस प्रकार, एक ओर अदालत में 2021 से उपयोग का दावा करना और दूसरी ओर ट्रेडमार्क रजिस्ट्री के समक्ष पूर्व उपयोग से इनकार करना, परस्पर विरोधी और भ्रामक रुख है, जो अपीलकर्ता को किसी भी न्यायसंगत राहत से वंचित करता है।
हाईकोर्ट का फैसला
खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि ट्रेडमार्क अधिनियम, 1999 की धारा 31 के तहत पंजीकृत ट्रेडमार्क को वैध माना जाता है।
जब उत्पाद समान हों और लोगो व नाम में भी अत्यधिक समानता हो, तो भ्रम की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।
“औसत बुद्धि वाले उपभोक्ता” की कसौटी पर परखा जाना चाहिए, न कि विशेषज्ञ की तरह सूक्ष्म अंतर खोजे जाएं।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल यह तर्क कि ‘दुर्गा’ शब्द सामान्य है या कई लोग उसका प्रयोग करते हैं, अपने-आप में पंजीकृत ट्रेडमार्क के उल्लंघन से बचाव का आधार नहीं बन सकता।
जनहित को बताया सर्वोपरि
राजस्थान हाईकोर्ट ने सबसे महत्वपूर्ण कानूनी बिंदू को लेकर कहा कि
“ट्रेडमार्क उल्लंघन केवल विवादित पक्षों को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि इससे उपभोक्ताओं और आम जनता के साथ धोखा होने की आशंका भी रहती है। ऐसे मामलों में जनहित सर्वोपरि होना चाहिए।”
अदालत ने माना कि समान नाम और पैकेजिंग वाले सरसों तेल से आम उपभोक्ता यह मान सकता है कि दोनों उत्पाद एक ही कंपनी के हैं, जो बाजार में विश्वास और पारदर्शिता को नुकसान पहुंचाता है।
अपील खारिज, अंतरिम रोक बरकरार
इन सभी तथ्यों और कानूनी सिद्धांतों के आधार पर हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत के आदेश में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।
हाईकोर्ट ने अपीलकर्ता की अपील खारिज करते हुए ‘TRIBAA DURGA’ नाम से सरसों तेल के निर्माण और बिक्री पर लगी अंतरिम रोक जारी रहेगी।
ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया गया कि वह मुख्य वाद का निपटारा स्वतंत्र रूप से करे, बिना हाईकोर्ट की टिप्पणियों से प्रभावित हुए।
क्यों है यह फैसला अहम
यह निर्णय न केवल ट्रेडमार्क कानून में ब्रांड संरक्षण को मजबूती देता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि धार्मिक या सामान्य शब्दों का उपयोग भी तब प्रतिबंधित हो सकता है, जब वे पंजीकृत ट्रेडमार्क के रूप में उपभोक्ता भ्रम का कारण बनें।